पिछले वीकेंड अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में युद्ध खत्म करने को लेकर शांति वार्ता हुई थी. ईरान से बातचीत के लिए विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे थे जहां उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा महसूस हुआ था. अब खुलासा हुआ है कि जब अमेरिका के साथ वार्ता विफल रही, तब ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इजरायल के हमलों से खतरा जताया था जिसके बाद पाकिस्तान उन्हें वापस ईरान छोड़कर आया था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के साथ बेनतीजा शांति वार्ता के बाद पाकिस्तान वायुसेना ने ईरानी वार्ताकारों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए विशेष एयर एस्कॉर्ट मिशन चलाया. तीन सूत्रों ने बताया कि ईरानी पक्ष ने चिंता जताई थी कि इजरायल उन्हें निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है.
दो पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल को इस्लामाबाद से सुरक्षित वापस भेजने के लिए पाकिस्तान ने करीब दो दर्जन लड़ाकू विमान तैनात किए. साथ ही हवाई निगरानी के लिए एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) भी लगाया गया.
एक सूत्र ने कहा कि अगर ईरानी पक्ष अनुरोध करता है तो भविष्य की वार्ताओं में भी इसी तरह की सुरक्षा दी जा सकती है. लेकिन अगर ऐसा कोई अनुरोध नहीं आता तो पाकिस्तानी विमान केवल अपने हवाई क्षेत्र तक ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षा देंगे.
वार्ता से जुड़े तीसरे सूत्र ने कहा कि इस वीकेंड अगले दौर की बातचीत हो सकती है जिसे देखते हुए सुरक्षा इंतजाम पहले से किए जा रहे हैं.
ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर हमला कर सकता था इजरायल
ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए पाकिस्तान आने के दौरान भी इजरायली हमले का डर था और जब वार्ता विफल रही तो डर और गहरा हो गया. ईरान की चिंता को देखते हुए पाकिस्तान की वायुसेना ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के लिए हवा में भारी सुरक्षा प्रदान की.
एक सुरक्षा सूत्र ने कहा, 'जब वार्ता विफल रही तो ईरानी पक्ष को लगा कि हालात सही दिशा में नहीं जा रहे. उन्हें शक था कि उन पर हमला हो सकता है.'
उन्होंने कहा, 'पायलट के नजरिए से यह बहुत बड़ा ऑपरेशन था. आप वार्ता के लिए आए प्रतिनिधिमंडल की जिम्मेदारी ले रहे हैं, उन्हें हवाई सुरक्षा दे रहे हैं और किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए सक्षम लड़ाकू विमान तैनात हैं.'
तेहरान तक छोड़कर आया था पाकिस्तान
पाकिस्तान ने इजरायल की तरफ से किसी भी संभावित हमले से निपटने की पूरी प्लानिंग की थी. ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा के लिए उनके विमान के चारों तरफ लड़ाकू विमानों से जैसे किलेबंदी कर दी गई थी.
वार्ता से जुड़े एक पाकिस्तानी सूत्र ने बताया, 'हम उन्हें तेहरान तक छोड़कर आए. हमारे एयरस्पेस से उनके निकलने के बाद भी उनकी सुरक्षा हमारी ही जिम्मेदारी थी.'
इस मिशन में पाकिस्तान वायुसेना के बेड़े के सबसे एडवांस चीन में बने J-10 फाइटर जेट शामिल थे.
इजरायली हमले की सूची में थे दोनों ईरानी नेता
एक क्षेत्रीय राजनयिक ने कहा कि ईरानी पक्ष ने सुरक्षा के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया, लेकिन इस बात से इनकार भी नहीं किया कि इजरायल उनके विमान पर हमला कर सकता है. इसी कारण पाकिस्तान ने सुरक्षा एस्कॉर्ट देने पर जोर दिया.
राजनयिक ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल तेहरान में नहीं उतरा, लेकिन उन्हें कहां छोड़ा गया, उन्होंने यह बताने से इनकार किया.
28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को मारने के बाद भी इजरायल अमेरिका की मदद से ईरान के शीर्ष नेताओं को मार रहा था. सूत्रों के मुताबिक, तब पाकिस्तान ने अमेरिका से हस्तक्षेप करने को कहा था ताकि अरागची और कालीबाफ को इजरायल की कथित हिट लिस्ट से हटाया जा सके, क्योंकि युद्ध पर बातचीत के लिए कोई प्रतिनिधि नहीं बचता.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि युद्ध 'बहुत जल्द खत्म होना चाहिए'. उन्होंने बताया था कि इस वीकेंड इस्लामाबाद में फिर से ईरान के साथ शांति वार्ता हो सकती है.