तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक सैयद मोहम्मद मरांडी ने मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच बड़ा दावा किया है. उन्होंने आजतक से बातचीत में साफ कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत नहीं चल रही है. ट्रंप ने एक दिन पहले कहा था कि ईरान के साथ बहुत सकारात्मक बातचीत चल रही है और घोषणा की थी कि अमेरिका अगले 10 दिनों तक हमले नहीं करेगा. प्रोफेसर मरांडी ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने मिलकर ईरान के खिलाफ रणनीतिक साजिश रची है.
प्रोफेसर मरांडी ने कहा कि 'पत्र भेजना या संदेश देना बातचीत नहीं होता. हमें अमेरिकी नेताओं की ओर से संदेश मिलते रहते हैं, लेकिन यह किसी औपचारिक वार्ता का हिस्सा नहीं है.' उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा हालात में कोई कूटनीतिक बातचीत नहीं हो रही और जमीनी परिस्थितियों में बदलाव के बिना वार्ता संभव नहीं है. सैयद मोहम्मद मरांडी ने यह भी दावा किया कि वर्तमान परिदृश्य में ट्रंप पूरी तरह नियंत्रण में नहीं दिखते, बल्कि इजरायल की नीतियां अधिक प्रभावी नजर आ रही हैं.
फैसले वॉशिंगटन में नहीं तेल अवीव में लिए जा रहे
मरांडी ने कहा, 'ऐसा लगता है कि फैसले वॉशिंगटन में नहीं बल्कि तेल अवीव में लिए जा रहे हैं. उन्हें वैश्विक अर्थव्यवस्था या भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर असर की चिंता नहीं है.' इस युद्ध का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की जनता पहले ही दबाव महसूस कर रहे हैं और युद्ध का असर वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिख रहा है. प्रोफेसर सैयद मोहम्मद मरांडी ने कहा कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो इसका असर व्यापक आर्थिक अस्थिरता के रूप में सामने आ सकता है.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीनी हमला करता है, तो यह एक गंभीर रणनीतिक भूल होगी. प्रोफेसर मरांडी ने कहा, '9/11 के बाद से ही ईरान को ऐसे हमले की आशंका थी और उसने लंबे समय से अपनी तैयारी की है. किसी भी जमीनी आक्रमण में अमेरिका को सफलता नहीं मिलेगी.' उन्होंने इस संघर्ष को 'प्राचीन सभ्यता के अस्तित्व की लड़ाई' करार देते हुए कहा कि ईरान तब तक संघर्ष जारी रखेगा, जब तक अमेरिका फारस की खाड़ी का इस्तेमाल सैन्य हमलों या बेस के रूप में करना नहीं छोड़ता.
ईरान अपने नुकसान के लिए करेगा हर्जाने की मांग
ईरानी प्रोफेसर ने यह भी कहा कि अमेरिका, इजरायल और उसके सहयोगियों द्वारा तेहरान को पहुंचाए गए नुकसान के लिए भविष्य में हर्जाने की मांग की जाएगी, हालांकि अभी युद्ध जारी होने के कारण इसकी राशि का आकलन संभव नहीं है. मरांडी के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के उन ठिकानों को निशाना बनाया है जहां अमेरिकी हित जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर करीबी नजर रखी जा रही है और बहुत कम जहाज इस रास्ते से गुजर पा रहे हैं.
ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को संभवतः सही जानकारी नहीं मिल रही और वह इजरायल समर्थक सलाहकारों से घिरे हुए हैं. प्रोफसर सैयद मोहम्मद मरांडी के मुताबिक, 'ट्रंप बाजारों को शांत रखने और समय खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अंततः यह रणनीति सफल नहीं होगी.' उन्होंने दोहराया कि ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया और न ही वह इसे चाहता था, लेकिन मौजूदा हालात में वह पीछे हटने को तैयार नहीं है. अमेरिका के लिए यह एक सामान्य युद्ध हो सकता है, लेकिन ईरान के लिए यह अस्तित्व का सवाल है.