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'अमेरिकी ठिकानों का इस्तेमाल...', फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से बातचीत में ईरान का ट्रंप को कड़ा संदेश

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बातचीत में कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया और देश अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई कर रहा है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हमलों की निंदा करने की अपील की. साथ ही युद्ध को समाप्त करने के लिए शर्त भी रखी है.

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ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध खत्म करने की बात बेकार जब तक हमलों की गारंटी नहीं (Photo: Reuters)
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध खत्म करने की बात बेकार जब तक हमलों की गारंटी नहीं (Photo: Reuters)

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इजरायल और अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की. पेजेश्कियन ने कहा कि ये जो लड़ाई चल रही है, इसे हमने नहीं छेड़ा है. पेजेश्कियन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी संदेश दिया है.

उनका कहना था कि ईरान पर पहले हमला हुआ और अब वो सिर्फ अपनी रक्षा कर रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया का कोई भी देश हो, अगर उस पर हमला हो तो वो जवाब देगा ही - यह उसका स्वाभाविक और कानूनी हक है. ईरान भी यही कर रहा है, कुछ अलग नहीं.

इसके बाद उन्होंने अमेरिका को लेकर एक अहम बात कही. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जो अमेरिकी सैन्य अड्डे बने हुए हैं, उनका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होना चाहिए. उनका मानना है कि अगर ऐसा होता है तो इससे ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच के रिश्ते बिगड़ते हैं और पूरे इलाके का माहौल और ज़्यादा तनावपूर्ण हो जाता है.

पेजेश्कियन ने दुनिया के सामने एक बड़ा सवाल भी रखा, "जब तक इजरायल और अमेरिका के हमलों को नजरअंदाज किया जाएगा, तब तक इस इलाके में शांति कैसे आएगी?"

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उनका कहना था कि शांति की बात करना तब तक बेकार है जब तक एक तरफ के हमले को गलत नहीं माना जाता. दुनिया को निष्पक्ष होना होगा.

किसी के दबाव में आने का सवाल उठा तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, "ईरान किसी की धमकी से नहीं झुकेगा. चाहे कितना भी दबाव बनाया जाए, इस्लामिक रिपब्लिक अपने रुख पर कायम रहेगी."

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वो ईरान पर ट्रंप की सेना द्वारा हुए हमलों की खुलकर निंदा करें और हमलावर देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून मानने पर मजबूर करें. उनका कहना था कि "झूठे बहाने बनाकर किसी देश पर हमला करना 21वीं सदी में भी पुरानी और बर्बर सोच को दर्शाता है."

आखिर में उन्होंने एक शर्त रख दी. युद्ध बंद करने की बात तभी होगी जब इसकी पक्की गारंटी मिले कि भविष्य में ईरान की ज़मीन पर दोबारा हमला नहीं किया जाएगा. बिना इस भरोसे के कोई भी शांति समझौता ईरान को मंज़ूर नहीं.

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