8th Pay Commission: कर्मचारी संगठनों की 8वें वेतन आयोग से बड़ी मांग... HRA-TA पर दिए ये प्रस्ताव

Demands from 8th CPC: 8वें वेतन आयोग से केंद्रीय कर्मचारियों को सिर्फ बेसिक सैलरी बढ़ने की ही उम्मीद नहीं है, बल्कि HRA और TA जैसे भत्तों में भी बदलाव की मांग हो रही है. कर्मचारी संगठनों ने X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए HRA की दरें 36%, 24% और 12% करने का प्रस्ताव दिया है.

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कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग से HRA और TA जैसे भत्तों में भी बदलाव की मांग कर रहे हैं. (Photo: ITG/@Gfx) कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग से HRA और TA जैसे भत्तों में भी बदलाव की मांग कर रहे हैं. (Photo: ITG/@Gfx)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:34 AM IST

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है. कर्मचारी संगठन सिर्फ बेसिक सैलरी और पेंशन में बदलाव ही नहीं, बल्कि दूसरे भत्तों में भी बढ़ोतरी चाहते हैं. इनमें हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) और महंगाई भत्ता (DA) शामिल हैं. एक प्रमुख मांग लेवल 1 के कर्मचारियों को हर महीने कम से कम 9,000 रुपये ट्रांसपोर्ट अलाउंस देने की है. वहीं, HRA की दरें शहरों की श्रेणी के हिसाब से 36%, 24% और 12% करने का प्रस्ताव है. हालांकि, ये सभी मांगें हैं, अभी सरकार की ओर से इन्हें मंजूरी नहीं मिली है.

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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़े शहरों में घर का किराया लगातार महंगा हो रहा है. प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने के साथ किराये का बोझ भी बढ़ा है. ऐसे में कर्मचारी संगठन मौजूदा हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के ढांचे में बदलाव चाहते हैं. ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने HRA की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए अलग-अलग दरें तय करने की मांग की गई है.

X श्रेणी के शहर: बेसिक सैलरी का 36% HRA

Y श्रेणी के शहर: बेसिक सैलरी का 24% HRA

Z श्रेणी के शहर: बेसिक सैलरी का 12% HRA

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा HRA दरें बढ़ते किराये के मुकाबले कम पड़ रही हैं. अगर इन दरों में बदलाव होता है, तो कर्मचारियों को घर के किराये का खर्च उठाने में राहत मिल सकती है.

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लेवल-1 कर्मचारियों के लिए ₹9,000 TA की मांग

महंगाई के साथ रोजाना ऑफिस आने-जाने का खर्च भी बढ़ रहा है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें, बस और मेट्रो का किराया और शहरों में ट्रैफिक की समस्या कर्मचारियों के यात्रा खर्च को बढ़ा रही हैं. इसी को देखते हुए ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने 8वें वेतन आयोग के सामने लेवल 1 के कर्मचारियों के लिए कम से कम 9,000 रुपये प्रति महीने ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) देने की मांग रखी है. संगठन का मानना है कि मौजूदा ट्रांसपोर्ट अलाउंस बढ़ते सफर खर्च के हिसाब से पर्याप्त नहीं है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो लेवल 1 के कर्मचारियों को हर महीने मिलने वाले TA में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, अभी यह सिर्फ कर्मचारी संगठन की मांग है.

यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: रिपोर्ट आने से पहले 67% हो जाएगा DA? समझें कहां से आया ये आंकड़ा

रेलवे में रिस्क-हार्डशिप अलाउंस बढ़ाने की मांग

8वें वेतन आयोग से रेलवे कर्मचारी यूनियनों को भी कई उम्मीदें हैं. रेलवे में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं, जो चौबीसों घंटे ट्रेन संचालन, ट्रैक की देखरेख और मरम्मत जैसे काम करते हैं. इनमें से कई कर्मचारियों को जोखिम और मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है. ऐसे कर्मचारियों के लिए यूनियनों ने रिस्क और हार्डशिप अलाउंस बढ़ाने की मांग की है. इसके अलावा खतरे वाले काम के लिए अलग भुगतान और ड्रेस अलाउंस में बदलाव का प्रस्ताव भी रखा गया है. इन मांगों का मकसद मुश्किल और जोखिम भरे काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर आर्थिक राहत दिलाना है.

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DA 70% होने पर बेसिक सैलरी में मर्जर होगा?

महंगाई भत्ता (DA) भी 8वें वेतन आयोग में अहम मुद्दा है. जानकारों के मुताबिक, जब DA एक खास स्तर पर पहुंचता है, तो इसे बेसिक सैलरी में मर्ज करने का प्रावधान है. इसमें 70% DA का स्तर भी चर्चा में है. अगर DA को बेसिक सैलरी में मिलाया जाता है, तो कर्मचारियों की मूल वेतन बढ़ जाएगा. इसका असर सिर्फ बेसिक पे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि HRA और बेसिक सैलरी के आधार पर तय होने वाले दूसरे भत्तों पर भी पड़ सकता है. पेंशन की गणना पर भी इसका असर हो सकता है. हालांकि, DA के 70% होने पर उसका बेसिक सैलरी में विलय अपने आप नहीं हो जाता. इसके लिए सरकार का फैसला जरूरी होगा.

यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद क्या होगा? समझें 5 चरण का पूरा प्रोसेस

कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर कितना असर

HRA, TA और DA में बदलाव का असर कर्मचारियों की हर महीने मिलने वाली कुल रकम पर पड़ सकता है. उदाहरण के लिए, HRA बढ़ने से किराये के खर्च में राहत मिल सकती है, जबकि TA बढ़ने से ऑफिस आने-जाने का खर्च कम महसूस होगा. वहीं, अगर DA को बेसिक सैलरी में मिलाने का फैसला होता है, तो बेसिक पे से जुड़े दूसरे भत्तों और पेंशन की गणना भी बदल सकती है. इस तरह कर्मचारियों की कुल कमाई और मिलने वाले फायदों पर एक से ज्यादा स्तर पर असर पड़ सकता है.

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अभी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार

कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी गई HRA, TA और DA से जुड़ी मांगों को अभी मंजूर फैसला नहीं माना जाना चाहिए. 8वां वेतन आयोग इन प्रस्तावों पर विचार करने के बाद अपनी सिफारिशें देगा. इसके बाद केंद्र सरकार और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी. सरकार की ओर से लागू करने के विस्तृत निर्देश जारी होने के बाद ही यह साफ होगा कि किस कर्मचारी को कितना फायदा मिलेगा और नई दरें कब से लागू होंगी. फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को आयोग की सिफारिशों का इंतजार करना होगा.

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