अमेरिका ने NATO के अपने कुछ सहयोगी देशों को रूस के खिलाफ बयानबाजी कम करने की सलाह दी है. अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के अधिकारियों ने लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया समेत कई देशों से कहा है कि वे रूस के खतरे को लेकर सार्वजनिक रूप से बोलते समय संयम बरतें. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से जुड़े चार लोगों ने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यूरोपीय नेताओं के कुछ बयान महाद्वीप की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं हैं.
यह संदेश अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों में दिया गया. हालांकि, यह साफ नहीं है कि बाल्टिक देशों के अलावा किन यूरोपीय सरकारों तक यह बात पहुंचाई गई. पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी भी यह संदेश देने वाले अमेरिकी अधिकारियों में शामिल थे. वह यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की समीक्षा से जुड़े अहम अधिकारी हैं.
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'रूस को उकसाने वाली बयानबाजी से बचें'
रिपोर्ट के मुताबिक, कोल्बी ने हाल ही में बाल्टिक देशों के एक अधिकारी से कहा कि रूस को उकसाने वाली बयानबाजी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यूरोपीय नेताओं के उन बयानों का उदाहरण दिया, जिनमें कहा गया था कि रूस यूक्रेन में जंग के दौरान घिर गया है और अब हताश होकर कदम उठा रहा है. एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिहाल ने सितंबर के आखिर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तुलना कोने में फंसे चूहे से की थी.
एक यूरोपीय अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी संदेश का मतलब था कि अमेरिका यूरोप की मदद कर रहा है, लेकिन सहयोगी देशों को ज्यादा शोर नहीं मचाना चाहिए. पेंटागन ने एस्टोनिया के एक प्रतिनिधिमंडल से भी अपनी सार्वजनिक बयानबाजी में संतुलन रखने को कहा था.
यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका की नई रणनीति
यह सलाह ऐसे समय आई है जब ट्रंप प्रशासन यूक्रेन जंग खत्म कराने के लिए बातचीत की कोशिश कर रहा है. इस कोशिश में रूस को प्रतिबंधों में राहत देने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है, वहीं यूक्रेन पर रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव भी है.
NATO के भीतर इस बात पर मतभेद हैं कि रूस के खतरे को सार्वजनिक रूप से किस तरह पेश किया जाए. कुछ अधिकारियों का मानना है कि रूस को लेकर लगातार चेतावनी देने से मॉस्को को डर फैलाने का मौका मिलता है. वहीं दूसरे अधिकारियों का कहना है कि यूरोपीय जनता को खतरे की जानकारी देना जरूरी है, ताकि वे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी खर्च और प्रयासों को समझ सकें.
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इस बीच यूरोप में संदिग्ध तोड़फोड़ की घटनाओं को लेकर भी चिंता बढ़ी है. जर्मनी में हाल ही में दो बेलारूसी नागरिकों को अहम ठिकानों में आग लगाने की कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया. जर्मनी ने सितंबर में लीपजिग/हाले एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की कोशिश के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया था, हालांकि मॉस्को ने इन आरोपों से इनकार किया है.