अपना घर खरीदना सिर्फ रहने की जगह चुनना नहीं है, बल्कि यह लंबे समय तक आपकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करने वाला फैसला है. यही वजह है कि नौकरी शुरू होते ही या शादी के बाद तुरंत मकान खरीद लेना हमेशा समझदारी नहीं माना जा सकता. दूसरी ओर, बहुत ज्यादा इंतजार करने से भी प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमत और होम लोन की अवधि जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं.
असल सवाल यह नहीं है कि घर 30 साल की उम्र में खरीदना चाहिए या 40 में, सही सवाल यह है कि किस उम्र में आपकी आय, बचत, करियर और भविष्य की जरूरतें घर खरीदने के लिए तैयार होती हैं.
20 से 30 साल: घर से ज्यादा वित्तीय नींव मजबूत करने का समय
करियर के शुरुआती वर्षों में आमतौर पर आय बढ़ने की गुंजाइश ज्यादा होती है, लेकिन बचत और नौकरी की स्थिरता उतनी मजबूत नहीं होती. इसी दौर में कई लोगों पर शिक्षा ऋण, परिवार की जिम्मेदारियां या करियर बदलने जैसी परिस्थितियां भी हो सकती हैं.
इस उम्र में घर खरीदने का फायदा यह है कि लंबी अवधि का होम लोन लिया जा सकता है और ईएमआई को ज्यादा वर्षों में बांटा जा सकता है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. अगर शुरुआती करियर में बड़ी रकम घर की डाउन पेमेंट में चली गई, तो दूसरे निवेशों के लिए पैसा कम बच सकता है.
इसलिए 20 से 30 की उम्र में घर खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपके पास डाउन पेमेंट के अलावा आपातकालीन बचत और दूसरे वित्तीय लक्ष्यों के लिए पर्याप्त पैसा बच रहा है या नहीं.
30 से 40 साल: कई लोगों के लिए ज्यादा संतुलित पड़ाव
30 की उम्र के आसपास आमतौर पर करियर की दिशा स्पष्ट होने लगती है. आय में पहले की तुलना में स्थिरता आ सकती है और परिवार, बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जरूरतों का अंदाजा भी बेहतर तरीके से लगाया जा सकता है. यही वह चरण है जब घर खरीदने का फैसला कई लोगों के लिए व्यावहारिक बनता है, लेकिन केवल बढ़ी हुई आय देखकर महंगा घर खरीदना सही रणनीति नहीं है.
मसलन, अगर किसी व्यक्ति की मासिक आय अच्छी है, लेकिन घर की ईएमआई के बाद निवेश, बच्चों की पढ़ाई, बीमा और रोजमर्रा के खर्चों के लिए बहुत कम पैसा बचता है, तो महंगी प्रॉपर्टी खरीदना भविष्य में दबाव बढ़ा सकता है. इसलिए इस उम्र में घर की कीमत से ज्यादा अपनी भुगतान क्षमता पर ध्यान देना चाहिए.
40 के बाद: देर नहीं, लेकिन गणित और सख्त होना चाहिए
40 या उसके बाद घर खरीदने का फैसला भी बिल्कुल संभव है. इस उम्र में कई लोगों की आय और बचत बेहतर स्थिति में होती है. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाता है कि लंबे समय में किस शहर में रहना है और परिवार के लिए किस तरह की संपत्ति चाहिए. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है होम लोन की अवधि कम हो सकती है. कम अवधि का मतलब अक्सर ज्यादा मासिक ईएमआई होता है. इसलिए 40 के बाद घर खरीदने वाले व्यक्ति को रिटायरमेंट के लिए अलग से पर्याप्त रकम बचाने के साथ-साथ ऋण का बोझ भी नियंत्रित रखना चाहिए.
इस उम्र में बड़ा घर खरीदने की बजाय ऐसा घर चुनना ज्यादा उपयोगी हो सकता है जिसकी लागत आपकी दीर्घकालिक वित्तीय योजना को नुकसान न पहुंचाए.
किराया दे रहे हैं तो क्या खरीदना जरूरी है?
यह मान लेना सही नहीं है कि किराए पर रहना हमेशा पैसे की बर्बादी है. अगर नौकरी बदलने, शहर बदलने या करियर को लेकर अनिश्चितता है, तो किराए का घर आपको ज्यादा लचीलापन दे सकता है. इसके अलावा, घर खरीदने में केवल डाउन पेमेंट और ईएमआई ही खर्च नहीं होते. रजिस्ट्री, कर, रखरखाव, मरम्मत और अन्य शुल्क भी कुल लागत में जुड़ते हैं.
दूसरी तरफ, अगर आप किसी शहर में लंबे समय तक रहने वाले हैं और आपकी आय , बचत ऐसी है कि घर की ईएमआई आराम से संभाली जा सकती है, तो खुद का घर स्थिरता दे सकता है. इसलिए किराया बनाम ईएमआई का फैसला केवल मासिक भुगतान की तुलना करके नहीं करना चाहिए.
पहले तय करें आप घर खरीद रहे हैं या निवेश?
अगर घर खुद रहने के लिए खरीदा जा रहा है, तो लोकेशन, आवागमन, स्कूल, अस्पताल और परिवार की जरूरतें प्रमुख होनी चाहिए, लेकिन अगर उद्देश्य केवल निवेश है, तो किराया आय, संभावित मूल्य वृद्धि, रखरखाव और संपत्ति को बेचने में लगने वाले समय जैसे पहलुओं की भी जांच करनी होगी. रियल एस्टेट की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसे जरूरत पड़ने पर तुरंत नकद में बदलना आसान नहीं होता. इसलिए अपनी पूरी बचत एक ही प्रॉपर्टी में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है.
होम लोन लेने से पहले यह हिसाब जरूर करें
घर खरीदने का फैसला लेने से पहले अपनी मासिक आय और खर्चों का वास्तविक हिसाब बनाएं. इसके बाद देखें कि डाउन पेमेंट देने के बाद आपके पास कितनी बचत बचेगी, एक सुरक्षित योजना में इन चीजों के लिए अलग रकम होनी चाहिए.
ईएमआई ऐसी नहीं होनी चाहिए कि हर महीने की आय का बड़ा हिस्सा केवल कर्ज चुकाने में चला जाए. विशेषज्ञों की एक सामान्य सलाह यह रही है कि आवास ऋण की मासिक किस्त आपकी हाथ में आने वाली आय पर अत्यधिक दबाव न डाले.
तो आखिर किस उम्र में खरीदें घर?
इसका कोई एक जवाब नहीं है. किसी के लिए 28 की उम्र सही हो सकती है, तो किसी के लिए 38 या 42 की उम्र. सही समय वह है जब आपकी आय स्थिर हो, डाउन पेमेंट के बाद भी पर्याप्त बचत बची रहे, करियर और शहर को लेकर तस्वीर काफी स्पष्ट हो और ईएमआई आपकी बाकी वित्तीय योजनाओं को न बिगाड़े.
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