देश के दो बड़े शहरों के बीच बहुत जल्द वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सर्विस शुरू होने वाली है. एक शहर देश की आर्थिक राजधानी है, तो दूसरा आईटी कैपिटल. जी हां, हम बात कर रहे हैं मुंबई और बेंगलुरु की. मुंबई से बेंगलुरु जाने में अभी रेगुलर ट्रेन से करीब 24 घंटे लग जाते हैं, लेकिन बहुत जल्द यह सफर 8-9 घंटे कम समय में पूरा होगा.
प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से दोनों शहरों के बीच 1153 किलोमीटर की दूरी 15 से 16 घंटे में पूरी होगी. रेलवे से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस ट्रेन की सर्विस 1 नवंबर से शुरू करने की तैयारी है. यह मुंबई से चलने वाली पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी. हालांकि, रूट, किराया और समय-सारिणी की पुष्टि के लिए रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.
मुंबई से बेंगलुरु तक क्या होगा ट्रेन का रूट?
प्रस्तावित योजना के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से चलकर बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (SMVT) पहुंचेगी. इस ट्रेन के गुंटकल रूट से होकर बेंगलुरु पहुंचने की सभावना है. इसके संभावित स्टॉपेज कल्याण, सोलापुर, पुणे, अनंतपुर, गुंटकल, रायचूर, कलबुर्गी और बेंगलुरु हो सकते हैं. फिलहाल यह संभावित रूट है. रेलवे की ओर से अंतिम स्टॉपेज और आधिकारिक रूट की घोषणा होने के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी.
मुंबई से रात में बैठें, अगले दिन बेंगलुरु उतरें
मुंबई-बेंगलुरु वंदे भारत स्लीपर की सर्विस सप्ताह में छह दिन हो सकती है. ट्रेन को इस तरह चलाने की योजना है कि यात्री रात में मुंबई से सफर शुरू करें और अगले दिन दोपहर तक बेंगलुरु पहुंच जाएं. प्रस्तावित समय-सारिणी के अनुसार ट्रेन मुंबई CSMT स्टेशन से रात 8:10 बजे रवाना होगी और अगले दिन 11:55 बजे बेंगलुरु के SMVT स्टेशन पहुंचेगी. वापसी में ट्रेन बेंगलुरु SMVT से रात 7:50 बजे खुलेगी और अगले दिन 11:55 बजे मुंबई CSMT स्टेशन पहुंचेगी.
कितना हो सकता है ट्रेन का किराया?
मुंबई-बेंगलुरु वंदे भारत स्लीपर के लिए अलग-अलग एसी कैटेगरी में अनुमानित किराया सामने आया है. इसके मुताबिक कैटरिंग के साथ एक तरफ का किराया एसी 3-टियर में करीब 2,300 रुपये, एसी 2-टियर में करीब 3,000 रुपये और एसी फर्स्ट क्लास में करीब 3,600 रुपये हो सकता है. ये अनुमानित किराया है और रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही वास्तविक किराये और अन्य शुल्क की जानकारी साफ होगी.
16 कोच की ट्रेन में मिलेंगे 823 बर्थ
प्रस्तावित ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे और इनमें 823 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी. एसी 3-टियर के 11 कोच में कुल सीटें होंगी. एसी 2-टियर के 4 कोच में कुल 188 सीटें होंगी. वहीं एसी फर्स्ट क्लास का 1 कोच होगा, जिसमें 24 सीटें होंगी. इस ट्रेन को ओवरनाइट जर्नी के हिसाब से डिजाइन किया गया है.
ट्रेन के अंदर मिलेंगी लग्जरी सुविधाएं
वंदे भारत स्लीपर के कोच में आरामदायक और गद्देदार सीटें, वुडेन फिनिश वाले पैनल, आई फ्रेंडली एलईडी लाइटिंग और कार्पेट जैसी सुविधाएं होंगी. कोच को इस तरह डिजाइन किया गया है कि लंबी यात्रा के दौरान यात्रियों को बेहतर आराम मिल सके. ऊपर वाले बर्थ पर चढ़ने के लिए नई डिजाइन की सीढ़ियां, मोबाइल और किताबें रखने के लिए जगह, रीडिंग लाइट, यूएसबी चार्जिंग पोर्ट और नाश्ते-खाने के लिए टेबल जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी. फर्स्ट एसी कोच में हॉट शॉवर की सुविधा मिलेगी.
वैक्यूम टॉयलेट और ट्रेन में गर्म खाना
ट्रेन में वैक्यूम टॉयलेट और टच-फ्री सेंसर जैसी सुविधाएं देने की योजना है. इनका मकसद सफाई बेहतर रखना और यात्रियों के लिए इस्तेमाल को आसान बनाना है. खाने की व्यवस्था के लिए ट्रेन में आधुनिक पैंट्री होगी. प्रस्तावित मेन्यू में महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के लोकप्रिय व्यंजन शामिल हो सकते हैं. इनमें मिसल पाव, थालीपीठ, बिसी बेले भात और मैसूर पाक जैसे विकल्प बताए गए हैं. खाने की गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए होटल शेफ, क्लाउड किचन और कैटरिंग पार्टनर के साथ बातचीत की जानकारी भी सामने आई है.
180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
वंदे भारत स्लीपर को अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है. हालांकि, इसे 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलाया जाएगा. ट्रेन की वास्तविक रफ्तार ट्रैक की स्थिति, सुरक्षा मानकों और रेलवे की अनुमति पर निर्भर करेगी. यह ट्रेन स्वदेशी कवच ऑटोमेटिक सेफ्टी सिस्टम से लैस होगी. यह सेफ्टी सिस्टम निर्धारित परिस्थितियों में ट्रेन एक्सीडेंट के खतरे को कम करता है. इसके अलावा ट्रेन में फायर सेफ्टी और इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम भी दिया गया है.
हर कोच में सीसीटीवी कैमरे, आग से सुरक्षा के लिए फायर बैरियर डोर और किसी इमरजेंसी में ट्रेन मैनेजर या लोको पायलट से संपर्क करने की सुविधा होगी. सेमी-परमानेंट कपलर से ट्रेन में झटके न के बराबर लगेंगे और कोच बेहतर तरीके से आपस में जुड़े रहेंगे. ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्टम ऊर्जा बचाने में मदद करेगा. ब्रेक लगने के दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा को दोबारा बिजली के रूप में इस्तेमाल करने की रीजनरेटिव ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी इस ट्रेन में दी गई है.