ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एनबीसी के 'मीट द प्रेस' में रूस के साथ अपने देश के संबंधों की पुष्टि की है. अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि रूस ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों और संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए ईरान को सूचनाएं प्रदान की हैं. अराघची ने कहा कि ईरान और रूस के बीच सैन्य सहयोग कोई नई बात नहीं है और यह भविष्य में भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि ईरान और रूस के बीच बहुत अच्छी साझेदारी है.
हालांकि, विदेश मंत्री ने विशिष्ट खुफिया जानकारी होने से इनकार किया. अराघची ने कहा कि ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता को जानबूझकर 2,000 किलोमीटर तक सीमित रखा है, जिससे वह दुनिया के लिए खतरा न बने.
उन्होंने कहा कि यह युद्ध अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर थोपा गया है, जिसका जवाब वह आत्मरक्षा में दे रहा है.
मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा
ईरान ने अपनी मिसाइलों की रेंज को फिलहाल 2,000 किलोमीटर (1,240 मील) तक सीमित रखा है. अराघची के मुताबिक, इस सीमा को बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है और न ही लंबी दूरी की मिसाइलों पर काम करने के कोई सबूत हैं. मौजूदा रेंज में पूरा मिडिल ईस्ट और पूर्वी यूरोप का कुछ हिस्सा आता है. उन्होंने कहा कि ईरान नहीं चाहता कि दुनिया का कोई भी देश उसे खतरे के तौर पर देखे. अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलों के दावों को भी उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया है.
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स्थायी शांति की मांग
युद्ध विराम के बजाय ईरान जंग के स्थायी अंत की तलाश में है. अराघची ने कहा कि किसी भी समझौते से पहले हमलावरों को यह बताना होगा कि उन्होंने यह आक्रामकता क्यों शुरू की. उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर युद्ध थोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान अपने लोगों और सुरक्षा के लिए लड़ना जारी रखेगा. उनके मुताबिक, ईरान जो कुछ भी कर रहा है, वह आत्मरक्षा के तहत किए जा रहे कानूनी कार्य हैं और देश को ऐसा करने का पूरा अधिकार है.
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स्कूल धमाके पर अमेरिका को घेरा
अब्बास अराघची ने 28 फरवरी को एक स्कूल में हुए धमाके के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए गए आरोपों का कड़ा विरोध किया. इस धमाके में 165 से ज्यादा लोग, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे, मारे गए थे. अराघची का कहना है कि सबूत इसे अमेरिकी हवाई हमला बताते हैं. सैटेलाइट इमेज और विशेषज्ञ विश्लेषण भी संकेत देते हैं कि धमाका अमेरिकी हवाई हमलों के कारण हुआ था, जिसने रिवोल्यूशनरी गार्ड परिसर को भी निशाना बनाया था. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका नहीं, तो इस हमले के पीछे और कौन हो सकता है.