50 हजार में परीक्षा पास, पटना में फिजिकल टेस्ट के दौरान पकड़े गए 4 'मुन्ना भाई'

पटना के गर्दनीबाग में सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है. फिंगरप्रिंट और फेस स्कैन में गड़बड़ी पकड़े जाने पर चार अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया. आरोप है कि इन्होंने लिखित परीक्षा में अपने स्थान पर किसी और को बैठाकर 50 हजार रुपये में परीक्षा दिलवाई थी. अब तक ऐसे तीन दर्जन से अधिक ‘मुन्ना भाई’ पकड़े जा चुके हैं.

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पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार (Photo: Screengrab) पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार (Photo: Screengrab)

राजेश कुमार झा

  • पटना,
  • 21 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:44 PM IST

बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली का एक और मामला सामने आया है. पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान चार अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया है. इन पर आरोप है कि इन्होंने लिखित परीक्षा में अपने स्थान पर दूसरे व्यक्ति को बैठाकर परीक्षा दिलवाई थी.

पुलिस के अनुसार, केंद्रीय चयन पर्षद द्वारा आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा में शामिल ये चारों अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा देने पहुंचे थे. परीक्षा के दौरान जब फिंगरप्रिंट और फेस स्कैन से पहचान की गई तो उनकी बायोमेट्रिक जानकारी लिखित परीक्षा से मेल नहीं खाई. इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की.

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50-50 हजार रुपये में हुआ था सौदा

गर्दनीबाग थाना के एसएचओ प्रमोद कुमार ने बताया कि गिरफ्तार सभी चार अभ्यर्थी मूल उम्मीदवार हैं, लेकिन इन्होंने लिखित परीक्षा में अपने बदले किसी और को बैठाया था. पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रत्येक उम्मीदवार ने अपने स्थान पर परीक्षा देने वाले आलोक कुमार (निवासी अरवल) को 50 हजार रुपये दिए थे.

गिरफ्तार अभ्यर्थियों में राजेश कुमार (सारण), रणवीर कुमार (लखीसराय) और संजीत कुमार शामिल हैं. चौथे आरोपी का नाम पुलिस द्वारा सत्यापन के बाद स्पष्ट किया जाएगा. सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है.

पुलिस का कहना है कि अब तक सिपाही भर्ती प्रक्रिया में धांधली के आरोप में तीन दर्जन से अधिक ‘मुन्ना भाई’ गिरफ्तार किए जा चुके हैं. पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके. इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली प्रभावी साबित हो रही है.

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