सऊदी अरब की तेल कंपनी सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच चल रहा युद्ध अगर लंबा खिंचता है तो इससे वैश्विक तेल बाजार पर 'विनाशकारी असर' पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि कंपनी ग्राहकों की मांग पूरी करने की कोशिश कर रही है, लेकिन युद्ध और उससे पैदा हुई सप्लाई की दिक्कतों की वजह से दुनिया भर में तेल का भंडार पिछले पांच साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.
नासिर के मुताबिक, मौजूदा भू-राजनीतिक संकट के बीच अगर तेल सप्लाई में रुकावट लंबे समय तक जारी रहती है तो भंडार और तेजी से घटेगा. उनका कहना है कि ऐसा होने पर न सिर्फ ग्लोबल ऑयल मार्केट पर गंभीर असर पड़ेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान हो सकता है.
उन्होंने खास तौर पर होर्मुज की खाड़ी के महत्व पर जोर दिया. ये दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जिसके जरिए वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है. नासिर ने कहा कि अतिरिक्त तेल उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में मौजूद है, इसलिए होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू होना बेहद जरूरी है.
इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज की खाड़ी को बंद करने का फैसला किया था जिससे एनर्जी की सप्लाई बाधित हुई है और दुनिया भर में तेल की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है.
अरामको ने घटाया तेल उत्पादन, सप्लाई के दूसरे तरीके ढूंढ रहा
दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब की तेल कंपनी सऊदी अरामको अपने दो प्रमुख तेल क्षेत्रों में उत्पादन पहले ही कम करना शुरू कर चुका है, हालांकि कटौती कितनी है और किन क्षेत्रों में की गई है, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.
होर्मुज की खाड़ी बंद होने से अरामको का तेल निर्यात बहुत अधिक प्रभावित हुआ है क्योंकि इसी रास्ते के जरिए तेल भारत जैसे एशियाई देशों को पहुंचता है. अरामको अपने कुछ कच्चे तेल के जहाजों को यान्बू बंदरगाह की तरफ मोड़ रहा है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज के जरिए जितना तेल सप्लाई होता है, यह मात्रा उसकी भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है.
खाड़ी के कई देशों ने कम किया तेल उत्पादन
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जंग शुरू हुई. जंग के शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में कई देशों का तेल उत्पादन प्रभावित हुआ है.
कुवैत, कतर और इराक जैसे देशों ने भी उत्पादन कम कर दिया है या तेल शिपमेंट पर 'फोर्स मेज्योर' घोषित कर दिया है. फोर्स मेज्योर एक कानूनी शब्द है जिसका मतलब होता है ऐसी असाधारण और अनियंत्रित परिस्थितियां, जिनकी वजह से कोई कंपनी या पक्ष अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें पूरी नहीं कर पाता.
ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से होर्मुज की खाड़ी के आसपास के देशों में तेल और गैस उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है. आम तौर पर इस रास्ते से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई होती है.
स्थिति को देखते हुए कतर की तेल और गैस कंपनी कतर एनर्जी ने अपने रास लफ्फान सेंटर पर एलएनजी उत्पादन रोक दिया है. वहीं, इराक का तेल उत्पादन लगभग 70 प्रतिशत तक गिर गया है. बहरीन की पेट्रोलियम कंपनी Bapco ने भी अपने तेल शिपमेंट पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है.
इन घटनाओं के चलते तेल की कीमतें 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. इस हफ्ते ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. हालांकि बाद में कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन क्षेत्र में जारी संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव बढ़ा दिया है. इस वजह से ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं.