अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 24 घंटे में दो नाटो सहयोगियों ने झटका दिया है. इटली के बाद अब पोलैंड ने भी ईरान युद्ध से दूरी बना ली है. पोलैंड ने साफ कर दिया है कि वह अपने पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को मिडिल ईस्ट नहीं भेजेगा. उसने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और अपने संसाधनों को देश और नाटो की रक्षा के लिए ही केंद्रित रखेगा.
देश के उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिस ने कहा कि पोलैंड की प्राथमिकता अपनी खुद की सुरक्षा और नाटो के ईस्ट फ्रंटियर की रक्षा करना है. पोलिश अखबार Rzeczpospolita ने रिपोर्ट किया था कि अमेरिका ने पोलैंड से मिडिल ईस्ट में एक पैट्रियट बैटरी तैनात करने की संभावना पर चर्चा की थी. हालांकि, इस रिपोर्ट को पोलैंड के रक्षा मंत्री ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, 'हमारी पैट्रियट बैटरियां और उनका साजो-सामान पोलैंड के एयरस्पेस और नाटो के ईस्ट फ्रंटियर की सुरक्षा के लिए हैं. इसमें कोई बदलाव नहीं हो रहा है और हम इन्हें कहीं और भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं.' इस क्षेत्र में ईरान के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी सुरक्षा बल एक्शन में हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सहयोगी देश इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि पोलैंड के लिए अपनी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
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पोलैंड के पास फिलहाल दो पैट्रियट बैटरियां हैं, जो 2025 के अंत तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो चुकी हैं. अमेरिकी निर्मित एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलों और विमानों को लगभग 100 किलोमीटर तक की दूरी पर मार गिराने में सक्षम हैं और नाटो के ईस्टर्न फ्रंट की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं. पोलिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अमेरिका की ओर से किसी तरह का दबाव नहीं डाला गया है.
वहीं, प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क पहले ही कह चुके हैं कि पोलैंड ईरान से जुड़े किसी भी सैन्य अभियान में अपने सैनिक नहीं भेजेगा. इससे पहले इटली ने मिडिल ईस्ट की ओर जा रहे एक अमेरिकी विमान को सिसली के सिगोनेला एयर बेस पर उतरने की इजाजत नहीं दी. इटली के प्रमुख अखबार 'कोरिएरे डेला सेरा' की रिपोर्ट के मुताबिक जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली सरकार ने ईरान जंग से खुद को दूर रखने के लिए यह कदम उठाया है.