ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में शुरू की गई जवाबी कार्रवाई को लेकर बड़े दावे किए हैं. IRGC ने कहा है कि ईरानी सेना के नए सिरे से मिसाइल और ड्रोन हमलों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने दावा किया है कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पर चार बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया है और अब तक 560 अमेरिकी सैनिकों के हताहत मारे गए हैं.
IRGC के बयान के अनुसार, कुवैत में अमेरिकी नौसैनिक बेस (अली अल-सलेम एयर बेस) को पूरी तरह से डिकमीशन (बंद) कर दिया गया है. ईरानी सेना का कहना है कि इस अमेरिकी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया गया, जिससे बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया और बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं.
'इस्तेमाल के लायक नहीं हैं बेस'
ईरान के दावों के अनुसार, कुवैत में अमेरिकी ठिकाने पर किए गए हमले इतने घातक थे कि वह बेस अब इस्तेमाल के लायक नहीं बचा है.
बहरीन में अमेरिकी नौसेना का प्रमुख बेस (नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन, जहां US फिफ्थ फ्लीट का हेडक्वार्टर है) पर ड्रोनों से हमला किया गया, जिससे कमांड सेंटर और सपोर्ट स्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है.
'युद्धपोत पर दागीं चार मिसाइलें'
ईरान ने समुद्र में भी अपनी ताकत दिखाते हुए अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर चार मिसाइलें दागने का दावा किया है. ईरान का कहना है कि उसके सुरक्षाबल ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पर चार बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया जो कि सफल रहा. इस हमले में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को भारी नुकसान हुआ है.
ईरान के आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरी संघर्ष में अब तक 560 अमेरिकी सैनिक या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं. तेहरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता की रक्षा और दुश्मनों को करारा जवाब देने वाली एक बड़ी कामयाबी के रूप में पेश किया है.
वहीं, इससे पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच सशस्त्र तनाव बढ़ने के बाद उसने कई देशों में स्थित 14 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मारे गए. हालांकि, वाशिंगटन ने इस दावे को खारिज कर दिया है.