एक सड़क, दो काफिले... बांकीपुर में आमने-सामने आए तेजस्वी यादव और पवन सिंह, VIDEO

बांकीपुर उपचुनाव के प्रचार के आखिरी दिन पटना की सड़क पर तेजस्वी यादव और पवन सिंह के काफिले आमने-सामने आ गए. वोटिंग से पहले सामने आई इस तस्वीर ने चुनावी चर्चा तेज कर दी है.

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पटना की सड़क पर रोड शो के दौरान आमने-सामने आए तेजस्वी और पवन सिंह. (Photo: ITG) पटना की सड़क पर रोड शो के दौरान आमने-सामने आए तेजस्वी और पवन सिंह. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार थमने से ठीक पहले पटना की सड़कों पर ऐसा चुनावी नजारा दिखा, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया. रोड शो के दौरान तेजस्वी यादव और पवन सिंह के काफिले एक ही सड़क पर आमने-सामने आ गए. दोनों ओर समर्थकों की भीड़ मौजूद थी. कुछ पल के लिए सड़क पर हलचल बढ़ गई और वहां मौजूद लोगों की नजरें इसी दृश्य पर टिक गईं. इस दौरान दोनों काफिलों के आमने-सामने आने का दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया

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बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे. प्रचार खत्म होने से पहले सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी. बीजेपी ने शुरुआत में अभिषेक कुमार सिन्हा (बंटी) को उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने 9 जुलाई को नामांकन भी दाखिल किया, लेकिन बाद में पारिवारिक कारणों और अन्य वजहों का हवाला देते हुए नाम वापस ले लिया. इसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने 13 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल किया.

 

इस उपचुनाव में आरजेडी ने एक बार फिर रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है. उनका कहना है कि बांकीपुर वैश्य बहुल सीट है और इस बार जनता उन्हें समर्थन देगी. दूसरी तरफ जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद चुनाव मैदान में हैं. उनका दावा है कि यह सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अब तक के कामकाज पर जनता की राय भी है. उनके मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.

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बता दें कि पटना जिले की 14 विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर का राजनीतिक महत्व हमेशा से खास रहा है. यहां कुल 3,79,402 मतदाता हैं. चुनावी समीकरणों के लिहाज से यह सीट लंबे समय से चर्चा में रही है. बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है, क्योंकि यहां से विधायक रहे नितिन नवीन ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. उनके इस्तीफे से सीट खाली हुई, जिसके चलते अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है.

तीन दशक से बीजेपी का मजबूत गढ़

साल 1995 में यह सीट पटना पश्चिम के नाम से जानी जाती थी. उस चुनाव में नवीन किशोर सिन्हा ने जीत दर्ज की थी. 2008 में परिसीमन के बाद इसका नाम बांकीपुर हो गया. नवीन किशोर सिन्हा के निधन के बाद नितिन नवीन ने यहां से चुनावी जिम्मेदारी संभाली. 2006 से 2025 तक वह लगातार इस सीट से जीत दर्ज करते रहे. पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें 98,299 वोट मिले थे, जबकि आरजेडी की रेखा गुप्ता को 46,363 वोट हासिल हुए. जन सुराज की वंदना कुमारी तीसरे स्थान पर रही थीं.

अब सबकी नजर 30 जुलाई की वोटिंग पर है. यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपना पुराना गढ़ बचा पाती है या फिर बांकीपुर की जनता इस बार कोई नया राजनीतिक संदेश देती है.
 

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