2.20 घंटे में 760 KM, 3 राज्य होंगे कनेक्ट... भारत के अगले बुलेट ट्रेन का पूरा प्लान ये रहा

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद अब दक्षिण भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विस्तार की तैयारी है. प्रस्तावित योजना के मुताबिक हैदराबाद और चेन्नई के बीच मौजूदा करीब 12 घंटे का रेल सफर घटकर लगभग 2 घंटे 20 मिनट हो सकता है. हालांकि, अभी प्रोजेक्ट प्लानिंग, अलाइनमेंट और डीपीआर तैयार करने के चरण में है.

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भारत हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई को जोड़ने वाले नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की प्लानिंग कर रहा है. (Photo: AI Generated) भारत हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई को जोड़ने वाले नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की प्लानिंग कर रहा है. (Photo: AI Generated)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:11 PM IST

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम काफी आगे पहुंच गया है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने सूरत से बिलिमोरा तक के स्ट्रेच पर अगले साल 15 अगस्त तक बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू करने की डेडलाइन तय की है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक मुंबई से अहमदाबाद को जोड़ने वाला 508 किमी लंबा यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर 2029 तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा.

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इस बीच केंद्र सरकार ने देश में एक और नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर प्लानिंग शुरू कर दी है. आने वाले वर्षों में हैदराबाद से चेन्नई के बीच रेल यात्रा हाई-स्पीड होगी. प्रस्तावित हैदराबाद-अमरावती-चेन्नई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए दोनों शहरों के बीच करीब 12 घंटे का मौजूदा रेल सफर घटकर लगभग 2 घंटे 20 मिनट रह जाएगा. यह परियोजना दक्षिण भारत के तीन राज्यों—तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 760.09 किलोमीटर होगी और इसमें 18 स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है. यह परियोजना बजट 2026-27 में घोषित हाई-स्पीड रेल विस्तार योजना का हिस्सा है. फिलहाल प्रोजेक्ट प्लानिंग और डेवलपमेंट स्टेज में है. तीनों राज्यों में ट्रैक की लंबाई अलग-अलग होगी. आंध्र प्रदेश में करीब 518.54 किमी, तेलंगाना में 180.32 किमी और तमिलनाडु में 61.23 किमी रेल लाइन प्रस्तावित है.

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इन शहरों से होकर गुजरेगी हाई-स्पीड रेल

  • प्रस्तावित रूट में तेलंगाना के हैदराबाद, शमशाबाद, भारत सिटी/फ्यूचर सिटी, ड्राई पोर्ट, हलिया और वडापल्ली शामिल हैं.
  • आंध्र प्रदेश में दाचेपल्ली, अमरावती, गुंटूर, चिराला, ओंगोल, कवाली, नेल्लोर, गुडूर और तिरुपति को जोड़े जाने का प्रस्ताव है.
  • वहीं तमिलनाडु में तिरुवल्लूर, चेन्नई आउटर रिंग रोड और चेन्नई सेंट्रल प्रस्तावित स्टेशनों में शामिल हैं.

अमरावती को जोड़ना क्यों है अहम?

इस कॉरिडोर में अमरावती को शामिल किया जाना सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है. आंध्र प्रदेश की ओर से लंबे समय से जोर दिया जाता रहा है कि हाई-स्पीड रेल का अलाइनमेंट राजधानी क्षेत्र से होकर गुजरे. ऐसा होने से अमरावती और आसपास के इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की ओर से आगे अलाइनमेंट और फिजिबिलिटी स्टडी के साथ डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की दिशा में काम किया जाना है.

यह भी पढ़ें: India's First Bullet Train: अगले साल 15 अगस्त से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, जोरों पर काम... रेल मंत्री ने दिखाई झलक

रेल कॉरिडोर देगा इकोनॉमिक बूस्ट

हाई-स्पीड रेल का फायदा सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रह सकता. जिन शहरों और इलाकों में स्टेशन बनेंगे, वहां कमर्शियल और रियल एस्टेट गतिविधियां बढ़ने की संभावना रहती है. होटल, ऑफिस, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए इन क्षेत्रों की आकर्षकता बढ़ सकती है.

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तेलंगाना में शमशाबाद, फ्यूचर सिटी, ड्राई पोर्ट, हलिया और वडापल्ली जैसे इलाकों को फायदा मिल सकता है. आंध्र प्रदेश में अमरावती, गुंटूर, दाचेपल्ली, ओंगोल और नेल्लोर संभावित ग्रोथ सेंटर बन सकते हैं. वहीं तिरुवल्लूर और चेन्नई के उत्तरी हिस्सों को भी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है.

अभी प्लानिंग के स्टेज पर है प्रोजेक्ट

अगर यह कॉरिडोर तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों और कारोबारियों के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है. करीब 2 घंटे 20 मिनट का संभावित यात्रा समय एक ही दिन में बिजनेस ट्रिप या शॉर्ट विजिट को आसान बना सकता है. हालांकि, अभी अंतिम अलाइनमेंट, स्टेशन की लोकेशन, जमीन अधिग्रहण, फंडिंग मॉडल और निर्माण की समयसीमा तय होना बाकी है.

आगे की फिजिबिलिटी स्टडी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) से इस प्रोजेक्ट की लागत, रूट और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी. फिलहाल यह प्रोजेक्ट दक्षिण भारत में हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्लानिंग के स्टेज पर है. हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के अलाइनमेंट और डीपीआर का काम पूरा होने के बाद ही जमीन अधिग्रहण, फंडिंग और कंस्ट्रक्शन को लेकर आगे के फैसले लिए जाएंगे.

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