ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने अमेरिका को लेकर सख्त बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पिछले 24 दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच कोई बातचीत या वार्ता नहीं हुई है. उन्होंने अमेरिका की कूटनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता और उसने मध्यस्थता की प्रक्रिया को भी नुकसान पहुंचाया है.
प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका इस युद्ध को पूरे क्षेत्र में फैलाने की कोशिश कर रहा है. उनके अनुसार यह एक अवैध युद्ध है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान के पास अपनी रक्षा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया, लेकिन उस पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिनका जवाब देना जरूरी है.
अमेरिका पर युद्ध को पूरे क्षेत्र में फैलाने का आरोप
उन्होंने बताया कि ईरान को कुछ देशों की ओर से बातचीत के लिए संदेश मिले हैं और उन पर प्रतिक्रिया भी दी गई है. लेकिन ईरान का रुख साफ है कि वह अपनी रक्षा करता रहेगा. उन्होंने कहा कि जो भी देश अमेरिका से बात कर सकते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि यह युद्ध अवैध है और अमेरिका को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान के उसके साथ अच्छे संबंध हैं और वह मानता है कि पाकिस्तान की मंशा सकारात्मक है. साथ ही उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश हालात को लेकर चिंतित हैं और तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं.
भारत को लेकर उन्होंने कहा कि भारत के साथ ईरान के ऐतिहासिक और सम्मानजनक संबंध हैं. भारत उन देशों में शामिल नहीं है जो हमलावरों की मदद कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही को लेकर भारत के साथ बातचीत जारी है.
प्रवक्ता ने कहा कि ईरान और कुछ यूरोपीय देशों के बीच भी संपर्क बना हुआ है. ओमान के विदेश मंत्री पिछले एक साल से मध्यस्थता कर रहे थे, लेकिन अमेरिका ने इस प्रक्रिया को विफल कर दिया. उन्होंने इजराइल और अमेरिका दोनों को मौजूदा हालात के लिए जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना है कि नागरिक ठिकानों पर हमले की धमकी देना युद्ध अपराध की मंशा को दर्शाता है.
मध्यस्थता प्रक्रिया पर भी अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
उन्होंने कहा कि ईरान की व्यवस्था मजबूत है और देश का नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय है. सुप्रीम लीडर पूरी तरह ठीक हैं और देश का सिस्टम प्रभावी तरीके से काम कर रहा है. उन्होंने दोहराया कि यह युद्ध अमेरिका ने शुरू किया है और उसे ही इसे खत्म करना होगा. ईरान अपनी रक्षा तब तक करता रहेगा जब तक जरूरत होगी.