शेयर बाजार में तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है. सप्ताह के पहले दिन मार्केट ओपन होने के साथ ही आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों को तगड़ा नुकसान करा दिया. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मिनटों में ही शेयर मार्केट में पैसे लगाने वालों के 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो गए. बड़ी-बड़ी कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे हुए नजर आए और इनमें HDFC Bank, Bajaj Finance, Reliance, ICICI Bank जैसे नाम शामिल हैं. बाजार में इस भूचाल का एक बड़ा कारण सामने है.
मिनटों में स्वाहा हो गए 6 लाख करोड़
शेयर बाजार में मची तबाही पर नजर डालें, तो बीएसई का सेंसेक्स खुलने के मिनटों बाद ही करीब 1040 अंक से ज्यादा फिसल गया और 72,854 के लेवल पर कारोबार करने लगा. तो वहीं खबर लिखे जाने तक एनएसई का निफ्टी 330 अंक से ज्यादा या 1.38 फीसदी की गिरावट लेकर 22,807 तक लुढ़क गया.
शेयर मार्केट में पैसे लगाने वालों को बाजार में कारोबार के शुरुआती कुछ मिनटों में हुए बड़े नुकसान पर गौर करें, तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन (BSE MCap) गिरकर 4,75,64,385 करोड़ रुपये पर आ गया. जबकि बीते शुक्रवार को ये 4,83,25,067 करोड़ रिकॉर्ड किया गया था. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो बाजार की ओपनिंग के बाद कुछ ही देर में शेयर बाजार निवेशकों के 7,60,682 करोड़ रुपये डूब गए.
क्रूड से लगी आग से मची तबाही
सबसे पहले Share Market Crash के पीछे के कारणों पर नजर डाल लेते हैं, जिनकी वजह से निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूब गई. तो पहली बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में फिर से लगी आग है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 3 फीसदी की तेजी के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. तो वहीं WTI Crude 95 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है.
Crude Oil Price Surge ने एक बार फिर से शेयर बाजार निवेशकों को सतर्क मोड में ला दिया है, क्योंकि भारत तेल आयात पर निर्भर है. इसकी कीमत में इजाफा होने से आयात बिल में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ता है और ये सीधे के बाद रोजमर्रा के सामानों पर महंगाई की चोट करने वाला साबित हो सकता है.
ट्रंप ने अब ऐसा क्या कर दिया?
कच्चे तेल की कीमतों में ये तेजी ऐसे ही नहीं आई है, बल्कि इसका सीधा कनेक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ा हुआ है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बात बनती हुई नजर नहीं आ रही है. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को एक बार फिर से खारिज कर दिया है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और वेस्ट एशिया में लड़ाई समाप्त होने की उम्मीद पर पानी फिर गया है. इसके बाद अचानक तेल की कीमतों में उबाल देखने को मिला है.
ये वजह भी बाजार में रहीं खास
जहां शेयर मार्केट क्रैश के पीछे अहम रोल कच्चे तेल की कीमतों में का रहा. तो वहीं अन्य कारणों की बात करें, तो..
India VIX: शेयर बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला अस्थिरता सूचकांक यानी इंडिया वीआईएक्स सोमवार को अचानक 14.50 फीसदी उछलकर 14.14 पर जा पहुंचा, जो आने वाले दिनों में बाजार में तगड़े उतार-चढ़ाव की ओर इशारा करता है.
Indian Rupee: तीसरा कारण भारतीय करेंसी में आई तेज गिरावट को माना जा सकता है. दरअसल, सोमवार को करेंसी मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 20 पैसे गिर गया और 95.95 पर आ गया.
FII Outflow: बाजार का सेंटीमेंट खराब करने में विदेशी निवेशकों का भी हाथ रहा, जिनका मूड एक बार फिर से खराब नजर आ रहा है. बीते शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय बाजार से करीब 3700 करोड़ रुपये निकाले थे और इससे बाजार पर दबाव बढ़ा है.
Asia Market Fall: शेयर मार्केट टूटने का पांचवां बड़ा कारण विदेशों से मिले रेड सिग्नल रहे. दरअसल, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते दुनिया सहमी है. एशियाई बाजारों में भी भूचाल आया है. शुरुआती कारोबार में साउथ कोरिया का KOSPI करीब 2 फीसदी फिसला, तो जापान का Nikkei भी रेड जोन में कारोबार करता दिखा. Gift Nifty की बात करें, तो सेंसेक्स-निफ्टी के लिए प्रमुख संकेतक ये इंडेक्स 350 अंक की भारी गिरावट में था.
(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क