US ने कर दिया ये काम, तो आएगा बड़ा खतरा, भारत पर भी गंभीर संकट!

गोल्‍डमैन सैक्‍स ने चार सेक्‍टर पर स्‍टडी किया है, जिसमें कहा गया है कि अगर एक फीसदी ब्‍याज दर बढ़ाया जाता है तो विकसित बाजारों की जीडीपी में 0.6 फीसदी की कमी आ सकती है.

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अमेरिका और भारत पर पड़ सकता है गंभीर असर. (Photo: AI Generated) अमेरिका और भारत पर पड़ सकता है गंभीर असर. (Photo: AI Generated)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:59 PM IST

गोल्‍डमैन सैक्‍स ने बड़े खतरे को लेकर चिंता जताई है. ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टमेंट रिसर्च के अनुसार, ब्‍याज दरों में 100 बेसिस पॉइंट या 1 फीसदी की बढ़ोतरी होती है तो अगले साल विकसित बाजारों में GDP में 0.6 प्रतिशत की कमी आ सकती है क्‍योंकि हाई कॉस्‍ट हाउस इन्फ्लेशन, घरेलू खर्च, व्‍यावसायिक निवेश और सरकारी फाइनेंस पर दबाव बढ़ेगा.  

गोल्‍डमैन सैक्‍स के इकोनॉमिस्‍ट जोसेफ ब्रिग्‍स और जोहान एलन की ओर से किए गए रिसर्च में उच्‍च ब्‍याज दरों के प्रभाव का चार सेक्‍टर पर स्‍टडी किया गया है. इसमें आवास, कंज्‍यूमर खर्च और लोन, कॉर्पोरेट निवेश और सरकारी लोन और घाटा शामिल है. 

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भारत को लेकर भी इसपर स्‍टडी की गई है और कहा गया है कि भारत पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. क्‍योंकि कमजोर आर्थिक गतिविधि से इंजीनियरिंग उत्पादों, मशीनरी और ऑटो सेक्‍टर समेत भारतीय मैन्‍युफैक्‍चरिग वस्‍तुओं की मांग प्रभावित हो सकती है. हालांकि, गोल्‍डमैन सैक्‍स के अनुमान डेवलप इकोनॉमी पर बेस्‍ड हैं और भारत के निर्यात पर पड़ने वाले प्रभाव का डायरेक्‍ट तौर से आकलन नहीं करते हैं. 

व्यावसायिक निवेश पर दबाव बना हुआ है
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि ब्याज दरों में 100 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से विकसित बाजारों में व्यावसायिक निवेश में औसतन 1.8 प्रतिशत की कमी आ सकती है. नीदरलैंड, स्वीडन और जर्मनी में इसका प्रभाव ज्‍यादा हो सकता है, जहां निवेश 3.5 प्रतिशत, 3.1 प्रतिशत और 2.1 प्रतिशत तक घट सकता है. 

ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियां कारखानों के विस्तार, उपकरणों की खरीद और अन्य कैपिटल एक्‍सपेंडेचर में देरी कर सकती हैं. अगर यूरोपीय कंपनियां निवेश कम करती हैं, तो इन बाजारों में सर्विस देने वाले भारतीय सप्‍लॉयर को ऑर्डर बढ़ोतरी में कमी और राजस्व पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है. 

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यह रिस्‍क भारत के इंजीनियरिंग सामान सेक्‍टर के लिए प्रासंगिक है, जिसने मजबूत निर्यात बढ़ोतरी बनाए रखी है. उद्योग निकाय EEPC इंडिया की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाह में इंजीनियरिंग निर्यात में पिछले साल की तुलना में 18.21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 46.38 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 39.24 अरब डॉलर था. 

रियल एस्‍टेट भी हो सकता है कमजोर 
गोल्‍डमैन सैक्‍स का कहना है कि ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी से होम लोन की चुकौती और कंज्‍यूमर लोन की लागत बढ़ सकती है, जिससे परिवारों के पास विवेकाधीन खर्चों के लिए कम पैसा बचेगा. गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि ब्याज दरों में 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी से विकसित बाजारों में कंज्‍यूमर खर्च में औसतन 0.2 प्रतिशत की कमी आ सकती है. ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन और कनाडा उन इकोनॉमी में शामिल हैं, जिन पर इस माध्यम से अधिक प्रभाव पड़ेगा. 

रियल एस्‍टेट निवेश भी एक जोखिम भरा क्षेत्र है. रिपोर्ट का अनुमान है कि बॉन्ड यील्ड में 100 बेसिस पॉइंट की वृद्धि से अगले एक से दो वर्षों में अमेरिकी आवास निवेश में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आ सकती है. 

सरकारी कर्ज से बढ़ सकता है दबाव 
मौजूदा लोन की मौच्‍योरिटी और उच्‍च ब्‍याज दरों पर रिफंडिंग के दौरान सरकारों को ब्‍याज लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है. इसका प्रभाव पब्लिक लोन की मैच्‍योरिटी स्‍ट्रक्‍चर और हाई ब्‍याज दर के कारण उधार लागत में होने वाली बढ़ोतरी पर भी निर्भर करेगा. 

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गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इन चारों फैक्‍टर्स के संयुक्त प्रभाव से अगले वर्ष विकसित बाजारों के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 0.6 प्रतिशत की कमी आ सकती है. भारत के लिए खास सवाल यह है कि क्‍या प्रमुख निर्यात बाजारों में कमजोर निवेश और कंज्‍यूमर डिमांड के कारण निर्यात बढ़ोतरी धीमी होगी और विदेशों में महत्‍वपूर्ण कारोबार करने वाली कंपनियों की आय पर दबाव पड़ेगा. ये अनुमान 100 आधार अंकों की ब्‍याज दर बढ़ोतरी पर बेस्‍ड एक काल्‍पनिक नजरिया हैं, न कि यह पूर्वानुमान कि ब्‍याज दरें अनिवार्य तौर से इतनी ही बढ़ेंगी. 

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