शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने अगले सप्ताह नागपुर में (जहां संघ का मुख्यालय है) 'राम रक्षा' आंदोलन करने की घोषणा की. इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
के राजनीतिक गढ़ में सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.
उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को मुंबई स्थित अपने आवास 'मातोश्री' में पार्टी के विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन की चिंगारी कभी मातोश्री से उठी थी और अब राम मंदिर के नाम पर हुए कथित धन घोटाले के खिलाफ जनआक्रोश की शुरुआत भी यहीं से होगी.
उन्होंने पार्टी विधायकों को निर्देश दिया कि वे पूरे महाराष्ट्र में इस मुद्दे को लेकर सक्रिय रूप से प्रदर्शन करें और जनता के बीच जाएं. ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं, इसलिए शिवसेना (यूबीटी) को भी मजबूती से अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए.
बैठक में ठाकरे ने एसआईआर की प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान देने को कहा. उन्होंने पार्टी नेताओं से इस मुद्दे पर नजर बनाए रखने और भविष्य की चुनावी तैयारियां तेज करने को कहा. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके बावजूद संगठन को चुनावी नजरिये से तैयार रहना होगा.
संगठन को मजबूत बनाने के लिए उद्धव ठाकरे ने जिला स्तर पर पार्टी ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत दिया. उन्होंने स्थानीय नेताओं को नई जिम्मेदारियां देने और संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय करने की योजना का ऐलान किया.
इसके साथ ही उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि पार्टी छोड़ चुके बागी नेताओं और उनके समर्थकों के कारण खाली हुए सभी संगठनात्मक पदों को जल्द से जल्द भरा जाए. उनका कहना था कि मजबूत संगठन ही आगामी राजनीतिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगा.
उद्धव ठाकरे का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में राम मंदिर चंदा घोटाले के आरोपों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है. ऐसे में नागपुर में प्रस्तावित 'राम रक्षा' आंदोलन को राज्य की राजनीति में एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.