खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की सख्ती के बीच अमेरिका ने तेल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए एक सीक्रेट तरीका अपनाया. इसका इस्तेमाल अब तक खुद ईरान करता रहा था. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमेरिकी सैन्य निगरानी में समुद्र के बीच जहाजों के बीच गुप्त रूप से तेल ट्रांसफर किया जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि खाड़ी देशों का कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचते रहें. यह ऑपरेशन मई की शुरुआत में शुरू हुआ था और अब तक कम से कम 92 जहाज इस नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं. यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री की निगरानी में समंदर में येनमिशन सुचारु रूप से चल रहा था.
इस मिशन में ड्रोन, हेलीकॉप्टर, हवाई निगरानी और समुद्री मॉनिटरिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि उनकी सेनाएं सीधे तेल ट्रांसफर ऑपरेशन में शामिल नहीं हैं. अमेरिकी सेना खाड़ी से एनर्जी एक्सपोर्ट का फ्लो बनाए रखने के लिए सीक्रेट शिप-टू-शिप ऑयल ट्रांसफर की निगरानी कर रही है.
यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल ईरान वर्षों से प्रतिबंधों और बैन से बचने के लिए करता रहा है. इस ऑपरेशन के तहत तेल से भरे छोटे टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर ओमान और UAE के तट के पास मौजूद बड़े जहाजों तक पहुंचते हैं. वहां समुद्र के बीच तेल ट्रांसफर किया जाता है और फिर बड़े जहाज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रवाना हो जाते हैं.
शिपिंग डेटा और सैटेलाइट इमेजरी के मुताबिक, ट्रांसफर के दो प्रमुख केंद्र हैं. पहला यूनाइटेड अरब अमीरात के फुजैराह तट के पास और दूसरा ओमान के सोहर पोर्ट के नजदीक. 11 जून को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में दोनों स्थानों पर 17 जोड़ी जहाज तेल ट्रांसफर करते दिखाई दिए. रॉयटर्स ने 2 मई से 11 जून के बीच की तस्वीरों का विश्लेषण किया.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 9 जून को ईरान द्वारा मार गिराया गया अपाचे हेलीकॉप्टर भी इसी मिशन से जुड़ा हुआ था. सूत्रों के मुताबिक, जिनमें एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हैं, हेलीकॉप्टर किसी न किसी रूप में इस ऑपरेशन से संबंधित था. हालांकि, रॉयटर्स ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि अपाचे की भूमिका वास्तव में क्या थी.
अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने इस दावे पर कहा कि कोई भी सेंट्रल कमांड फोर्स ऑफशोर शिप-टू-शिप ट्रांसफर ऑपरेशन में भाग नहीं ले रही थी. उनके मुताबिक, अपाचे हेलीकॉप्टर के दोनों क्रू मेंबर्स को बाद में एक ड्रोन बोट की मदद से बचा लिया गया था. ओमान की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के निकास के पास यह पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा है.
यह क्षेत्र फारस की खाड़ी स्ट्रेट अथॉरिटी की निगरानी सीमा के आसपास आता है, जिसे हाल ही में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करने के लिए स्थापित किया है. सूत्रों का कहना है कि जो जहाज ईरानी आदेशों का पालन नहीं करते, उन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बना रहता है.
इसी वजह से अमेरिका समर्थित नेटवर्क में शामिल जहाज बेहद गोपनीय तरीके से संचालित हो रहे हैं. ऑपरेशन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पूरा सिस्टम अमेरिकी सैन्य नियंत्रण के तहत संचालित हो रहा है. इसमें कुछ प्राइवेट सिक्योरिटी कॉन्ट्रैक्टर भी शामिल हैं. इसमें शामिल सभी टैंकरों को पहले एक निर्धारित मीटिंग पॉइंट पर पहुंचना होता है.
इसके बाद उन्हें अलग-अलग समय पर रवाना किया जाता है, ताकि जहाजों के बीच लगभग 3,000 से 4,000 मीटर की दूरी बनी रहे. सूत्रों के मुताबिक, कई जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद रखते हैं और रात में बेहद कम रोशनी के साथ आगे बढ़ते हैं. कई वेपॉइंट ऐसे बनाए गए हैं जहां अमेरिकी निगरानी प्रणाली उनकी गतिविधियों पर नजर रखती है.
होर्मुज स्ट्रेट पार करने के बाद छोटे टैंकर पहले से इंतजार कर रहे वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) तक पहुंचते हैं. इसके बाद समुद्र में ही तेल ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होती है. एक ट्रांसफर पूरा होने में 24 से 40 घंटे तक का समय लगता है. तेल खाली करने के बाद छोटे टैंकर वापस लौट जाते हैं . VLCC जहाज अंतरराष्ट्रीय बाजार रवाना हो जाते हैं.