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'दुश्मन के साथ युद्ध या बातचीत...', ईरानी संसद के स्पीकर गलिबाफ की राष्ट्र से अपील

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि देश की जनता को सुप्रीम लीडर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहना होगा. हमें दुश्मन की सैन्य गतिविधियों से डरना नहीं होगा. ईरान के  लिए आगे की राह मुश्किल है लेकिन हमें एकजुट रहना होगा. 

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ईरानी संसद के स्पीकर गलिबाफ ने देश की जनता को संबोधित किया. (Photo: AFP)
ईरानी संसद के स्पीकर गलिबाफ ने देश की जनता को संबोधित किया. (Photo: AFP)

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने अमेरिका के साथ युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है. गलिबाफ का कहना है कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों के अनुसार ही युद्ध और कूटनीति की दिशा तय की जाएगी.

ईरानी संसद गलिबाफ ने कहा कि दुश्मन के साथ युद्ध करना है या उसे बातचीत की मेज पर लाना है. यह तय करने का अधिकार सुप्रीम लीडर का है. 

उन्होंने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि देश की जनता को सुप्रीम लीडर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहना होगा. हमें दुश्मन की सैन्य गतिविधियों से डरना नहीं होगा. ईरान के लिए आगे की राह मुश्किल है लेकिन हमें एकजुट रहना होगा. 

उन्होंने कहा कि इस युद्ध में और मौजूदा गंभीर परिस्थितियों में राष्ट्र की जीत और उसके अधिकारों की रक्षा का रास्ता यही है कि नेतृत्व के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए. प्रतिरोध, विवेकपूर्ण सोच और सभी रक्षा एवं कूटनीतिक क्षमताओं के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग पर आधारित एक स्पष्ट रणनीति के अनुसार आगे बढ़ा जाए ताकि दुश्मन पर अपनी इच्छा थोपते हुए युद्ध के आर्थिक प्रभावों को जनता पर न्यूनतम रखा जा सके.

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गलिबाफ का कहना है कि युद्ध करना है या दुश्मन के साथ बातचीत करनी है, इसका फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के आधार पर किया जाता है. इन दोनों विकल्पों युद्ध और कूटनीति का कब और कैसे उपयोग होगा. इसका फैसला समय और परिस्थितियों के अनुरूप सुप्रीम लीडर और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर करते हैं.

उन्होंने कहा कि हम सभी का कर्तव्य है कि सर्वोच्च नेता जो जिम्मेदारी सौंपें, उसके अनुसार युद्ध, कूटनीति या दोनों के माध्यम से अपने दायित्व का निर्वहन करें. इसी आधार पर मैं ईरान की जनता से, उनके विचारों और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर अपील करता हूं कि वे इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के आदेशों का पालन करते हुए एकजुट रहें, मैदान में डटे रहें और अपनी इस एकता व उपस्थिति का स्पष्ट संदेश दुश्मनों तक पहुंचाएं.

उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे सामने एक कठिन रास्ता है. दुश्मन पहले भी हमें नौसैनिक ताकत, हवाई हमलों, जमीनी हमलों और अन्य सैन्य कार्रवाइयों की धमकियां दे चुका है लेकिन वह उनके परिणाम भी देख चुका है इसलिए हमें उसकी धमकियों से भयभीत नहीं होना चाहिए.

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