पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल आज यानि गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गई है. लगातार गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने साफ कहा कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है. बुधवार रात जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उनके शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं, लेकिन उनका दिल और दिमाग पूरी तरह स्वस्थ हैं.
उन्होंने कहा, "मेरी हालत कुछ ऐसी भी नहीं है की मैं 2-4 दिन में मर जाऊं. बहुत सारे मेडिकल टेस्ट होते रहे हैं. रिजल्ट काफी नॉर्मल है 18 दिन के अनशन के लिए आज ईसीजी भी हुआ बुरा नहीं है. तो इसलिए मैं अभी कई दिन चल सकता हूं. हां कमजोरी है मेरे मसल्स खत्म हो रहे हैं मगर मेरा दिल अभी भी ठीक चल रहा है."
वांगचुक ने बताया कि उन्हें लगातार हजारों संदेश मिल रहे हैं, जिनमें लोग उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं. कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनसे अनशन तोड़ने का आग्रह किया है और कुछ लोगों ने अदालत से सरकार को जबरन भोजन कराने के निर्देश देने की मांग भी की है.
हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि वह अभी अनशन तोड़ देते हैं तो सरकार को यही संदेश जाएगा कि बिना जवाब दिए भी आंदोलन समाप्त कराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए है.
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20 जुलाई को 'चलो संसद' का आह्वान
सोनम वांगचुक ने देशभर के छात्रों, युवाओं, शिक्षकों और आम नागरिकों से 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि लोकतंत्र को समझने का जीवंत अवसर होगा. उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से भी अपील की कि वे इस दिन को 'एक्सपीरिएंशियल एजुकेशन डे' के रूप में मनाएं, ताकि छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें.
आंदोलन से जुड़े चिकित्सकों के अनुसार वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा है. उनका वजन घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है, जो अनशन शुरू होने के बाद लगभग 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है. उनका ब्लड प्रेशर 105/76, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन स्तर 97 प्रतिशत दर्ज किया गया है. डॉक्टरों का कहना है कि वह पूरी तरह सचेत और मानसिक रूप से स्वस्थ हैं, लेकिन उनकी स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है.
विपक्षी सांसदों का मिला समर्थन
बुधार दिनभर जंतर-मंतर पर कई विपक्षी सांसद और नेता वांगचुक से मिलने पहुंचे. इनमें भीम आर्मी प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद, समाजवादी पार्टी के सांसद, तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और सीपीआई के सांसद शामिल रहे. नेताओं ने आश्वासन दिया कि आंदोलन से जुड़े मुद्दे संसद के मानसून सत्र और 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में मजबूती से उठाए जाएंगे.
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चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यदि वांगचुक को कुछ भी होता है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी. उन्होंने देशभर के छात्रों और युवाओं से 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल होने की अपील भी की.इस बीच, आंदोलन से जुड़े अन्य छात्र नेताओं का अनशन भी जारी है. विभिन्न शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और विपक्षी नेताओं ने आंदोलन के प्रति अपना समर्थन दोहराया है. आयोजकों का दावा है कि 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के लिए अब तक 1.3 लाख से अधिक लोग मिस्ड कॉल अभियान के माध्यम से अपना समर्थन दर्ज करा चुके हैं.