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El Nino के असर से खरीफ फसलों पर सूखे का संकट, किसान रहें अलर्ट! पढ़ें एडवाइजरी

El-Nino effect on Agriculture: इस साल भारत में अल नीनो के प्रभाव से मॉनसून की बारिश कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर सूखे का खतरा बढ़ गया है. खासकर धान, गन्ना, कपास जैसी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने किसानों को सूखा सहन करने वाली फसलें बोने और फसल बीमा योजना का लाभ लेने की सलाह दी है.

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El Nino impact On kharif Crops (File Photo- PTI)
El Nino impact On kharif Crops (File Photo- PTI)

इस साल भारत में मॉनसून की बारिश कमजोर रहने की आशंका है. इसका मुख्य कारण अल नीनो है. वैज्ञानिकों और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनी के मुताबिक, अल-नीनो के असर से खरीफ फसलों पर सूखे का खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है.

खरीफ फसलों पर क्या असर पड़ेगा?
खरीफ सीजन जून से सितंबर तक चलता है. इसमें धान, मक्का, बाजरा, दालें, कपास और गन्ना जैसी फसलें बोई जाती हैं. कम बारिश से इन फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. वहीं, पानी वाली फसलें जैसे चावल, गन्ना और कपास सबसे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के कई इलाके सूखे की चपेट में आ सकते हैं.

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कपास विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादा गर्मी का कपास के पौधों पर बुरा असर पड़ता है. तने के चारों ओर एक पीला घेरा बन जाता है, जो बैक्टीरिया और बीमारी फैलाने वाले दूसरे कीटाणुओं के हमले के प्रति संवेदनशील होता है. नतीजतन, तना मुरझा जाता है और पौधा मर जाता है.

किसानों के लिए खास एडवाइजरी
ऐसे में किसानों को अभी से अलर्ट रहना चाहिए. कृषि एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बेहतर होगा कि किसान सूखा सहन करने वाली फसलें बोएं. बाजरा, रागी, ज्वार जैसी मिलेट फसलें कम पानी में अच्छी होती हैं. कई किसान उत्पादक संगठन (FPO) इन्हें बढ़ावा दे रहे हैं. कम समय में तैयार होने वाली फसलों का चुनाव करें और फसल बीमा योजना का लाभ लें.

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पौधों को गर्मी से बचाने की सलाह
PAU के वैज्ञानिकों ने किसानों को फलों के पौधों को गर्मी से बचाने के लिए उचित सावधानी बरतने की सलाह दी है. उन्होंने पेड़ों के निचले तनों पर सफेद रंग (व्हाइट वॉश) का घोल लगाने की सलाह दी है. सफेद रंग का घोल 100 लीटर पानी में 25 किलो बुझा हुआ चूना, 500 ग्राम कॉपर सल्फेट और 500 ग्राम गोंद मिलाकर तैयार किया जा सकता है. साथ ही, नियमित अंतराल पर बार-बार सिंचाई से गर्मी और सूखे के प्रकोप से बचाया जा सकता है.

सूखे का सब्जियों पर ज्यादा असर
खेतों में लगी मिर्च, भिंडी और कुकुरबिट्स (जैसे करेला, लौकी) जैसी सब्जियां भी सूखे से प्रभावित होती हैं. अधिक तापमान इन सब्जियों में फल लगने की क्षमता को प्रभावित करता है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकिन बार-बार सिंचाई करें ताकि कुछ हद तक ठंडक बनी रहे.

अल नीनो क्या है और यह मॉनसून को कैसे प्रभावित करता है?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है. इसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे हवाओं और बारिश के पैटर्न बदल जाते हैं. भारत में अल नीनो के सालों में अक्सर मॉनसून कमजोर रहता है. IMD ने 29 मई 2026 को जारी अपनी लंबी अवधि की भविष्यवाणी में कहा है कि इस साल पूरे देश में मॉनसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का सिर्फ 90-92% रह सकती है. ऐसे में कम बारिश की संभावना है.

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