अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को तीस दिनों तक रूसी तेल खरीदने की छूट जारी की है. इस छूट को लेकर अमेरिका में काफी विवाद हो रहा है. अमेरिकी संसद में विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों की मांग है कि ट्रंप प्रशासन तुरंत प्रतिबंध में छूट को वापस ले.
कैलिफोर्निया से रिप्रेजेंटेटिव सैम लिकार्डो और एरिजोना से सीनेटर रूबेन गालेगो ने ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट को लिखे एक पत्र में कहा, '30 दिनों की छूट देने का आपका हालिया फैसला खतरनाक और आत्मघाती है जिसे आप किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं बता सकते. यह छूट दुश्मन को सीधे फायदा पहुंचाने जैसा है.'
पिछले हफ्ते अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से 30 दिनों की छूट जारी की थी. अमेरिका ने कहा कि यह फैसला ईरान युद्ध और होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही ठप होने से बढ़ती तेल की कीमतों पर कंट्रोल रखने के लिए लिया गया है.
टैरिफ को लेकर तनाव और रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की छूट
अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर 25% का टैरिफ लगा दिया था. इस टैरिफ की वजह से भारत पर अमेरिका का कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया था. टैरिफ को लेकर तनाव के बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील ठंडे बस्ते में चला गया था.
फिर फरवरी की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अंतरिम ट्रेड डील पर बनी सहमति के बाद अमेरिका भारत पर लगे टैरिफ को कम कर 18% कर रहा है. इसी के साथ ही रूसी तेल की खरीद को लेकर लगा 25% टैरिफ भी हटा दिया गया.
ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूसी तेल की खरीद रोकने पर सहमत हुआ है जिस कारण टैरिफ हटाया गया है. हालांकि, भारत ने कभी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा कि वो रूसी तेल की खरीद बंद कर रहा है. हालांकि, रूसी तेल के आयात में कमी देखी गई.
28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच अमेरिका ने भारत को यह छूट दी है.
अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के लिए ईरान की मदद कर रहा रूस?
भारत को प्रतिबंध छूट दिए जाने के बाद यह खबर सामने आई कि रूस क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों, विमानों और ठिकानों को निशाना बनाने में ईरान की मदद कर रहा है. गालेगो और लिकार्डो ने अपने लेटर में चेतावनी दी कि इस अस्थायी छूट से रूस को आर्थिक लाभ मिल रहा है, जबकि वो मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने में सहयोग कर रहा है.
उन्होंने लिखा, 'भारत और अन्य सहयोगियों को ऊर्जा के विकल्प देने के लिए जरूरी आकस्मिक योजना बनाने के बजाय प्रशासन के अव्यवस्थित रवैये ने रूस और अन्य विरोधियों को उन तेल भंडारों से फायदा कमाने का मौका दे दिया है, जिन्हें पहले प्रतिबंधों के कारण सीमित किया गया था. इस छूट से यह संकेत गया है कि अमेरिका अपने सैनिकों पर हमलों को रोकने के बजाय हमलावरों को इनाम देगा.'
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होर्मुज की खाड़ी से होकर गुजरती है. अमेरिका और इजरायल के तेहरान पर हमलों की शुरुआत के बाद से यह रास्ता काफी हद तक अवरुद्ध हो गया है.
युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. रविवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. इसके कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर 3.44 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं.