हाल ही में सोशल मीडिया पर एक दावा सामने आया कि भारतीय टैंकर को होर्मुज स्ट्रेट पार करने के लिए ट्रांजिट फीस देनी पड़ी है. यह फीस चीन की मुद्रा युआन में दी गई जिसके बाद ही ईरान ने भारतीय टैंकर को होर्मुज पार करने दिया. लेकिन भारत सरकार ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है.
विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोमवार को दावा खारिज करते हुए कहा कि यह बेबुनियाद है. विदेश मंत्रालय के फैक्ट-चेक हैंडल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'फेक न्यूज अलर्ट! कृपया सोशल मीडिया पर ऐसी झूठी और बेबुनियाद खबरों और पोस्ट्स से सतर्क रहें!'
वायरल पोस्ट्स में दावा किया गया था कि भारतीय टैंकर ने ईरान को युआन में पेमेंट करके स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार किया. पोस्ट में इसे देश का अपमान बताया गया.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के झूठे दावे केंद्र सरकार के खिलाफ बदनाम करने की मुहिम का हिस्सा है. इससे पहले शनिवार को भी सरकार ने इस खबर को भी फर्जी बताया था जिसमें कहा गया कि अमेरिका ईरान पर हमले के लिए भारत से सैन्य मदद मांग रहा है.
ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के युद्ध के जवाब में बंद है होर्मुज
28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध की शुरुआत हुई थी. जवाब में ईरान ने वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. यह स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है जिसके जरिए मध्य-पूर्व के देश अपना तेल-गैस सप्लाई करते हैं.
इस रास्ते से होकर ग्लोबल सप्लाई का कुल 20% तेल और गैस गुजरता है. ईरान ने इसे लगभग बंद कर दिया है जिससे तेल और गैस की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं.
हालांकि, कूटनीतिक प्रयासों की वजह से भारत के कुछ तेल और गैस टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत मिल रही है. ईरान ने भी कहा है कि यह रास्ता दोस्त देशों के लिए खुला है.
इस बीच लगातार खबरें आ रही हैं कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूल रहा है. हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि होर्मुज को लेकर ईरान की तरफ से ऐसी कोई नीति आधिकारिक रूप से लागू नहीं की गई है.