आर्थिक तरक्की में भारत के 55 शहर टॉप-100 में, लेकिन हवा ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट से साफ है कि भारत के सामने अब बड़ी चुनौती सिर्फ शहरों की अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाना नहीं है, बल्कि इस आर्थिक विकास का फायदा लोगों के जीवन स्तर में सुधार और अधिक समान विकास के रूप में पहुंचाना भी है.

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भारतीय शहरों की दुनिया में धाक (Photo-ITG) भारतीय शहरों की दुनिया में धाक (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:23 AM IST

भारतीय शहर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती शहरी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो रहे हैं. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के 2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स के मुताबिक, भारत के 55 शहर दुनिया के 100 सबसे तेजी से बढ़ने वाले शहरों में शामिल हैं.

2026 ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में न्यूयॉर्क पहले स्थान पर रहा, इसके बाद लंदन, पेरिस, सिएटल, सैन फ्रांसिस्को, डबलिन, बोस्टन, सैन जोस और टोक्यो का स्थान रहा. भारत के 23 शहर दुनिया के टॉप 50 शहरों में शामिल हुए हैं. यह बताता है कि देश के अलग-अलग शहरों की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है. इस विकास के पीछे शहरों की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ता रोजगार, कंपनियों का विस्तार और विश्वविद्यालयों का बढ़ता नेटवर्क अहम भूमिका निभा रहा है. हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरण और आय में असमानता जैसी समस्याएं भारतीय शहरों की रैंकिंग को नीचे खींच रही हैं.

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ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की सीनियर इकोनॉमिस्ट एलिजाबेथ मार्टिंडेल ने कहा कि इस साल के इंडेक्स में शहरी विकास के मामले में भारत जितना व्यापक प्रदर्शन किसी दूसरे देश ने नहीं किया, उनके मुताबिक, यह विकास सिर्फ भारत के बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में भी विकास की अच्छी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं.

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दिल्ली भारत में सबसे ऊपर, दुनिया में 268वें स्थान पर

दिल्ली भारत में सबसे ऊंची रैंकिंग वाला शहर रहा, उसे दुनिया में 268वां स्थान मिला है, जो पिछले साल की तुलना में पांच पायदान ऊपर है. दिल्ली का सबसे अच्छा प्रदर्शन मानव पूंजी यानी प्रतिभाशाली और कुशल लोगों के मामले में रहा. इस श्रेणी में दिल्ली दुनिया में 13वें स्थान पर रही. इस मामले में उसने टोरंटो, सियोल और बीजिंग जैसे शहरों को पीछे छोड़ा.

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दिल्ली फिलहाल दुनिया की 63वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था है. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि 2050 तक दिल्ली दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था बन सकती है. उस समय इसकी आर्थिक उत्पादन क्षमता 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो सकती है.

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के सिटीज एंड रीजन यूनिट के डायरेक्टर और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक लियाम साइड्स ने कहा कि दिल्ली में बड़े वैश्विक शहर के लिए जरूरी प्रतिभा और बड़ी कंपनियों का मजबूत आधार मौजूद है. हालांकि, खराब हवा और आय में असमानता अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं.

बेंगलुरु तेजी से बढ़ते शहरों में शामिल

बेंगलुरु को ‘सिटी टू वॉच’ यानी ऐसे शहर के रूप में चुना गया है, जिस पर नजर रखने की जरूरत है. इसकी वैश्विक रैंकिंग 20 स्थान सुधरकर 311 हो गई है. भारत के छह सबसे बड़े महानगरों में बेंगलुरु ने सबसे ज्यादा सुधार किया है. यह टेक्नोलॉजी हब दुनिया में अनुमानित जीडीपी वृद्धि के मामले में टॉप 10 तेजी से बढ़ते शहरों में भी शामिल है. 2026 से 2030 के बीच यहां वास्तविक आर्थिक उत्पादन में हर साल औसतन 9.2 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है.

मार्टिंडेल के मुताबिक, बेंगलुरु में सैकड़ों कॉलेजों से निकलने वाले युवा और कुशल स्नातक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करते रहेंगे, उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के बड़े टेक्नोलॉजी रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर के रूप में उभरने से वेतन बढ़ सकता है, लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सकता है और लंबे समय तक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है.

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कॉरपोरेट मुख्यालय के मामले में मुंबई भारत में सबसे आगे

मुंबई की वैश्विक रैंकिंग 330 रही, कॉरपोरेट मुख्यालयों के मामले में मुंबई भारत का सबसे मजबूत शहर रहा और इस श्रेणी में दुनिया में 23वें स्थान पर रहा. मुंबई की अर्थव्यवस्था फिलहाल दुनिया की 99वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था है. अनुमान है कि 2050 तक यह 36वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था बन सकती है.

भारत के दूसरे बड़े शहरों ने भी इंडेक्स में अच्छी जगह बनाई है. चेन्नई 381वें, हैदराबाद 421वें और पुणे 427वें स्थान पर रहे. अनुमानित जीडीपी वृद्धि के मामले में चेन्नई दुनिया में 16वें और हैदराबाद 15वें स्थान पर रहे.

छोटे भारतीय शहर भी तेजी से बढ़ रहे

भारत की आर्थिक वृद्धि सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, छोटे शहर भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. अमरावती दुनिया में विकास के मामले में सातवें स्थान पर रहा. सूरत 11वें और तिरुचिरापल्ली 13वें स्थान पर रहे. कई अन्य भारतीय शहरों की रैंकिंग में भी बड़ा सुधार हुआ है. रांची 74 स्थान, प्रयागराज 70 स्थान, लखनऊ 58 स्थान और विशाखापत्तनम 54 स्थान ऊपर आए हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का शहरी विकास अब सिर्फ पुराने और बड़े आर्थिक केंद्रों तक सीमित नहीं है. देश के छोटे और उभरते शहर भी तेजी से विकास कर रहे हैं.

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जीवन की गुणवत्ता अब भी बड़ी चुनौती

तेजी से आर्थिक विकास के बावजूद भारतीय शहरों में कई बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुसार, जीवन की गुणवत्ता भारतीय शहरों का सबसे कमजोर क्षेत्र रहा. इंडेक्स में शामिल 1,000 शहरों में भारतीय शहरों की औसत रैंक 850 रही. दिल्ली की हवा की गुणवत्ता भी बड़ी चिंता का विषय है. इंडेक्स में दिल्ली का एयर क्वालिटी स्कोर दूसरे सबसे खराब स्तर पर रहा. मार्टिंडेल के मुताबिक, खराब हवा, आय में असमानता और शिक्षा का स्तर वे प्रमुख क्षेत्र हैं, जहां भारतीय शहर एशिया के दूसरे शहरों से पीछे हैं.

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