
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के रिश्तों को अगर "लव-हेट रिलेशनशिप" कहा जाए तो गलत नहीं होगा. एक तरफ ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाने की धमकी देते रहे, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने भारत में बड़े निवेश की योजना भी बनाई.
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील का ऐलान हो चुका है. डोनाल्ड ट्रंप ने इंडिया टुडे मैगजीन के "न्यूजमेकर्स ऑफ द ईयर 2025" कवर को सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप साथ नजर आ रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के रिश्ते अब सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं, हालांकि कुछ महीने पहले हालात ऐसे नहीं थे.
यह भी पढ़ें: टैरिफ वॉर छेड़ने वाले ट्रंप आखिर कैसे झुक गए... इंडिया-US ट्रेड डील की Inside Story
ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी थी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदता रहा तो उस पर भारी टैरिफ लगाए जाएंगे लेकिन इन धमकियों के बावजूद अमेरिका भारत में बड़े स्तर पर निवेश की तैयारी कर रहा था. भारत उन पांच देशों में शामिल है, जहां ट्रंप के नेतृत्व में मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश की योजना बनी है.
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद 'अमेरिका फर्स्ट' आर्थिक नीति के तहत मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में कुल 9.6 ट्रिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया गया है.
इनमें से 4.8 ट्रिलियन डॉलर मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री सेक्टर के लिए हैं. वहीं, 2.7 ट्रिलियन डॉलर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में और करीब 0.78 ट्रिलियन डॉलर ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों में निवेश के लिए तय किए गए हैं.
मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री से जुड़े कुल निवेश का करीब 95 फीसदी यानी 4.7 ट्रिलियन डॉलर सिर्फ पांच देशों में किया जाना है. ये देश है- संयुक्त अरब अमीरात, कतर, जापान, सऊदी अरब और भारत.

व्हाइट हाउस के अनुसार, यूएई, कतर और सऊदी अरब में निवेश टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस और एनर्जी सेक्टर में होगा. जापान में ऑटो प्लांट और अमेरिकी स्टील से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा. जबकि भारत में निवेश का फोकस आपसी व्यापार बढ़ाने पर रहेगा.

इस बीच भारत में अमेरिकी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI में भी तेजी आई है. सिंगापुर, अमेरिका, मॉरीशस, नीदरलैंड और जापान भारत में सबसे बड़े निवेशक देशों में शामिल हैं. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत को मिलने वाले कुल एफडीआई में अमेरिका की हिस्सेदारी पहले 11 फीसदी थी, जो 2025-26 में अप्रैल से सितंबर के बीच बढ़कर 19 फीसदी हो गई.

वहीं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ हुआ यह ट्रेड डील भारत के लिए सबसे बेहतर है, खासतौर पर पड़ोसी देशों की तुलना में. उन्होंने कहा कि इस समझौते से किसानों, एमएसएमई सेक्टर और कई अहम उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा.