मिडिल ईस्ट में जंग जारी है. ईरान और इजरायल एक-दूसरे लगातार हमले कर रहे हैं. मिसाइलें और ड्रोन्स से हमले किए जा रहे हैं. ऐसे में एक सीक्रेट मैसेज सामने आया है, जब ईरान पर हमले से पहले यूएस अधिकारी ने 50 हजार अमेरिकी सैनिकों को भेजा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर सी. बी. कूपर II ने 28 फरवरी 2026 को मिडिल ईस्ट में तैनात करीब 50 हजार अमेरिकी सैनिकों को बड़ा मैसेज भेजा था. इसमें कहा गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर सेना ने अब ईरान के खिलाफ 'सक्रिय युद्ध' (Active Combat) में प्रवेश कर लिया है. जनरल कूपर ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि तैयारी का समय खत्म हो गया है और अब कार्रवाई का वक्त आ चुका है.
इसमें यह भी कहा गया कि मौजूदा मिशन 1979 से अमेरिकियों को निशाना बना रहे ईरानी शासन के जवाब में शुरू किया गया है.
मैसेज में कहा गया कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली लड़ाकू सेना के रूप में अमेरिकी सैनिक आज से इतिहास की दिशा बदलने के मिशन पर निकल पड़े हैं.
सैनिकों के लिए 'रिलेसंटलेस लेथल' होने का मंत्र
जनरल कूपर ने अपने सैनिकों को जंग के मैदान के लिए तीन मुख्य निर्देश दिए थे. उन्होंने कहा कि सैनिकों को संघर्ष के दौरान 'बेरहम और घातक' होना होगा, लेकिन साथ ही अपने आचरण को पेशेवर बनाए रखना होगा. उन्होंने सैनिकों को एक-दूसरे का 'गार्जियन एंजेल' बनने और टीम के साथियों का ख्याल रखने की सलाह दी. युद्ध के दौरान होने वाले शोर और भ्रम के बीच सैनिकों को अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा रखने और अपने संकल्प को अडिग बनाए रखने को कहा गया.
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इतिहास बदलने का संकल्प
अपने मैसेज में जनरल कूपर ने ईरान के शासन पर 1979 से अब तक हजारों अमेरिकियों को हताहत करने और लगातार खतरों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. उन्होंने सैनिकों से कहा कि वे 'स्वतंत्र दुनिया की ढाल' और उसके 'सबसे तेज तलवार' हैं. जनरल ने भरोसा जताया कि सैनिकों के साहस और दृढ़ संकल्प से आज मानवीय इतिहास का रुख बदल जाएगा. संदेश के अंत में उन्होंने पूरी दुनिया की नजरें सेना पर होने की बात कहते हुए सैनिकों को सुरक्षित रहने और 'गॉडस्पीड' की शुभकामना दी.