इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद ऐतिहासिक किस्सा साझा किया है, जिसमें उन्होंने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू की तारीफ करने के साथ ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के साहसिक योगदान को याद किया. दरअसल, नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं. अपने भाषण में उन्होंने बताया कि दोनों देशों के मजबूत रिश्तों की बुनियाद में बीजू पटनायक की भूमिका बेहद अहम रही है. साल 1947 में जब डच सेना ने वहां घेराबंदी की थी, तब जवाहरलाल नेहरू के कहने पर बीजू पटनायक अपनी जान जोखिम में डालकर इंडोनेशिया के बड़े नेताओं को सुरक्षित बचाकर भारत लेकर आए थे.
बीजू पटनायक राजनीति में आने से पहले एक बेहद कुशल पायलट थे. प्रधानमंत्री ने बताया कि 1946 में जब इंडोनेशिया में हालात बिगड़े, तब पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू ने वहां फंसे नेताओं को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी थी. इसी भरोसे के बाद बीजू पटनायक अपनी पत्नी के साथ विमान लेकर युद्धग्रस्त इलाके में पहुंच गए. वहां से उन्होंने इंडोनेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री सुतान शाहरिर के साथ उपराष्ट्रपति मोहम्मद हट्टा को सुरक्षित निकाला, जिसके बाद वे उन्हें लेकर सीधे भारत आ गए. इस साहसिक अभियान का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीजू पटनायक की इस भूमिका ने भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई मजबूती दी.
आजादी की लड़ाई में भारत ने दिया खुलकर साथ
दोनों देशों के इतिहास पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत-इंडोनेशिया लगभग एक ही समय आजाद हुए थे. इंडोनेशिया को 1945 में आजादी मिली, जबकि भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ. दिलचस्प बात यह है कि जब इंडोनेशिया अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में उसकी स्वतंत्रता का खुलकर समर्थन किया था. यही वजह है कि दोनों देशों के रिश्ते शुरू से ही भरोसे पर टिके हुए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत-इंडोनेशिया आज विकास, व्यापार के साथ रणनीतिक साझेदारी के नए दौर में आगे बढ़ रहे हैं. इसी के साथ उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध और भी मजबूत होंगे. दरअसल, उन्होंने बीजू पटनायक के इस ऐतिहासिक योगदान को दोनों देशों की दोस्ती का सबसे अहम अध्याय बताया.