आपने अक्सर ऐसी कहानियां सुनी होंगी, जिसमें दावा किया गया होगा कि नौकरी छोड़कर, व्यक्ति ने खेती की और अब लाखों की कमाई कर रहा है. लेकिन हर चीज की खेती करके आप लाखों रुपये की कमाई नहीं कर सकते हैं, बल्कि एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आपको वही खेती करनी चाहिए, जो आपकी मिट्टी को सूट करे और आपकी कमाई भी कराए.
आज हम एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बता रहे हैं, जिसने सिर्फ अपने खेत में फसल बदलकर खेती शुरू की और अब वह सालाना 80 लाख रुपये की कमाई कर रहा है. वह व्यक्ति महाराष्ट्र के किसान सागर येलपाले हैं. पहले वह अना की खेती करते थे, तब उन्हें कमाई उतनी अच्छी नहीं होती थी.
लेकिन फिर उन्होंने सहजन की खेती का प्रयोग शुरू किया और फिर धीरे-धीरे इसका विस्तार करते गए और आज वे सहजन के सफल खेतीहर किसान हैं. पहले 1 एकड़ में सहजन की खेती शुरू की थी, लेकिन आज यह खेती 18 एकड़ में बदल चुकी है. इसमें उन्हें सालाना 1.15 करोड़ रुपये का कारोबार होता है और करीब 80 लाख रुपये का मुनाफा होता है.
पहले फैमिली की खेती पर किया फोकस
30Stades की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोलापुर जिले के सागर ने यह बदलाव रातोंरात नहीं किया. साल 2012 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह अपने पिता के साथ परिवार के 10 एकड़ के खेत में काम करने लगे और पिछली पीढ़ियों की तरह अनार की खेती जारी रखी, लेकिन बढ़ती लागत और अनिश्चित मौसम के कारण फसल धीरे-धीरे कम लाभदायक होती गई.
बढ़ती लागत ने किया मजबूर
ऑप्शन तलाशने के अपने फैसले के बारे में बताते हुए सागर ने कहा कि अनार की खेती करना एक महंगा खर्च हो गया था. उच्च आर्द्रता या अचानक पड़ने वाली भीषण गर्मी के कारण बीमारियां बढ़ रही थीं और रसायनों की लागत भी लगातार बढ़ रही थी. हर एकड़ 3 लाख रुपये की कमाई में से लगभग 1.5 लाख रुपये खेती के खर्च में ही चले जाते थे.
उन्होंने कहा कि इस कारण मैंने फसल कटाई से पहले आय हासिल करने पर फोकस किया. ऐसे में कम रिस्क वाले ऑप्शन की तलाश शुरू की और बेहतर लाभ, नियमित इनकम वाला विकल्प ढूंढ निकाला. कम निवेश वाली, जल्दी मुनाफा देने वाली और बदलते मौसम के प्रति अधिक प्रतिरोधी फसल की तलाश में सागर को 2017 में एक मित्र द्वारा परिचय कराए जाने के बाद सहजन की व्यावसायिक खेती के बारे में पता चला.
फिर एक एकड़ में उन्होंने इसका प्रयोग शुरू किया. प्रयोग के तौर पर उन्होंने 400 ग्राम सहजन के बीज 4,000 रुपये में खरीदे. मिट्टी को अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद से उपजाऊ बनाने के बाद, उन्होंने जनवरी 2017 में बीज बोए और पांच महीने के भीतर फसल काट ली.
उम्मीद से बेहतर रहा रिस्पॉन्स
उन्होंने याद करते हुए बताया कि मैंने जून 2017 में फसल काटना शुरू किया था. सिर्फ एक एकड़ से मैंने पांच महीनों में लगभग 10 टन फसल काटी. औसत विक्रय मूल्य लगभग 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम था और मैंने 3 लाख रुपये से अधिक की कमाई की.
एक एकड़ से लेकर 18 एकड़ तक
पहले सफल सीजन ने उन्हें यह आत्मविश्वास दिया कि वे अचानक बदलाव करने के बजाय धीरे-धीरे परिवार के अनार के बागों को सहजन की खेती से बदल दें. उन्होंने बताया कि मेरे माता-पिता के पास 10 एकड़ की जमीन थी और मैंने उसमें आठ एकड़ और जोड़ दिया.
आज सागर का फार्म 18 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें लगभग 12,000 सहजन के पौधे हैं, जिनमें मुख्य रूप से ओडीसी-3 और ओडीसी-4 किस्में शामिल हैं. जैसे-जैसे बागान परिपक्व हुआ, प्रति पेड़ वार्षिक उपज लगभग 25 किलोग्राम से बढ़कर लगभग 50 किलोग्राम हो गई, जिससे कुल उत्पादन प्रति वर्ष लगभग 180-200 टन तक पहुंच गया.
लागत कम रखते हुए
लागत को नियंत्रण में रखने के लिए सागर ने मृदा स्वास्थ्य पर फोकस किया. उन्होंने एक बायोगैस प्लांट बनाया, जो प्रतिदिन 200-300 लीटर स्लरी का उत्पादन करता है, जिसे सीधे खेतों में आपूर्ति की जाती है. उनके अनुसार, स्लरी से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है, उर्वरक की लागत कम होती है और उत्पन्न गैस का उपयोग घर में खाना पकाने के लिए किया जाता है.
बड़ा मार्केट बनाया
फसल उगाना तो आधी ही लड़ाई थी. विश्वसनीय खरीदारों को ढूंढना भी उतना ही महत्वपूर्ण साबित हुआ. पिछले कुछ सालों में सागर ने थोक विक्रेताओं का एक मजबूत नेटवर्क बनाया है, और अब उनकी ज्यादातर फसल लगभग 400 किलोमीटर दूर हैदराबाद जाती है, जहां लगभग पूरी उपज बिक जाती है.
मांग के बारे में बात करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि पहले तो मैं दुबई को भी ड्रमस्टिक निर्यात करता था, लेकिन अब हैदराबाद से ही इतनी मजबूत मांग है कि मेरा पूरा उत्पादन वहीं बिक जाता है. साल भर कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहता है, लेकिन कारोबार लाभदायक बना रहता है.
उन्होंने बताया कि सर्दियों में आपूर्ति सीमित होने के कारण मुझे लगभग 200 रुपये प्रति किलो मिलते हैं। गर्मियों में कीमतें गिरकर लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक हो सकती हैं। कुल मिलाकर, वार्षिक औसत लाभ लगभग 50 रुपये प्रति किलो बना रहता है.