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होर्मुज से बस एक LPG टैंकर! गल्फ से अचानक रुकेगी गैस की सप्लाई, क्या होगा असर?

ईरान और कतर के बीच जारी युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई अगले 10 दिनों में अचानक रुकने वाली है. खाड़ी से अब केवल एक गैस टैंकर एशिया आने वाला है. इसका सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान पर हो रहा है जो अपना अधिकांश LNG कतर से आयात करता है.

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खाड़ी देशों से जल्द ही गैस की सप्लाई पूरी तरह बंद होने वाली है (File Photo)
खाड़ी देशों से जल्द ही गैस की सप्लाई पूरी तरह बंद होने वाली है (File Photo)

ईरान जंग के बीच दुनिया के देश 'क्लिफ एज' जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं जहां ऊर्जा सप्लाई कभी भी रुक सकती है. अगले 10 दिनों में खाड़ी क्षेत्र से आने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई अचानक रुकने वाली है, जब क्षेत्र से निकलने वाले आखिरी कुछ टैंकर अपने गंतव्य तक पहुंच जाएंगे.

पाकिस्तान खास तौर पर बेहद कमजोर स्थिति में है. देश के दोनों एलएनजी आयात टर्मिनलों ने अपने ऑपरेशन को सामान्य स्तर के एक-छठे तक घटा दिया है और महीने के अंत तक गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर देंगे.

दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा एलएनजी पैदा करने वाले कतर को होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से निर्यात रोकना पड़ा है. ईरान ने खाड़ी के मुहाने पर स्थित होर्मुज स्ट्रेट को युद्ध के शुरुआती दिनों से ही ब्लॉक कर रखा है.

बीते हफ्ते ईरानी मिसाइल हमलों में कतर के विशाल रास लाफान एलएनजी प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे एशिया और यूरोप में गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गईं.

कई देशों को गैस की कमी अब ज्यादा महसूस होने वाली है

हालांकि, स्वतंत्र शिपब्रोकर 'Affinity' के विश्लेषण के मुताबिक, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से लोड होकर कई एलएनजी जहाज युद्ध शुरू होने से पहले ही अपने डेस्टिनेशन की ओर निकल चुके थे. इसका मतलब है कि कुछ ग्राहकों को अब जाकर सप्लाई रुकने का असर महसूस होने वाला है.

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जो देश अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए आयात पर निर्भर हैं, उन्हें अब अमेरिका और अन्य जगहों से एलएनजी हासिल करने के लिए बेहद ऊंची कीमत चुकानी पड़ेगी. या फिर दूसरे ईंधनों की ओर जाना होगा या घरों और उद्योगों को कम गैस इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करना पड़ेगा.

एशिया में तेल और गैस की कमी झेल रहे कई देशों ने पहले ही इसके लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं जैसे हफ्ते में बस चार दिन काम और तीन दिन की छुट्टी रखना.

शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, खाड़ी से अब सिर्फ एक एलएनजी कार्गो एशिया पहुंचने वाला है, जबकि एशिया इस क्षेत्र के करीब 90% उत्पादन का खरीदार है. वहीं यूरोप में अभी छह एलएनजी शिपमेंट पहुंचने बाकी हैं.

पाकिस्तान की हालत और खराब

पाकिस्तान की स्थिति खास तौर पर कमजोर है. पिछले साल पाकिस्तान की लगभग 99% एलएनजी आयात कतर से आई थी. रास लाफान से आने वाले उसके आखिरी कार्गो ईरान युद्ध के दूसरे और तीसरे दिन पहुंचे थे.

स्थिति से जुड़े दो लोगों के अनुसार, देश के दोनों एलएनजी इंपोर्ट टर्मिनलों ने अपनी क्षमता को सामान्य स्तर के एक-छठे तक घटा दिया है और महीने के अंत तक गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो जाएगी.

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पाकिस्तान की सरकारी कंपनी गैसपोर्ट के स्वामित्व वाले इन दोनों टर्मिनलों में से एक टर्मिनल के पास आनेवाले दिनों में प्रोसेस करने के लिए एलएनजी ही नहीं रहेगा. गैसपोर्ट के चेयरमैन और सीईओ इकबाल अहमद ने कहा, 'इसके बाद हमारे पास कुछ नहीं बचेगा. हमें नहीं पता अगला कार्गो कब आएगा.'

पहले लौटाए एलएनजी टैंकर अब पछता रहा पाकिस्तान 

ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमला शुरू होने से पहले पाकिस्तान में एलएनजी की सप्लाई बहुत ज्यादा हो गई थी. इसे देखते हुए पाकिस्तान ने अपने सप्लायर कतर की कंपनी कतरएनर्जी से इस साल आने वाले 24 कार्गो को दूसरी जगह भेजने को कहा था. उसने इटली की Eni कंपनी से भी 11 कार्गो कहीं और बेच देने को कहा था.

मामले से परिचित एक व्यक्ति ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, 'युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान की सरकारी कंपनी पाकिस्तान एलएनजी ने इटली की कंपनी Eni से कहा कि कुछ कार्गो वापस भेज दो लेकिन कंपनी ने पाकिस्तानी कंपनी की बात नहीं मानी.'

पाकिस्तान एलएनजी ने यूरोप, ओमान, अमेरिका, अजरबैजान और अफ्रीका में ट्रेडर्स और सप्लायर्स से भी संपर्क किया, लेकिन सभी ने गैस की इतनी ऊंची कीमत बताई कि पाकिस्तान वहां से खरीद ही नहीं सका.

स्पॉट मार्केट में एलएनजी खरीदना पाकिस्तान के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है. Platts JKM पर एशियाई एलएनजी की कीमतें युद्ध शुरू होने के बाद दोगुनी होकर करीब 23 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) हो गई हैं. शिपिंग लागत भी बढ़ गई है, क्योंकि चार्टर दरें ऊंची हैं और दूर देशों से गैस खरीदकर लाने में जहाजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.

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अगर संघर्ष जारी रहता है, तो पाकिस्तान बिजली उत्पादन के लिए ज्यादा महंगे और प्रदूषण फैलाने वाले फर्नेस ऑयल का इस्तेमाल बढ़ा सकता है. गैसपोर्ट के अहमद ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारे सामने एक बहुत मुश्किल साल होगा, और उसके बाद दो-तीन साल और भी कठिन हो सकते हैं.'

बांग्लादेश और ताइवान की हालत भी पतली

ईरान जंग के बीच बांग्लादेश की हालत भी पतली है, हालांकि कुछ एलएनजी उसे खाड़ी के बाहर से भी मिलती है. फिर भी, बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति उतनी मजबूत नहीं है कि वो ऊंची कीमतों गैस खरीद सके. सरकार ने गैस की कमी से निपटने के लिए विश्वविद्यालय बंद करने जैसे राशनिंग उपाय शुरू किए हैं.

खाड़ी से एलएनजी के बड़े खरीदारों में से एक ताइवान भी कोयले से गैस और फिर नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने की अपनी स्ट्रैटजी के कारण मुश्किलों का सामना कर रहा है. युद्ध शुरू होते ही उसने वैकल्पिक कार्गो जमा करने के लिए तेजी दिखाई.

10 मार्च को आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि खाड़ी से 22 कार्गो सुरक्षित कर लिए गए हैं, जिससे अप्रैल के अंत तक सप्लाई को लेकर कोई चिंता नहीं होगी. अटलांटिक काउंसिल ग्लोबल एनर्जी सेंटर के केविन लीन ने कहा, 'गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने से गंभीर ऊर्जा संकट की आशंका बनी हुई है. 

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ट्रेडर्स के मुताबिक, चीन और जापान भी खाड़ी से सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए स्पॉट मार्केट से एलएनजी खरीद सकते हैं. एक जापानी एलएनजी ट्रेडर ने कहा, 'हमारी योजना सप्लाई को कवर करने के लिए JKM स्पॉट मार्केट से खरीदारी करने की है.' 

हालांकि, ट्रेडर्स और यूटिलिटी कंपनियां फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर फिर से कोयले की ओर लौटने की योजना बना रही हैं.

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