मिस्र की स्वेज नहर से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या अप्रैल में करीब एक-तिहाई (28%) बढ़ गई है. इससे नहर से होने वाली कमाई 2024 की शुरुआत के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. इसकी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद ऊर्जा सप्लाई के लिए लाल सागर वाले वैकल्पिक रास्ते का ज्यादा इस्तेमाल होना माना जा रहा है.
मिस्र की सरकारी सांख्यिकी एजेंसी CAPMAS के अनुसार, अप्रैल में कुल 529 तेल टैंकर स्वेज नहर से गुजरे, जो एक साल पहले की तुलना में 28% अधिक हैं. वहीं, सभी प्रकार के जहाजों की संख्या बढ़कर 1,182 हो गई, जो अप्रैल 2025 के मुकाबले 14% ज्यादा है.
दो साल से अधिक समय पहले यमन के हूती विद्रोहियों के लाल सागर में जहाजों पर हमले शुरू होने के बाद स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई थी. लेकिन मिस्र के हालिया आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका-इजरायल के ईरान के साथ युद्ध ने स्वेज नहर को काफी फायदा पहुंचाया है.
दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आवाजाही जिस होर्मुज स्ट्रेट से होती थी, वो ईरान संघर्ष शुरू होने के कुछ समय बाद से प्रभावी रूप से बंद हो गया. इसके बाद कई देशों ने वैकल्पिक रास्ते तलाशने शुरू कर दिए.
सऊदी अरब ने भी एक्टिव किया अपनी बैकअप पाइपलाइन
दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब ने भी अपनी बैकअप पाइपलाइन को सक्रिय कर दिया, जिससे कच्चे तेल को लाल सागर के यानबू (Yanbu) बंदरगाह तक पहुंचाया जा रहा है और वहां से जहाजों के जरिए विदेश भेजा जा रहा है.
हालांकि, कई जहाज यमन और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से होकर दक्षिण की ओर गए, लेकिन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कुछ जहाज मिस्र के रास्ते उत्तर की ओर भी गए. खाड़ी के अन्य देशों ने भी आयात के लिए सऊदी अरब के जेद्दा जैसे बंदरगाहों और अरब प्रायद्वीप के सड़क मार्गों का इस्तेमाल किया.
निवेश बैंक EFG Hermes के मुख्य मैक्रोइकॉनॉमिक विश्लेषक मोहम्मद अबू बाशा के अनुसार, हालिया क्षेत्रीय संघर्ष का सबसे ज्यादा फायदा स्वेज नहर को हुआ है.
अप्रैल में स्वेज नहर से होने वाली आय 41.9 करोड़ डॉलर रही, जो एक साल पहले की तुलना में 27% अधिक है. यह 2024 की शुरुआत के बाद एक महीने में होने वाली सबसे बड़ी कमाई है. स्वेज नहर से होने वाली कमाई मिस्र की विदेशी मुद्रा आय का एक अहम स्रोत है.
अबू बाशा के मुताबिक, जेद्दा बंदरगाह केवल सऊदी अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि पूरे गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के लिए जीवनरेखा साबित हुआ है. उनका मानना है कि माल की बदली हुई शिपिंग व्यवस्था का अच्छा असर आने वाले महीनों में स्वेज नहर की आय में और दिखाई दे सकता है.
हालांकि 2023 के अंत में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर दबाव बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था. इससे जहाजों ने लाल सागर का रास्ता छोड़ना शुरू कर दिया और स्वेज नहर का यातायात तेजी से घट गया.
आवाजाही बढ़ी लेकिन फिर भी पहले की तुलना में स्वेज नहर से कमाई कम
मिस्र के अधिकारियों का अनुमान है कि इस रुकावट के कारण देश को अब तक कम से कम 9 अरब डॉलर की संभावित आय का नुकसान हुआ है. अब स्वेज नहर में जहाजों की आवाजाही बढ़ी है लेकिन इसके बावजूद, नहर से गुजरने वाले जहाजों और उससे होने वाली आय का स्तर अभी भी गाजा युद्ध से पहले के स्तर से काफी नीचे है. अप्रैल 2023 में लगभग 2,300 जहाज स्वेज नहर से गुजरे थे.
पिछले साल युद्धविराम लागू होने के बाद हूती विद्रोहियों ने अपने हमले रोक दिए थे और मिस्र को उम्मीद थी कि नहर का सामान्य यातायात धीरे-धीरे बहाल होगा. लेकिन ईरान से जुड़े नए क्षेत्रीय संघर्ष की वजह से मामला और बिगड़ गया.
हूतियों ने सोमवार को लाल सागर में इजरायली जहाजों पर 'पूर्ण प्रतिबंध' की घोषणा की. हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि वो किन जहाजों को इजरायली मानेंगे और इससे समुद्री जहाजों को कितना खतरा होगा.
अबू बाशा का कहना है कि अगर स्वेज नहर की आय दोबारा अपने ऐतिहासिक स्तर पर लौटती है, तो यह मिस्र की अर्थव्यवस्था के लिए हाल की सबसे अच्छी खबर हो सकती है. इससे मिस्र के चालू खाते के घाटे में 25% से 30% तक की कमी आ सकती है. हालांकि यह काफी हद तक युद्ध के बाद बनने वाले भू-राजनीतिक माहौल पर निर्भर करेगा.