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ईरान पर अमेरिका का दूसरा बड़ा प्रहार, भीषण बमबारी से दहला होर्मुज, कई ठिकाने तबाह

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ दूसरी सैन्य कार्रवाई करते हुए होर्मुज से जुड़े सैन्य ठिकानों पर हमला किया. वाशिंगटन का दावा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय जहाजों को धमकाने के लिए किया जा रहा था. इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है.

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ट्रंप के निर्देश पर ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका का हमला (Photo-ITG File Photo)
ट्रंप के निर्देश पर ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका का हमला (Photo-ITG File Photo)

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य गतिरोध अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' पर वर्चस्व की जंग के बीच, अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर दूसरे दौर के बड़े सैन्य हमले किए हैं.

अमेरिकी सेना का दावा है कि ये हमले उन ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक जहाजों को डराने और उन पर हमले करने के लिए किया जा रहा था.

अमेरिकी सैन्य बयान के अनुसार, यह अभियान बुधवार दोपहर लगभग 3:00 बजे (ET) शुरू किया गया. हमले का उद्देश्य उन ईरानी सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाना था, जिनका संबंध होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर खतरा पैदा करने से था.

अमेरिकी सेना का बयान

अमेरिकी सेना ने कहा कि "हमले उन ईरानी सैन्य क्षमताओं पर केंद्रित हैं, जिनका उपयोग होर्मुज से स्वतंत्र रूप से गुजरने वाले जहाजों को धमकाने के लिए किया जा रहा था. यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है."

यह भी पढ़ें: 'होर्मुज सुरक्षित पार कर लिया'... पत्नी को आखिरी मैसेज, फिर हमले में मारा गया भारतीय इंजीनियर

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व्हाइट हाउस के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई. अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान को उसकी गतिविधियों के लिए जवाबदेह ठहराने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है.

बुधवार को यह अमेरिका की दूसरी सैन्य कार्रवाई है, जिससे पहले से ही तनावपूर्ण अमेरिका-ईरान संबंध और अधिक बिगड़ गए हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी टकराव के बीच इस हमले ने पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है. इस जवाबी कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजार और तेल आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर संकट मंडराने लगा है.

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