मिडिल ईस्ट में तनाव: दुबई के रियल एस्टेट के लिए 'खतरा' या निवेश का 'सुनहरा मौका'

दुबई में मिडिल ईस्ट तनाव के बीच प्रॉपर्टी के रेट में थोड़ी गिरावट आई है, लोगों में इस बात को लेकर कन्फ्यूजन है कि क्या इस वक्त दुबई में निवेश करना सही है या अभी इंतजार करना चाहिए.

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दुबई में बसना चाहते हैं दुनिया भर के लोग (Photo-Pexels) दुबई में बसना चाहते हैं दुनिया भर के लोग (Photo-Pexels)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:38 PM IST

पिछले कुछ दशकों में दुबई न केवल एक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है, बल्कि वैश्विक निवेशकों, विशेषकर भारतीयों के लिए निवेश का सबसे पसंदीदा 'हॉटस्पॉट' बन गया है. हालांकि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के बाद निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. क्या इस युद्ध जैसी स्थिति के बीच दुबई में निवेश करना सुरक्षित है? क्या वहां के प्रॉपर्टी के दाम गिर रहे हैं? 

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आजतक रेडियो के शो प्रॉपर्टी से फायदा में इन्वेस्टमेंट बैंकर और रियल एस्टेट एक्सपर्ट जुनैद खान कहते हैं 'जब भी मध्य-पूर्व (Mid-East) में युद्ध की आहट होती है, तो सबसे पहला डर वहां की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को लेकर होता है. हालिया तनाव के दौरान सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए, जिनमें दुबई की गगनचुंबी इमारतों पर हमलों का दावा किया गया.' 

जुनैद खान के अनुसार, इनमें से अधिकांश वीडियो 'AI-जनरेटेड' या फर्जी थे. क्षेत्र में मिसाइलें और ड्रोन फायर किए गए थे, लेकिन यूएई का इंटरसेप्शन सिस्टम इतना आधुनिक और अभेद्य है कि जमीन पर इसका प्रभाव लगभग शून्य रहा. दुबई की सड़कों पर अफरातफरी के बजाय स्थिरता देखी गई. विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग वहां रह रहे हैं, उनके लिए अब ये अलर्ट सुरक्षा का एहसास कराने वाले 'म्यूजिक' की तरह बन गए हैं, क्योंकि उन्हें अपने देश के डिफेंस सिस्टम पर अटूट भरोसा है.

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क्या अभी निवेश करना सही फैसला है?

मौजूदा युद्ध की स्थिति और सीजफायर की संभावनाओं के बीच, क्या यह 'वेट एंड वॉच' की स्थिति है या खरीदारी का सही मौका? जुनैद खान के विश्लेषण के अनुसार, किसी भी बड़े वैश्विक प्रभाव का आकलन करने में समय लगता है, लेकिन फिलहाल प्रॉपर्टी की कीमतों में किसी बड़े क्रैश या मंदी के संकेत नहीं हैं। यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं और 7% से 8% तक की रेंटल यील्ड (किराये से आय) की तलाश में हैं, तो वर्तमान स्थिति निवेश के लिए अनुकूल है। युद्ध की आहट के कारण होने वाली क्षणिक घबराहट अक्सर स्मार्ट निवेशकों को बेहतर डील हासिल करने का मौका देती है।

हैरानी की बात यह है कि इतिहास गवाह रहा है कि जब भी किसी पड़ोसी देश में संघर्ष या युद्ध की स्थिति बनी है, दुबई के प्रॉपर्टी बाजार को फायदा ही हुआ है. चाहे वह रूस-यूक्रेन युद्ध हो, अफगानिस्तान का संकट हो या ईरान के साथ तनाव, इन स्थितियों में युद्धग्रस्त क्षेत्रों के धनी लोग अपनी संपत्ति और परिवार की सुरक्षा के लिए दुबई को ही अपना स्थायी ठिकाना चुनते हैं. यह 'वेल्थ माइग्रेशन' दुबई के रियल एस्टेट में भारी डिमांड पैदा करता है. जब दुनिया के बाकी हिस्सों में अनिश्चितता होती है, तो दुबई एक 'सेफ हेवन' के रूप में उभरता है, जिससे यहां प्रॉपर्टी की कीमतें गिरने के बजाय अक्सर स्थिर रहती हैं या उनमें उछाल आता है.

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भारतीय निवेशकों का दुबई के प्रति बढ़ता आकर्षण

भारतीयों के लिए दुबई सिर्फ एक निवेश स्थल नहीं, बल्कि एक 'सेकंड होम' बन चुका है. जुनैद खान ने इसके पीछे चार प्रमुख कारण बताए हैं. सबसे पहला है 'लाइफस्टाइल अपग्रेड'. भारत के मेट्रो शहरों के मुकाबले दुबई में मिलने वाला ग्लोबल एक्सपोजर और वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर कहीं अधिक उन्नत है. दूसरा बड़ा कारण है 'भौगोलिक निकटता'. भारत से दुबई की उड़ान महज तीन घंटे की है, जो इसे किसी घरेलू शहर जितना सुलभ बनाती है. इसके अलावा, वहां की मजबूत भारतीय कम्युनिटी एक ऐसा माहौल प्रदान करती है जहां खान-पान, त्योहार और संस्कृति बिल्कुल घर जैसी लगती है. टैक्स-फ्री रेंटल इनकम और कैपिटल एप्रिसिएशन निवेशकों के लिए इसे सोने पर सुहागा बना देता है.

भारत बनाम दुबई

अक्सर लोग सोचते हैं कि दुबई में घर खरीदना बहुत महंगा सौदा होगा, लेकिन असलियत इससे काफी अलग है. आज यदि आप मुंबई, दिल्ली-एनसीआर या बेंगलुरु की प्रीमियम और लग्जरी कम्युनिटीज में प्रॉपर्टी के दाम देखें, तो वे दुबई की समान प्रॉपर्टीज के बराबर या कभी-कभी उनसे भी ज्यादा हो चुके हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि समान बजट में दुबई में आपको अधिक सुविधाएं, बेहतर निर्माण गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर का जीवन स्तर मिलता है. यही कारण है कि  बेहतर रिटर्न की तलाश में भारतीय निवेशक तेजी से वहां का रुख कर रहे हैं.

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दुबई मार्केट में निवेश करते समय केवल ग्लैमर को न देखें. जुनैद खान सलाह देते हैं कि निवेशकों को उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो रेंटल मार्केट के लिहाज से मजबूत हैं. हालांकि भू-राजनीतिक तनाव एक वास्तविकता है, लेकिन दुबई की इकॉनमी और सरकार की नीतियां इतनी लचीली हैं कि वे ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटना जानते हैं. अगर आप टैक्स बेनेफिट्स, सेफ्टी और लाइफस्टाइल का एक कॉम्बो तलाश रहे हैं, तो दुबई आज भी दुनिया के शीर्ष विकल्पों में बना हुआ है. किसी भी अफवाह पर ध्यान देने के बजाय जमीनी हकीकत और आंकड़ों को समझकर लिया गया फैसला ही फायदेमंद साबित होगा.

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