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स्‍पीड 15kmph, 120000 यात्री... 21 दिन में इस नन्‍ही ट्रेन ने कमाए ₹1.41 करोड़

आजतक बिजनेस डेस्क
  • नई दिल्‍ली,
  • 25 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:17 PM IST
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दार्जिलिंग में चलने वाली एक छोटी ट्रेन ने सिर्फ 21 दिनों में कमाल किया है. इसने सरकार को करोड़ो रुपये का रेवेन्‍यू दिया है और हजारों यात्रियों को खूबसूरत वादियों की सैर कराई है. यह कारनामा इस नन्‍ही सी ट्रेन ने 1 से 21 अक्‍टूबर 2026 के बीच की है.  
 

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हम बात कर रहे हैं दार्जिलिंग की मशहूर टॉय ट्रेन की, जो एक बार फिर चर्चा में है. दुर्गा पूजा के दौरान पर्यटकों की भीड़ ऐसी उमड़ी कि 1 से 21 अक्टूबर 2026 के बीच करीब 12 हजार यात्रियों ने इस ऐतिहासिक ट्रेन में सफर किया. इस दौरान दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे ने ₹1.41 करोड़ से ज्यादा का राजस्व कमाया.

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एक छोटी सी ट्रेन करोड़ों कमा रही है?
दार्जिलिंग की मशहूर टॉय ट्रेन ने अपने ऐतिहासिक आकर्षण को पर्यटन राजस्व में तब्दील कर दिया है! रेलवे अधिकारी के अनुसार, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल इस रेलवे ने 1 से 21 अक्टूबर के बीच 1.41 करोड़ रुपये कमाए. सिर्फ तीन हफ्तों में लगभग 12,000 यात्रियों ने इस ऐतिहासिक रेलवे की सवारी का आनंद लिया और यह साबित कर दिया कि धीमी गति की यात्राएं भी पर्यटकों को आकर्षित कर सकती हैं.

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इतनी फेमस क्‍यों है ये ट्रेन? 
दार्जिलिंग में छुट्टियां मनाने जाने वाले लोग बिना इस ट्रेन से सफर किए अपनी ट्रिप पूरी नहीं करते हैं. यह ट्रेन सिर्फ 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की तेजी से चलती है, लेकिन इसकी खासियत है कि यह खूबसूरत वादियों से होकर गुजरती है. इसकी धीमी गति के कारण ही यह पर्यटकों के बीच काफी पॉपुलर है, क्‍योंकि यह खूबसूरत पहाड़ियों का आनंद लेने का मौका देती है.

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इस ट्रेन से क्‍या-क्‍या देख सकते हैं? 
इसकी मशहूर टॉय ट्रेन का अनुभव करने के कई तरीके हैं! पर्यटकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे ने दार्जिलिंग और घूम के बीच विशेष टॉय ट्रेन यात्राएं शुरू की हैं. साथ ही कुर्सियोंग और महानदी के बीच दो राउंड-ट्रिप सेवाएं भी उपलब्ध हैं. 

प्राकृतिक नजारे, धुंध से ढकी पहाड़ियां और भाप के इंजन की सीटी इस सफर को खास बनाते हैं. दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल है.

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प्राकृतिक नजारे, धुंध से ढकी पहाड़ियां और भाप के इंजन की सीटी इस सफर को खास बनाते हैं. दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल है.
 

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दूसरी डीजल इंजन वाली भी ट्रेन चलाई गई है 
दार्जिलिंग के अलावा कुर्सियांग और महानदी के बीच भी विशेष जॉय राइड चलाई गईं. इस रूट पर एक सेवा भाप के इंजन से और दूसरी डीजल इंजन से संचालित की गई. इससे यात्रियों को एक ही पहाड़ी क्षेत्र में दो तरह की ऐतिहासिक रेल यात्रा का अनुभव मिला.

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