डेमोक्रेट सीनेटर जॉन ओसॉफ 2021 में जब जॉर्जिया से पहली बार अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए तो राजनीतिक विशेषज्ञों ने उन्हें "एक्सीडेंटल सीनेटर" कहा. उस समय वे 33 साल के थे और बहुत ही कम अंतर से जीते थे. पांच साल बाद ओसॉफ़ ने उस राज्य में अपनी सीट बरकरार रखी, जहां 2024 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जीत हुई थी. इस निर्णायक जीत ने ओसॉफ़ को पार्टी के सबसे चर्चित उभरते सितारों में से एक बना दिया है. साथ ही इससे 2028 में उनके राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की चर्चाओं को भी हवा मिल गई है. खास बात यह है कि जॉन ओसॉफ की तुलना बराक ओबामा से की जाती है.
हालांकि 39 साल के ओसॉफ़ ने पहले ही साफ कर दिया था कि उन्हें राष्ट्रपति चुनाव लड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन जॉर्जिया में उनकी जीत डेमोक्रेटिक पार्टी में उनकी स्थिति को और मजबूत करती है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है. यहूदी मूल के ओसॉफ ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं, उनकी यह जीत कोई छोटी उपलब्धि नहीं है.
जॉन ओसॉफ़ की जीत क्यों मायने रखती है?
ओसॉफ़ शायद इस साल फिर से चुनाव लड़ रहे सीनेट के उन डेमोक्रेट्स में से थे, जिनकी सीट सबसे ज़्यादा खतरे में थी. यह प्रभावशाली और करिश्माई नेता मिडटर्म चुनावों में एकमात्र ऐसे डेमोक्रेट थे, जो एक ऐसे राज्य में अपनी सीनेट सीट बचाने की कोशिश कर रहे थे, जहां 2024 में ट्रंप जीते थे. सीनेट पर नियंत्रण हासिल करने की पार्टी की उम्मीदों के लिए उनकी सीट बचाए रखना बहुत ज़रूरी था. जॉर्जिया के मतदाताओं ने निराश नहीं किया.
कई लोग उनके जबरदस्त चुनाव प्रचार और भाषण देने की कला की तारीफ़ करते हैं, जिसकी वजह से उनकी तुलना ओबामा से की जाने लगी है. यह इस बात का सबसे स्पष्ट संकेत है कि अमेरिकी राजनीति में ओसॉफ ने कितना लंबा सफर तय किया है. 10 साल से भी कम समय में वे ब्रिटेन की एक खोजी डॉक्युमेंट्री बनाने वाली कंपनी में काम करने से लेकर आज भविष्य के राष्ट्रपति के रूप में चर्चा में आ गए हैं.
मिडटर्म चुनावों से पहले, ओसॉफ़ ने एक आक्रामक प्रचार अभियान चलाया. इसमें ट्रंप की तीखी आलोचना करने वाले उनके बयान काफी वायरल हुए. उन्होंने राष्ट्रपति और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि उनके प्रशासन से लोकतंत्र को खतरा है. उनके द्वारा ट्रंप और उनके सहयोगियों को "एपस्टीन क्लास" और "मार-ए-लागो माफिया" कहने वाले वीडियो क्लिप्स पर खूब मीम्स बने.
'द अटलांटिक' के एक लेख में कहा गया है कि 39 साल के ओसॉफ़ ने रिपब्लिकन नेताओं को परेशान करने की कला में महारत हासिल कर ली है, और वह खुद कभी विचलित नहीं होते.
बुधवार रात ओसॉफ़ ने बिल्कुल ऐसा ही किया और ट्रंप की कड़ी आलोचना की.
ट्रंप को "असफल और कमजोर राष्ट्रपति" बताते हुए ओसॉफ़ ने कहा कि अमेरिकी जनता ने इस सनकी रिपब्लिकन नेता की "नैतिक पतन, भ्रष्टाचार और अक्षमता" को खारिज कर दिया है.
अटलांटा में अपनी चुनावी जीत की पार्टी में उन्होंने कहा, "पिछले दो सालों में, हमने फिर से यह साबित किया है कि हमारा काम सिर्फ किसी एक राष्ट्रपति की बुराइयों को रोकना नहीं है, बल्कि समाज में आई दरारों को भरना और उसे ठीक करना भी है."
जॉन ओसॉफ़ कौन हैं?
थॉमस जोनाथन ओसॉफ का जन्म 16 फरवरी, 1987 को अटलांटा में हुआ था. वह एक यहूदी परिवार से आते हैं. उनके पिता रूसी और लिथुआनियाई यहूदी मूल के हैं, जबकि उनकी मां ऑस्ट्रेलिया से हैं. ओसॉफ़ के परिवार का इतिहास काफी दर्दनाक रहा है. उनके दादा-दादी पूर्वी यूरोप में यहूदियों के खिलाफ हुए अत्याचारों से बचकर भाग आए थे. ओसॉफ ने खुद भी कई बार बताया है कि वह ऐसे रिश्तेदारों के बीच पले-बढ़े हैं, जो 'होलोकॉस्ट' यानी कि यहूदियों के नरसंहार से बच गए थे.
राजनीति में उनकी दिलचस्पी बहुत कम उम्र में ही शुरू हो गई थी. 17 साल की उम्र में, नागरिक अधिकार नेता और जॉर्जिया के कांग्रेस सदस्य जॉन लुईस की आत्मकथा पढ़ने के बाद, ओसॉफ़ ने उन्हें एक पत्र लिखकर उनके साथ काम करने का मौका मांगा.
लुईस ने जवाब में उन्हें इंटर्नशिप का प्रस्ताव दिया. दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई और लुईस, ओसॉफ़ के राजनीतिक सफर में उनके मार्गदर्शक (मेंटर) बन गए.
दरअसल ओबामा की राजनीतिक विरासत को आकार देने में भी लुईस ने अहम भूमिका निभाई थी. 1960 के दशक के 'नागरिक अधिकार आंदोलन' (सिविल राइट्स मूवमेंट) में लुईस के नेतृत्व ने युवा ओबामा को 'कम्युनिटी ऑर्गेनाइज़र' बनने के लिए प्रेरित किया. और बाकी तो इतिहास है.
ओसॉफ़ ने 2009 में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और उसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर डिग्री हासिल की. उन्होंने कुछ समय तक जॉर्जिया के कांग्रेस सदस्य हैंक जॉनसन के साथ काम किया, जहां वे विदेश मामलों और रक्षा नीति से जुड़े काम देखते थे.
कुछ समय के लिए उन्होंने खोजी पत्रकारिता और डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का काम भी किया. 2013 में ओसॉफ़ लंदन स्थित 'इनसाइट TWI' (Insight TWI) नाम की एक खोजी फिल्म कंपनी के CEO बने. यह कंपनी भ्रष्टाचार, युद्ध अपराधों और मानव तस्करी जैसी कहानियों पर काम करती थी.
2017 में उन्होंने पूर्णकालिक राजनीति में आने के लिए यह कंपनी छोड़ दी. हालांकि चुनावी राजनीति में उनकी पहली कोशिश असफल रही.
जॉर्जिया के छठे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के लिए हुए एक विशेष चुनाव में ओसॉफ को रिपब्लिकन करेन हैंडेल के हाथों हार का सामना करना पड़ा. हालांकि इससे ओसॉफ विचलित नहीं हुए; उन्होंने 2021 में जॉर्जिया के सीनेटर बनने के लिए फिर से चुनाव लड़ा और एक निर्णायक जीत हासिल की. वे सीनेट में सेवा देने वाले पहले 'मिलेनियल' ने और 1973 के बाद चुने गए सबसे युवा सीनेटर भी बने.
तमाम मुश्किलों के बावजूद दोबारा चुनकर ओसॉफ ने डेमोक्रेटिक पार्टी के उभरते सितारों में से एक के रूप में अपनी जगह और मजबूत कर ली है. उनकी शादी अटलांटा में काम करने वाली प्रसूति विशेषज्ञ डॉ अलीशा क्रेमर से हुई है.
ओसॉफ़ को 'अगला बराक ओबामा' क्यों कहा जाता है?
ओबामा की तरह ही ओसॉफ़ एक बेहतरीन वक्ता हैं और उनकी विचारधारा प्रगतिशील और मध्यमार्गी है. आज के दौर में जब ज़्यादातर नेता उम्रदराज़ हैं, ओसॉफ़ एक युवा विकल्प के रूप में सामने आते हैं. ठीक वैसे ही जैसे 2009 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 47 साल के ओबामा को देखा गया था, जब वे 62 साल के जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे.
उनकी सार्वजनिक छवि और अंदाज़ भी काफी हद तक ओबामा से मिलते-जुलते हैं. अपनी कई रैलियों में ओसॉफ़ अपनी शर्ट की आस्तीनें ऊपर चढ़ाकर भीड़ को संबोधित करते नज़र आते हैं. यह एक ऐसा अंदाज़ है जो अक्सर ओबामा के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान देखने को मिलता था.
अमेरिकी कमेंटेटर और पत्रकार एज़रा क्लेन ने 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के एक लेख में लिखा, "ओसॉफ़ के बोलने के तरीके और खुद को पेश करने के अंदाज़ में एक ऐसी झलक दिखती है, जो बिल्कुल ओबामा जैसी है."
आम जनता भी ऐसा ही मानती है. जॉर्जिया के एक वोटर पैट्रिक गार्वर ने चुनाव से पहले NPR से कहा, "उन्हें देखकर मुझे बिल्कुल वैसी ही भावना आती है, जैसी 20 साल पहले ओबामा को देखकर आती थी."
पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने खुद भी मध्यावधि चुनावों से पहले एक चुनावी रैली के दौरान ओसॉफ़ की तारीफ की. ओबामा ने कहा, "एक ही समझदारी भरा विकल्प है... और वह हैं जॉन ओसॉफ़. ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने अपने और मेरे गुरु, महान नेताओं में से एक, जॉन लुईस से सीखा है कि 'अच्छे मकसद के लिए थोड़ी हलचल पैदा करने' का क्या मतलब होता है."
अगस्त में ओसॉफ़ द्वारा खुद की तुलना ओबामा से करने पर व्हाइट हाउस ने भी उन पर निशाना साधा था. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता डेविस इंगले ने उन्हें "अजीबोगरीब, स्त्री-स्वभाव वाले थिएटर के बच्चे जैसा" बताया, जो "बराक ओबामा की नकल कर रहा है."
यह प्रतिक्रिया ओसोफ द्वारा ट्रंप की सहयोगी नताली हार्प पर की गई विवादित टिप्पणी के जवाब में आई थी. ओसोफ ने कहा था, "राष्ट्रपति बस अपना बॉलरूम बनवाना चाहते हैं और नताली के साथ घूमना-फिरना चाहते हैं." इस बयान से काफी हंगामा मच गया था.
ओसॉफ इतने बेबाक हैं. वे अपनी बात कहने में कोई संकोच नहीं करते.
जॉर्जिया में ओसॉफ की शानदार जीत ने 2028 के राष्ट्रपति चुनावों को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया है. इस युवा और करिश्माई डेमोक्रेट में एक प्रमुख दावेदार बनने के सभी गुण मौजूद हैं. लेकिन यह तभी संभव है जब वे खुद चुनावी मैदान में उतरें.