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पुतिन से अब और चिढ़ जाएंगे ट्रंप! रूस से मिल रही मदद पर ईरानी विदेश मंत्री ने कही बड़ी बात

ईरान-अमेरिका टकराव के बीच रूस का मुद्दा भी गर्मा गया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा कि रूस के साथ ईरान का सैन्य सहयोग पहले भी था और आगे भी जारी रहेगा. यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ट्रंप प्रशासन ने मॉस्को को तेहरान की मदद न करने की चेतावनी दी है. इससे जंग का दायरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

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अमेरिका ने रूस को ईरान की मदद नहीं करने की चेतावनी दी थी (फाइल फोटो)
अमेरिका ने रूस को ईरान की मदद नहीं करने की चेतावनी दी थी (फाइल फोटो)

डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान जंग आसान साबित होती नहीं दिख रही. अमेरिका भले युद्ध में बढ़त का दावा करें, लेकिन ईरान का पलटवार भी हल्के में नहीं लिया जा सकता. ऊपर से रूस ने अमेरिका की टेंशन बढ़ाई है. US ने रूस से ईरान की मदद नहीं करने को भी कहा. लेकिन इस धमकी का कोई असर नहीं हुआ. अब ईरान के ताजा बयान से ट्रंप और चिढ़ जाएंगे.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि ईरान और रूस के बीच सैन्य सहयोग कोई नई बात नहीं है. अरघची ने आगे ये भी कह दिया कि, 'यह पहले भी होता रहा है और भविष्य में भी जारी रहेगा.'

दरअसल, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि रूस ने ईरान को मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों और संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए जानकारी मुहैया कराई है.

रूस द्वारा खुफिया जानकारी मुहैया कराने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अराघची ने कहा, 'रूस के साथ हमारी बहुत अच्छी साझेदारी है. वे कई अलग-अलग दिशाओं में हमारी मदद कर रहे हैं.'

अराघची ने आगे कहा कि तेहरान ने जानबूझकर अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज को 2,000 किलोमीटर (1,240 मील) तक सीमित कर दिया है. वह बोले, 'क्योंकि हम दुनिया में किसी और के लिए खतरा नहीं बनना चाहते.'

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अरघची ने दावा किया कि ईरान ने उस रेंज को बढ़ाने की कोई योजना शुरू नहीं की है और ऐसा कोई सबूत या खुफिया जानकारी नहीं है जो यह संकेत दे कि उसका देश 'लंबी दूरी की मिसाइलें बनाने जा रहा है, उन मिसाइलों की तो बात ही छोड़ दें जो अमेरिका की धरती तक पहुंच सकती हैं.' 

विदेश मंत्री ने बताया कि उनके दायरे में मिडिल ईस्ट का पूरा इलाका और पूर्वी यूरोप का कुछ हिस्सा शामिल है.

'युद्धविराम नहीं, स्थाई अंत चाहिए'

ईरान के विदेश मंत्री ने भी युद्धविराम नहीं बल्कि युद्ध का स्थाई अंत चाहने की बात कही. लेकिन उन्होंने कहा कि इससे पहले कि तेहरान युद्धविराम के बारे में सोचे अमेरिका-इजरायल को बताना होगा कि उन्होंने ये हमला क्यों शुरू किया.

उनका कहना है कि यह युद्ध अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर थोपा है.

बता दें कि शनिवार को स्टीव विटकॉफ ने कहा था कि अमेरिका ने रूस को संदेश भेजा है कि वो ईरान की मदद न करे. स्टीव मिडिल ईस्ट के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेष दूत हैं. पत्रकारों के सवाल पर स्टीव विटकॉफ ने कहा था कि उन्होंने रूस से कहा है कि वह ईरान को टारगेटिंग जानकारी और दूसरी मदद न भेजे.

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हालांकि, ट्रंप का दावा है कि रूस कोई खास मदद नहीं दे पा रहा. उन्होंने कहा था, 'अगर आप देखें कि पिछले हफ्ते ईरान के साथ क्या हुआ, अगर उन्हें जानकारी मिल रही है, तो इससे उन्हें ज्यादा मदद नहीं मिल रही है.'

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