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ट्रंप की बढ़ी टेंशन! ईरान पर नए हमले की तैयारी, लेकिन सता रहा बड़ा डर

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है. इसके मुताबिक, यदि अमेरिका दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करता है, तो ईरान के बाकी सैन्य ठिकानों पर हमला करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मुश्किल होगा. ईरान ने अपने अहम सैन्य ढांचे को छिपाने और जगह बदलने की रणनीति अपना ली है.

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छिपे हुए लगातार बदल रहे हैं ईरान के सैन्य ठिकाने, अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा. (File Photo: ITG)
छिपे हुए लगातार बदल रहे हैं ईरान के सैन्य ठिकाने, अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा. (File Photo: ITG)

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक रिपोर्ट ने सैन्य रणनीति को लेकर बड़ा खुलासा किया है. यदि अमेरिका दोबारा ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करता है, तो उसके लिए इस बार मुश्किल आने वाली है, क्योंकि ईरान अपने हम सैन्य ठिकानों को लगातार बदल रहा है. उसे छिपाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है.

NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान में मौजूद संभावित सैन्य ठिकानों की एक सूची तैयार की है. हालांकि, इनमें से ज्यादातर ठिकाने अब या तो बेहद छिपे हुए हैं या लगातार अपनी जगह बदल रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ फिर से बड़ा सैन्य अभियान का फैसला ले सकते हैं.

ऐसे में ईरान में बाकी बचे सैन्य ठिकानों की पहचान करना और उन पर सफल हमला करना पहले की तुलना में काफी ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा. पिछले हमलों के बाद ईरान ने अपनी रणनीति बदल दी है. कई सैन्य ठिकाने अब जमीन के नीचे छिपाए गए हैं, जबकि कई मोबाइल सिस्टम लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं. इनको ट्रैक करना बेहद मुश्किल है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और इजरायल के शुरुआती हमलों के बाद ईरान ने अपने सैन्य साजो-सामान और अहम बुनियादी ढांचे को अलग-अलग जगहों पर फैला दिया है. ईरान ने अपनी महत्वपूर्ण सैन्य प्रणालियों और हथियारों को इस तरह तैनात किया है कि वे आसानी से सामने न आ सकें. इससे अमेरिका के लिए हाई-वैल्यू टारगेट्स की संख्या कम हो गई है.

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अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान की इस रणनीति ने भविष्य के किसी भी सैन्य अभियान को और ज्यादा कठिन बना दिया है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि जहां एक ओर कूटनीतिक बातचीत जारी है, वहीं ट्रंप प्रशासन अब भी सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है. यदि तेहरान के साथ बातचीत विफल होती है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. 

अमेरिकी रणनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि भविष्य के किसी अभियान में ज्यादा समय, अधिक संसाधन और सटीक खुफिया जानकारी की जरूरत पड़ेगी. ये रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिका-ईरान बातचीत और पश्चिम एशिया में सैन्य तैनाती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ईरान लगातार अपना पक्ष रख रहा है.

ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका है कि तेहरान परमाणु हथियार क्षमता विकसित कर सकता है. इसी वजह से क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बना हुआ है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. युद्ध की स्थिति बन सकती है.

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