मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने कूटनीति का नया दांव खेला है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सोमवार को रूस पहुंच गए, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से होने वाली है. इस दौरे को सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि अमेरिका को एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
अराघची का यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तीसरे महीने में प्रवेश कर रहा है. खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है, जहां ईरान अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और किसी भी तरह की नाकेबंदी का विरोध कर रहा है. यही मुद्दा मॉस्को में होने वाली बातचीत का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
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दरअसल, अराघची पिछले कुछ दिनों से लगातार कूटनीतिक दौरे कर रहे हैं. वह पहले पाकिस्तान गए, फिर ओमान पहुंचे और फिर पाकिस्तान गए और अब रूस में हैं. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद से मुलाकात की. इन बैठकों के जरिए ईरान क्षेत्रीय देशों के साथ तालमेल बनाकर एक साझा रणनीति तैयार करने पर फोकस कर रहा है.
पुतिन संग मिलकर क्या मैसेज देना चाहते हैं अराघची
ईरान इस समय दो स्तरों पर काम कर रहा है. एक तरफ वह क्षेत्रीय देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपने प्रमुख सहयोगी रूस के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है. मॉस्को यात्रा को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है. रूस लंबे समय से ईरान का करीबी सहयोगी रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका समर्थन करता रहा है.
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अमेरिका को रवैया बदलने की सलाह
रूस की तरफ से भी अमेरिका के रुख की आलोचना की गई है. वियना में रूस के प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने वॉशिंगटन पर 'दबाव और धमकी' की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर बातचीत में प्रगति चाहिए तो अमेरिका को अपना रवैया बदलना होगा.
हालांकि, अब तक अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर में सीधे बातचीत की कोई स्पष्ट संभावना नजर नहीं आ रही है. अप्रैल में हुई शुरुआती शांति वार्ता भी बेनतीजा रही थी. ऐसे में अराघची की यह कूटनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत है कि ईरान बातचीत के लिए रास्ते खुले रखना चाहता है, लेकिन अपनी शर्तों और 'रेड लाइन्स' के साथ.