एनबीसीसी ने नोएडा में ई-ऑक्शन के जरिए 111 रेजिडेंशियल यूनिट्स बेचकर 416.53 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की है. कंपनी ने मंगलवार को रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी. ये सभी यूनिट्स नोएडा के एस्पायर सिलिकॉन सिटी प्रोजेक्ट में हैं.
एनबीसीसी के मुताबिक, कंपनी ने नोएडा स्थित एस्पायर सिलिकॉन सिटी में 111 रेजिडेंशियल यूनिट्स को ई-ऑक्शन के माध्यम से बेचा है. इन यूनिट्स की कुल बिक्री कीमत करीब 416.53 करोड़ रुपये रही. इस हिसाब से देखें तो 111 यूनिट्स की औसत बिक्री कीमत करीब 3.75 करोड़ रुपये प्रति यूनिट बैठती है. हालांकि, अलग-अलग घरों का आकार, फ्लोर और अन्य विशेषताओं के आधार पर उनकी कीमत अलग हो सकती है.
एनबीसीसी को इस बिक्री से 1 प्रतिशत मार्केटिंग फीस भी मिलेगी. यानी 416.53 करोड़ रुपये की बिक्री पर कंपनी को करीब 4.17 करोड़ रुपये की मार्केटिंग फीस प्राप्त हो सकती है.
क्या है एस्पायर सिलिकॉन सिटी?
एस्पायर सिलिकॉन सिटी उन परियोजनाओं में शामिल है, जिनका संबंध आम्रपाली के रुके हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की प्रक्रिया से है, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आम्रपाली के अधूरे और लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए एनबीसीसी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी. इसी प्रक्रिया के तहत आम्रपाली स्टॉल्ड प्रोजेक्ट्स इन्वेस्टमेंट्स रिकंस्ट्रक्शन एस्टेब्लिशमेंट (ASPIRE) का गठन किया गया.
इसका मकसद अटके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करना और लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे खरीदारों को फ्लैट सौंपना है.
38 हजार फ्लैट्स पूरे करने की जिम्मेदारी
आम्रपाली के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी मिलने के बाद एनबीसीसी को करीब 38,000 फ्लैट्स पूरे करने और उन्हें घर खरीदारों को सौंपने का काम दिया गया था. आम्रपाली के प्रोजेक्ट्स लंबे समय तक अधूरे रहने के कारण हजारों होमबायर्स परेशान रहे हैं. ऐसे में एनबीसीसी की भूमिका सिर्फ निर्माण पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन प्रोजेक्ट्स को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाकर घर खरीदारों को उनके घर सौंपना भी इसका अहम हिस्सा है.
ग्रेटर नोएडा में भी चल रहा बड़ा निर्माण कार्य
एनबीसीसी सिर्फ रुके हुए फ्लैट्स को पूरा करने पर ही काम नहीं कर रही है. कंपनी ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली के पांच चल रहे प्रोजेक्ट्स में 10,000 से ज्यादा अपार्टमेंट्स का निर्माण भी कर रही है. यह निर्माण स्थानीय प्राधिकरण से खाली पड़ी जमीन पर विकास की मंजूरी मिलने के बाद शुरू किया गया है.
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