भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को सपोर्ट देकर मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए हैं, अब उनका असर भी देखने को मिलने लगा है. आरबीआई ने स्पॉट मार्केट में डॉलर की डिमांड को कम करने के लिए और करेंसी में सट्टेबाजी ट्रेड पर लगाम लगाने के लिए 12 अक्टूबर से पाबंदियों को प्रभावी किया है और इनके लागू होते ही भारतीय करेंसी रुपया (Indian Rupee) में डॉलर की तुलना में तगड़ा उछाल आया है. सोमवार को करेंसी मार्केट ओपन होते ही रुपया 1 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया.
डॉलर के मुकाबले Rupee में जोरदार उछाल
केंद्रीय बैंक द्वारा हाजिर और एडवांस डॉलर की मांग को कंट्रोल करने के इन नीतिगत उपायों को लागू किए जाने के बाद सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.74 पर पहुंच गया, जो शुक्रवार के 96.73 के बंद भाव से 1% अधिक है. इसके अलावा Indian Rupee दूसरी एशियाई करेंसियों में भी शानदार परफॉर्मेंस करता हुआ नजर आ रहा है.
इस साल जमकर टूटा, अब तगड़ा कमबैक
RBI के उठाए कदमों के बाद रुपया में यह सुधार तब आया है, जब भारतीय करेंसी कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक 7 फीसदी से ज्यादा और फाइनेंशिय ईयर 2027 में अब तक लगभग 3.5 फीसदी से अधिक कमजोर हो चुकी है. इस साल कारोबार के दौरान रुपये बीते मई महीने में 96.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था. रुपये पर लगातार दबाव कच्चे तेल की तेज रफ्तार से बढ़ती कीमतों, मजबूत होते डॉलर और लगातार विदेशी पूंजी की निकासी के चलते देखने को मिला.
एक्सपर्ट जता रहे हैं ये अनुमान
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिटी के अर्थशास्त्रियों की मानें, तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के हालिया उपायों से रुपये के स्थिर होने से पहले उसमें अचानक तेजी आ सकती है. उन्होंने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, 'RBI का उपायों वाला पैकेज रुपये के अवमूल्यन से संबंधित अल्पकालिक लेन-देन की लागत को बढ़ाता है, यह भुगतान संतुलन पर पहले से मौजूद दबावों को दूर नहीं करता है.'
RBI ने उठाए हैं ये बड़े कदम
RBI के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) को बेचे जाएंगे. यह सोमवार, 12 अक्टूबर, 2026 से आदेश प्रभावी हो गया और अगले आदेश तक लागू रहेगा.
इस व्यवस्था के तहत RBI नामित बैंकों के माध्यम से तीन पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियों को अमेरिकी डॉलर बेचेगा. इस सुविधा का उद्देश्य यह तय करना है कि कंपनियां अपने ऑपरेशन के लिए अपनी हर दिन की विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं को पूरा कर सकें.
पहला उपाय: तेल कंपनियों के लिए स्पेशल डॉलर विंडो
RBI ने मौजूदा बाजार स्थितियों के आकलन करके विशेष व्यवस्था के तहत तीनों तेल कंपनियों को बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से डॉलर प्राप्त करने के लिए एक चैनल उपलब्ध कराया है. बता दें तेल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को कच्चे तेल के आयात और अन्य विदेशी खर्चों के भुगतान के लिए डॉलर की आवश्यकता होती है.
दूसरा उपाय: विदेशी करेंसी डेरिवेटिव के लिए लोअर लिमिट
केंद्रीय बैंक ने कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन करने की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया है. संशोधित सीमा रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर भी लागू है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़े डेरिवेटिव पोजीशन, जैसे आयात भुगतान या निर्यात सपोर्टिव हों, न कि मुख्य रूप से सट्टेबाजी के उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाएं.
तीसरा उपाय: 20% विदेशी करेंसी रिजर्व रिस्क
आरबीआई का अगला उपाय 20 लाख डॉलर से अधिक के सांकेतिक मूल्य वाले पात्र रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के लिए विदेशी मुद्रा रिस्क रिजर्व (FERR) की आवश्यकता अनिवार्य की है. रजिस्टर्ड डीलरों को हर पात्र लेनदेन के रुपये मूल्य के 20% के बराबर कैश रिजर्व अमाउंट आरबीआई के पास रखना होगा. यह आवश्यकता उन कॉन्ट्रैक्ट पर लागू होती है, जिनका उपयोग चालू खाता जोखिमों को हेज करने के लिए किया जाता है, जहां यूजर्स रुपये के मुकाबले विदेशी मुद्रा खरीदता है.
चौथा उपाय: हेजिंग के लिए सख्त डॉक्यूमेंटेशन
रजिस्टर्ड डीलरों को फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में एंट्री करने वाले यूजर्स से एक वचन पत्र प्राप्त करना और उसे अपने पास रखना होगा, जिसमें यह पुष्टि की गई हो कि उसी रिस्क को किसी अन्य डीलर के माध्यम से हेज नहीं किया गया है. इस आवश्यकता का उद्देश्य एक ही तरह के जोखिम की दोहरी हेजिंग को रोकना और बाजार में सुधार करना है.
इधर RBI एक्शन, उधर रुपये की उड़ान
इन उपायों से डॉलर की सट्टेबाजी डिमांड मांग कम हो सकती है और शॉर्ट टर्म अस्थिरता में राहत मिल सकती है. ये उपाय ऐसे समय में आए हैं जब केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और ब्याज दरों में वृद्धि के बावजूद बीते शुक्रवार को रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बना हुआ है. शुक्रवार को रुपया 96.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो मई के लाइफ टाइम लो-लेवल 96.96 रुपये के करीब था. केंद्रीय बैंकों के उपाय लागू होने से रुपये ने तेजी से कमबैक किया है.
आजतक बिजनेस डेस्क