
पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद में हुए आतंकी हमले में अब तक 101 लोगों की मौत हो चुकी हैं. पुलिस का दावा है कि इस मामले में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां की गई हैं. इन सबके बीच पाकिस्तान के पूर्व मेजर और इमरान खान के समर्थक आदिल रजा ने बड़ा दावा किया है. आदिल रजा ने दावा किया कि पाकिस्तान की आर्मी ने ही पेशावर की मस्जिद में धमाका कराया.
आदिल रजा ने कहा कि ये हमला कराकर पाक आर्मी चुनाव में देरी कराना चाहती है. आदिल रजा ने वीडियो जारी कर कहा, ''सेना में मेरे सूत्रों यानी फौजी अफसरों का कहना है कि ये तरीका जो हमें बताया जाता है, वही पेशावर में इस्तेमाल किया गया है. अपने ही एजेंसी ने किस तरह से धमाका कराया है और फायदा उठाया है. फायदा ये है कि चुनाव में देरी करानी है. इससे पहले ये लोग सत्ता में बैठे थे, पहले भी ऐसा कराते रहे हैं. सेना में सूत्रों ने बताया कि स्टाफ कॉलेज में इस तरह के ऑपरेशन को पढ़ाया जाता है, लेकिन इनका इस्तेमाल दुश्मन मुल्क पर किया जाता है. ये पढ़ाया जाता है कि कैसे दुश्मन मुल्क में ऐसे ऑपरेशन्स करके सियासी फायदा उठाना है.''
supporter Adil Raja : Reliable sources tell me that Pakistan army staged the suicide attack in to delay the elections. KP province is being punished because honorable Pathans love . Enemies call as "the party of Pathans".
— SAMRI (@SAMRIReports)
59 लोगों का इलाज जारी
पेशावर में सोमवार को पुलिस मुख्यालय में स्थित मस्जिद में आत्मघाती हमला हुआ था. ये इलाका काफी सुरक्षित माना जाता है. जिस वक्त मस्जिद में ये धमाका हुआ था, उस वक्त 300-400 पुलिसकर्मी मस्जिद में नमाज के लिए मौजूद थे. हमलावर भी मस्जिद में ही मौजूद था. तभी धमाका हुआ और मस्जिद की दीवारें और छत गिर गई. इसके नीचे तमाम लोग दब गए. अब तक 101 लोगों की मौत हो चुकी है. 59 लोगों का अस्पताल में इलाज जारी है.

शुरुआती तौर पर तहरीर ए तालिबान (पाकिस्तान तालिबान) ने हमले की जिम्मेदारी ली थी. हालांकि, बाद में पाकिस्तान तालिबान ने इससे इंकार कर दिया. माना जा रहा है कि TTP के स्थानीय संगठन का हमले में हाथ हो सकता है. पुलिस ने बताया कि हमले की जांच के लिए दो टीमों का गठन किया गया है.
पुलिस के मुताबिक, कुछ लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इस हमले में करीब 10-12 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ है. इसके चलते मस्जिद की छत और दीवारें गिर गईं. ये विस्फोटक थोड़ा थोड़ा करके मस्जिद में इकट्ठा किया गया था, ताकि सुरक्षा चेक के दौरान यह पकड़ में न आए.