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धनतेरस-दिवाली से पहले सोना हुआ सस्ता! 18, 22 और 24 कैरेट का ये है रेट

आजतक बिजनेस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:17 PM IST
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धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है. त्योहारों से पहले सोने की कीमतों में गिरावट आई है. भारत में इन दिनों सोने के गहनों की खरीदारी बढ़ जाती है, ऐसे में भाव में आई नरमी से खरीदारों को कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, सोने की कीमतें आगे भी गिरेंगी या फिर दोबारा तेजी आएगी, यह कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगा. कच्चे तेल की कीमतें, मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर मिलने वाले संकेत आगे सोने की चाल तय कर सकते हैं.

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कितने सस्ता हुआ सोना?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 20 अक्टूबर को 24 कैरेट सोना 0.42% यानी ₹618 गिरकर ₹1,47,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. खुदरा मार्केट में दिल्ली में 20 अक्टूबर को 22 कैरेट गोल्ड का भाव ₹13,505 प्रति ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड का भाव ₹11,052 प्रति ग्राम था.

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वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने (Spot Gold) की कीमत 0.3% घटकर 4,128.92 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. दिसंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी सोना वायदा (US Gold Futures) भी 0.3% गिरकर 4,148.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया.

 

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ये बाजार में कारोबार के दौरान दर्ज भाव हैं. गहने खरीदने वाले ग्राहकों के लिए दुकान पर मिलने वाली कीमत इससे अलग हो सकती है. घरेलू बाजार में सोने के भाव पर इम्पोर्ट ड्यूटी, डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट, लोकल डिमांड, टैक्स और जूलरी मेकिंग चार्ज का भी असर पड़ता है.

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सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?

सोने की कीमतों में नरमी की एक अहम वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं. ब्रेंट क्रूड करीब पांच महीने के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब के ऊर्जा, हवाई अड्डे और सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया था. 

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ब्याज दरों का सोने से क्या कनेक्शन है?

सोने को महंगाई और अनिश्चितता के दौर में निवेश का एक विकल्प माना जाता है, लेकिन इससे नियमित ब्याज नहीं मिलता. इसके उलट, सरकारी बॉन्ड जैसे कुछ निवेश विकल्प ब्याज देते हैं. इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए सोने के मुकाबले ब्याज देने वाले विकल्प आकर्षक हो सकते हैं. इससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है.

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निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर भी है. फेड के ब्याज दरों को लेकर रुख से सोने की कीमतों में आगे उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. अगर फेड का रुख उम्मीद से कम सख्त रहता है, तो सोने को सहारा मिल सकता है. वहीं, ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने के संकेत मिलने पर कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
 

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