Old Car EV Conversion Kit: इलेक्ट्रिक कार खरीदने का मन है, लेकिन कीमत सुनकर बजट गड़बड़ा जाता है. बाजार में लाखों रुपये की इलेक्ट्रिक कारें मौजूद हैं. ऐसे में सवाल है कि जिनके घर के बाहर 10-15 साल पुरानी पेट्रोल या डीजल कार खड़ी है, वे क्या करें. कार की उम्र खत्म होने वाली है, सरकारी नियमों की तलवार लटक रही है और नई गाड़ी खरीदने के लिए जेब इजाजत नहीं दे रही. तो क्या पुरानी कार को सीधे स्क्रैप में भेज देना ही आखिरी रास्ता है. भोपाल की एक कंपनी का दावा है कि ऐसा जरूरी नहीं है. आपकी पुरानी कार को इलेक्ट्रिक बनाकर दोबारा सड़क पर उतारने का रास्ता भी मौजूद है.
दरअसल, भोपाल बेस्ड श्रीआन इलेक्ट्रिक व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड का दावा है कि वह साल 2009 तक की पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक व्हीकल में कन्वर्ट कर सकती है. कंपनी के मुताबिक, इस काम पर करीब 2.25 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं. यानी नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने के बजाय अपनी पुरानी कार के इंजन और फ्यूल सिस्टम को हटाकर उसमें इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी लगाने का विकल्प भी तलाशा जा सकता है.
पुरानी कार को इलेक्ट्रिक बनाने का कितना खर्च
श्रीआन इलेक्ट्रिक व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल हेड ने आजतक से बातचीत में पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने की प्रोसेस, खर्च और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि, वो साल 2019 से इस बिजनेस में हैं और अब तक 500 से ज्यादा वाहनों को इलेक्ट्रिक किट के जरिए कन्वर्ट कर चुके हैं.
इस कन्वर्जन में सामान्य पेट्रोल या डीजल इंजन की जगह इलेक्ट्रिक मोटर लगाई जाती है. इसके साथ बैटरी पैक, मोटर कंट्रोलर और दूसरे जरूरी इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स लगाए जाते हैं. हालांकि, 2.25 लाख रुपये का खर्च बेसिक कन्वर्जन किट के लिए है. कार के मॉडल, बैटरी क्षमता और दूसरे डिवाइसेज के आधार पर ये रकम बढ़ती जाती है.
किन कारों का हो सकता है कन्वर्जन
हर पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में बदलना संभव हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कार का मॉडल, उसकी मौजूदा स्थिति, उपलब्ध जगह और उसमें लगाए जाने वाले इलेक्ट्रिक सिस्टम की अनुकूलता अहम होती है. कंपनी का दावा है कि वह 2009 तक की पुरानी कारों को कन्वर्ट कर सकती है. टेक्निकल हेड का कहना है कि, वो 1,000 किग्रा वजन वाली छोटी कारों को आसानी से EV में कन्वर्ट कर सकते हैं. इसमें मारुति की ओमनी से लेकर वैगनआर, ऑल्टो, मारुति 800, स्विफ्ट, हुंडई सैंट्रो, आई10 जैसी छोटी हैचबैक कारें शामिल हैं.
फोर-व्हीलर इलेक्ट्रिक कन्वर्जन किट में तकरीबन 16 कंपोनेंट शामिल हैं. ग्राहक चाहे तो इसे उनके वर्कशॉप पर कन्वर्ट करा सकता है या फिर किट खरीद कर अपनी सुविधानुसार दूसरी जगह पर भी इसे अपनी कार में लगाया जा सकता है. इस कन्वर्जन किट के इंस्टॉलेशन का खर्च नॉन एयर कंडिशन (AC) मॉडल के लिए 7,500 रुपये और AC मॉडल के लिए 12,500 रुपये तक जाता है.
1. मोटर: 48/60 वोल्ट, 5 किलोवाट
2. कंट्रोलर
3. थ्रॉटल (एक्सीलेरेटर)
4. एमसीबी: 40 एम्पियर के 3 यूनिट
5. डीसी-टू-डीसी कन्वर्टर
6. बैटरी रखने के लिए ट्रे
7. गियरबॉक्स माउंटिंग प्लेट
8. चार्जर: 72 वोल्ट, 20 एम्पियर
9. बैटरी: 7.2 किलोवाट-घंटा, 72 वोल्ट, 100 Ah
10. चार्जिंग सॉकेट असेंबली
11. बैटरी क्षमता बताने वाला इंडिकेटर
12. एसओसी वायरिंग हार्नेस (बैटरी चार्ज की स्थिति बताने वाली वायरिंग)
13. थ्रॉटल वायरिंग हार्नेस: 3-स्पीड और रिवर्स/फॉरवर्ड फंक्शन के साथ
14. पावर वायरिंग हार्नेस: कंट्रोलर, बैटरी और एमसीबी को जोड़ने के लिए 16–20 वर्ग मिमी की वायरिंग
15. रिले और कनेक्टर्स
16. इंस्टॉलेशन (फिटिंग और लगाने का काम) — वैकल्पिक
सर्विस वारंटी
श्रीआन इलेक्ट्रिक का कहना है कि, वो केवल उन्हीं वाहनों पर सर्विस वारंटी देते हैं जिनमें कन्वर्जन किट उनके वर्कशॉक पर लगाए जाते हैं. यहां सर्विस वारंटी से उनका मतलब ये है कि, यदि कार में EV कन्वर्जन के बाद यदि कोई समस्या आती है तो उसमें बदले जाने वाले कंपोनेंट का खर्च ग्राहक को खुद उठाना होगा, लेकिन सर्विस यानी लेबर चार्ज कंपनी द्वारा खुद वहन किया जाएगा.
क्या कन्वर्ट होने के बाद सड़क पर चलाना कानूनी होगा
यह इस पूरे प्रोसेस का सबसे अहम सवाल है. किसी पेट्रोल या डीजल कार में इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी लगवा देना अपने आप उसे कानूनी रूप से सड़क पर चलाने के योग्य नहीं बना देता. वाहन में इस तरह के बदलाव के लिए लागू मोटर वाहन नियमों, तकनीकी मंजूरी और रजिस्ट्रेशन संबंधी शर्तों का पालन जरूरी है. इसलिए कन्वर्जन कराने से पहले आपको अपनी कार के रजिस्टर्ड RTO से इसके लिए अनुमति लेनी होगी और जरूरी पेपर वर्क पूरा करना होगा.
कंपनी का कहना है कि, पहले वो EV कन्वर्जन के वाहनों के आरटीओ संबंधित काम खुद करते थें. लेकिन अब ग्राहक खुद ही वाहन से संबंधित आरटीओ से अप्रूवल लेकर आते हैं और उनकी गाड़ी को EV में कन्वर्ट किया जाता है. भगवान सिंह बताते हैं कि, RTO प्रोसेस में एक छोटी हैचबैक के लिए तकरीबन 24,000 से 25,000 रुपये तक का खर्च आता है. जो कि कन्वर्जन प्रोसेस की प्राइस में शामिल नहीं है. इसे ग्राहक को अलग से वहन करना पड़ता है. इसके अलावा ये खर्च देश के अलग-अलग आरटीओ के अनुसार भिन्न भी हो सकता है. मोटे तौर पर ये नई कार के RTO खर्च का लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक होता है.
RTO के इस प्रोसेस के बारे में कुछ खास फीस और पेपर वर्क शामिल हैं. जो निम्नवत है.
ध्यान दें, ये खर्च देश के अलग-अलग RTO और लोकेशन के अनुसार भिन्न हो सकता है.
ड्राइविंग रेंज और चार्जिंग टाइम
इलेक्ट्रिक कार की उपयोगिता काफी हद तक उसकी बैटरी क्षमता और ड्राइविंग रेंज पर निर्भर करती है. पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद एक बार चार्ज करने पर वह कितनी दूर चलेगी, इसे बैटरी पैक की क्षमता और वाहन के वजन समेत कई बातें प्रभावित करती हैं. कंपनी का कहना है कि, वो ग्राहक के जरूरत और डिमांड के अनुसार पुरानी कार में कन्वर्जन किट लगाते हैं.
कंपनी के अनुसार, बेसिक किट की कीमत तकरीबन 2.25 लाख रुपये से शुरू होती है और इसमें 48/60 वोल्ट, 5 किलोवाट का इलेक्ट्रिक मोटर और 7.2 किलोवाट-घंटा, 72 वोल्ट, 100 Ah की बैटरी लगाई जाती है. आमतौर पर ये पैक सिंगल चार्ज में तकरीबन 120 किमी की डाइविंग रेंज देती है. हालांकि ये कार में बैठने वाले लोगों की संख्या और लोड पर निर्भर करता है. लेकिन ये एक बेसिक किट है तो डेली सिटी राइड के लिए परफेक्ट माना जाता है.
जहां तक कार की बैटरी की चार्जिंग की बात है तो इस किट के साथ एक चार्जिंग एडॉप्टर और 5 मीटर लंबी केबल भी दी जाती है. जिसकी मदद से घरेलू 16 एम्पीयर के पॉवर सॉकेट से कनेक्ट कर कार की बैटरी को आसानी से चार्ज किया जा सकता है. टेक्निकल हेड के अनुसार, यदि कार की बैटरी 20 प्रतिशत तक बची है तो इसे फुल चार्ज होने में तकरीबन 4 से 5 घंटे का समय लगता है. वहीं यदि बैटरी पूरी तरह से खत्म है तो इसे फुल चार्ज होने में तकरीबन 7 घंटे तक का समय लगेगा.
जम्मू भी भेज चुके हैं इलेक्ट्रिक एंबुलेंस
भगवान सिंह बताते हैं कि, हम अपने यहां कारों में बैटरी पैक के लिए कस्टमाइजेशन की पूरी सुविधा देते हैं. एक बार उन्होंने मारुति ओमनी एंबुलेंस को EV में कन्वर्ट किया था. जिसका इस्तेमाल जम्मू में किया जाता है. ये उनके करियर का सबसे बड़ा कस्टमाइजेशन प्रोग्राम था. जिसमें सबसे बड़ा कन्वर्जन किट लगाया गया. उस समय इसका खर्च तकरीबन 4 लाख रुपये तक आया था. चूकिं ये एक एम्बुलेंस थी, तो इसमें ज्यादा हैवी बैटरी की जरूरत थी.
अन्य कंपनियां भी करती हैं ये काम
ऐसा नहीं है कि, पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करने का काम केवल एकमात्र यही कंपनी कर रही है. इसके अलावा भी देश में कई ऐसे ब्रांड हैं जो अपने स्तर पर पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करते हैं. जिसमें डूरियल मोटर्स, लूप मोटो, फॉक्स मोटर्स, ई-ट्रियो, भारत किट और नॉर्थवे मोटरस्पोर्ट जैसे नाम शामिल हैं. ये ब्रांड भी 3 लाख रुपये से लेकर 14 लाख रुपये तक के खर्च में EV कन्वर्जन का दावा करते हैं.
स्क्रैप के बजाय पुरानी कार को नया जीवन
पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराने का यह कॉन्सेप्ट उन गाड़ियों के लिए किसी जीवनदान से कम नहीं है, जिनकी उम्र खत्म होने वाली है या खत्म हो चुकी है. हालांकि देश के अलग-अलग स्टेट और आरटीओ में फ्यूल कन्वर्जन को लेकर भिन्न नियम और खर्च हैं. लेकिन जो अपनी गाड़ी को स्क्रैप में भेजने के बजाय उसका इस्तेमाल करना चाहते हैं, उनके लिए ये एक किफायती विकल्प है.
लेकिन फैसला केवल शुरुआती खर्च देखकर नहीं करना चाहिए. कन्वर्जन की कीमत, बैटरी बदलने का खर्च, वारंटी, चार्जिंग की सुविधा और कानूनी मंजूरी जैसे पहलुओं को भी समझना जरूरी है. अगर ये सभी शर्तें आपके हिसाब से पूरी होती हैं, तो पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में बदलना कुछ मालिकों के लिए नई गाड़ी खरीदने का एक वैकल्पिक रास्ता बन सकता है.
अश्विन सत्यदेव