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अमेरिकी दूत ने कहा, जलवायु परिवर्तन की लड़ाई में भारत की भूमिका अहम

भारत दौरे पर आए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जॉन कैरी ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन की लड़ाई में भारत की भूमिका बेहद अहम है. जॉन कैरी ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर काफी उत्साहित हैं. वह केवल बातें नहीं करते हैं बल्कि काम करते हैं,

अमेरिकी प्रतिनिधि जॉन कैरी और पीएम नरेंद्र मोदी अमेरिकी प्रतिनिधि जॉन कैरी और पीएम नरेंद्र मोदी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत के दौरे पर आए अमेरिकी दूत जॉन कैरी
  • जलवायु परिवर्तन में भारत की भूमिका को बताया अहम
  • क्लाइमेट समिट में भी भारत को किया गया है आमंत्रित

अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन कैरी ने गुरुवार को कहा है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे में भारत की भूमिका काफी अहम है. उन्होंने 'इंडिया टुडे' को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन पर गठित टास्क फोर्स का अहम सदस्य है. उन्होंने कहा कि भारत के पास इस चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त बौद्धिक संसाधन हैं और और वह इस पर काबू पाने में बड़ा योगदान दे सकता है. 

जॉन कैरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर हम सबके सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस कदम उठाने की है.

अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जॉन कैरी जलवायु परिवर्तन पर होने वाली समिट से पहले भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए हैं. पिछले तीन दिनों में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्र सरकार के तमाम प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर इसी महीने एक समिट का आयोजन करने वाले हैं. इस समिट में भारत समेत 40 देशों को आमंत्रित किया गया है. आमंत्रित देशों की सूची में चीन और रूस का नाम भी शामिल है.

जॉन कैरी ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को लेकर काफी उत्साहित हैं. वह केवल बातें नहीं करते हैं बल्कि काम करते हैं, हम इस दिशा में साथ मिलकर काम करेंगे."

अमेरिकी दूत ने उम्मीद जाहिर की कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर हो रही चर्चा में चीन भी शामिल होगा. उन्होंने कहा, "हमें चीन को लेकर उम्मीद है लेकिन हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. हमारे कई मुद्दों पर मतभेद जरूर हैं लेकिन हम इन मतभेदों में उलझे नहीं रहना चाहते."

जॉन कैरी ने कहा कि अमेरिका की कोशिश है कि सभी देशों में कार्बन उत्सर्जन कम करने में योगदान देने वाली नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़े. अमेरिका इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सिर्फ बातें ना हों बल्कि ठोस कदम उठाए जाएं.
 
जॉन कैरी ने कहा, "पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने के बावजूद तमाम अमेरिकी गवर्नर इसके समर्थन में थे. अब बाइडेन प्रशासन इन चार सालों में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए तैयार है."

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बेहद गंभीर हैं. बाइडेन ने पद संभालते ही पैरिस जलवायु समझौते में अमेरिका के लौटने की घोषणा कर दी थी.

जलवायु परिवर्तन को लेकर हो रही वर्चुअल समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बाइडेन की एक बार फिर से मुलाकात होगी. इससे पहले, क्वॉड देशों की वर्चुअल बैठक में भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी.

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया में सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करता है. हालांकि, प्रति व्यक्ति के हिसाब से उत्सर्जन, बाकी देशों के मुकाबले कम ही है.

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