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EVM पर डील, सबांग पोर्ट पर बात.. भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे में दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए हैं. इनमें कुछ ऐसे फैसले भी शामिल हैं, जिन्हें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत करने वाला माना जा रहा है. जानिए इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियां क्या रहीं.

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जकार्ता के मर्डेका पैलेस में पीएम नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (Photo: PTI)
जकार्ता के मर्डेका पैलेस में पीएम नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (Photo: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे से वैश्विक कूटनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया. भारत और इंडोनेशिया के बीच कुल 20 ऐतिहासिक समझौते हुए हैं, जो सीधे तौर पर रक्षा, समुद्री व्यापार और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हैं. इस अहम दौरे में इंडोनेशिया ने भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का फैसला किया है, जिससे दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दबदबे पर लगाम लगेगी. इसके साथ ही, इंडोनेशिया ने भारतीय चुनाव प्रणाली पर भरोसा जताते हुए अपने देश में भारत के सहयोग से ईवीएम बनाने के लिए भी हाथ मिलाया है. इस पूरे घटनाक्रम ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति को बेहद मजबूत कर दिया है.

अगर रक्षा क्षेत्र की बात करें तो इस मोर्चे पर सबसे असरदार फैसला हुआ है. इंडोनेशिया ने अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम का समझौता किया है. दरअसल, इंडोनेशिया हजारों द्वीपों से घिरा देश है, इसलिए उसके लिए अपनी तटीय सीमा की रक्षा करना बेहद जरूरी हो जाता है. इससे पहले फिलीपींस भी भारत से यह मिसाइल खरीद चुका है, जबकि वियतनाम के साथ भी बातचीत चल रही है. इस तरह ये सभी देश मिलकर दक्षिण चीन सागर के आसपास एक ऐसा सुरक्षा त्रिकोण (ट्रायंगल) बना रहे हैं, जो इस इलाके में चीन के बढ़ते दबाव को काफी हद तक कम कर देगा.

सबांग पोर्ट से चीन की घेराबंदी

मिसाइल सौदे से भी आगे बढ़कर दोनों देशों ने सबांग पोर्ट को मिलकर विकसित करने का एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. यह बंदरगाह मलक्का स्ट्रेट (Strait of Malacca) के मुहाने पर स्थित है, जहां से चीन अपना 60 प्रतिशत से ज्यादा समुद्री व्यापार और 80 प्रतिशत कच्चा तेल मंगवाता है. कूटनीति की भाषा में इसे चीन का 'मलक्का डिलेमा' यानी सबसे कमजोर नस कहा जाता है. इस रणनीतिक बंदरगाह से भारत के निकोबार प्रोजेक्ट की दूरी महज 160 किलोमीटर है. यहां भारत की मौजूदगी बढ़ने का सीधा मतलब है कि मलक्का स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते के एंट्री पॉइंट पर भारत का प्रभावी नियंत्रण और मजबूत हो जाएगा.

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वैसे, यह बदलाव सिर्फ मिसाइलों तक सीमित नहीं है, क्योंकि इंडोनेशिया अब भारत में ही बनी हवा से हवा में मार करने वाली 'अस्त्र मिसाइल' भी भारत ले रहा है. कुछ साल पहले तक दुनिया में भारत की छवि सिर्फ हथियार खरीदने वाले देश की थी, लेकिन अब यह पूरी तरह बदल चुकी है. आज भारत दुनिया के 80 से ज्यादा देशों को अपनी रक्षा तकनीक के साथ हथियार बेच रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश का रक्षा निर्यात अब बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो साल 2013-14 के मुकाबले करीब 5,500 प्रतिशत ज्यादा की बड़ी छलांग है.

भारतीय ईवीएम तकनीक का मुरीद हुआ इंडोनेशिया

भारत में भले ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर घरेलू राजनीति में विवाद होते रहे हों, लेकिन इंडोनेशिया भारत के चुनाव प्रबंधन का कायल हो गया है. वहां के चुनाव आयोग के साथ हुए समझौते के तहत वे भारतीय अनुभव, तकनीकी मदद से अपने देश के लिए ईवीएम तैयार करेंगे. सिर्फ इंडोनेशिया ही नहीं, बल्कि दुनिया के 28 देश भारत के साथ चुनावी प्रबंधन को लेकर करार कर चुके हैं. इसके अलावा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने खुले तौर पर माना कि वे भारतीय विकास योजनाओं से बेहद प्रभावित हैं, जिन्हें वे अपने यहां भी लागू कर रहे हैं.

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सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे गए पीएम मोदी

इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सबसे बड़े राजकीय सम्मान 'Bintang Adipurna' (बिंटांग आदिपूर्णा) से सम्मानित किया है. इसका आसान शब्दों में मतलब होता है "सर्वोच्च सम्मान का सितारा". कुछ सोशल मीडिया दावों के उलट, इस पुरस्कार की स्थापना साल 1959 में हुई थी. नरेंद्र मोदी यह सम्मान पाने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री हैं. उनसे पहले साल 1995 में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को मरणोपरांत इस सम्मान से नवाजा गया था.
 

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