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होर्मुज ब्लॉकेड पर गजब कंफ्यूजन... बाहर अमेरिका, अंदर ईरान- कैसे निकलेंगे जहाज?

होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी रणनीति लागू कर रहे हैं. ईरान स्ट्रेट के भीतर जहाजों की आवाजाही नियंत्रित कर रहा है, जबकि अमेरिका बाहर से ईरानी बंदरगाहों की निगरानी और सैन्य दबाव बनाए हुए है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि फंसे हुए जहाज आखिर बाहर निकलेंगे कैसे?

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माहौल ऐसा है मानो होर्मुज स्ट्रेट के भीतर ही होर्मुज बन गया है. (Photo- ITG)
माहौल ऐसा है मानो होर्मुज स्ट्रेट के भीतर ही होर्मुज बन गया है. (Photo- ITG)

होर्मुज स्ट्रेट में इस समय सबसे बड़ा कन्फ्यूजन पैदा हो गया है. एक तरफ ईरान ने स्ट्रेट के अंदर अपने नियंत्रण का दावा करते हुए आवाजाही पर सख्ती कर दी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने स्ट्रेट के बाहर यानी गल्फ ऑफ ओमान में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाकर ईरानी बंदरगाहों पर दबाव बना दिया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर दोनों तरफ सैन्य नियंत्रण है तो आखिर सैकड़ों व्यापारिक जहाज बाहर निकलेंगे कैसे?

दरअसल, दोनों देशों की कार्रवाई अलग-अलग इलाकों में है. ईरान का नियंत्रण होर्मुज स्ट्रेट और उसके उत्तरी हिस्से पर है. यहां आईआरजीसी की नौसेना गश्त कर रही है.

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ईरान का कहना है कि उसकी मंजूरी के बिना कोई जहाज तय रूट से नहीं गुजर सकता. उसने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. हाल के दिनों में कुछ जहाजों पर हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट को "अगले आदेश तक" बंद रखने का ऐलान भी किया है.

अमेरिका ने किस इलाके में ब्लॉकेड लगा रखा है?

अमेरिका की रणनीति अलग है. अमेरिकी नौसेना सीधे स्ट्रेट के अंदर नहीं, बल्कि उसके बाहर गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर की तरफ सक्रिय है. यहां अमेरिकी युद्धपोत और सेंटकॉम की फोर्स उन जहाजों पर नजर रख रही हैं, जो ईरानी बंदरगाहों की तरफ आते-जाते हैं. अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग खुले रहने चाहिए और किसी भी देश को वैश्विक व्यापार बाधित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

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यही वजह है कि इसे "डबल ब्लॉकेड" की स्थिति कहा जा रहा है. स्ट्रेट के अंदर ईरान का दबाव है और बाहर अमेरिकी सैन्य निगरानी. इस बीच खाड़ी के अंदर मौजूद सैकड़ों तेल टैंकर और कार्गो जहाज बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं.

होर्मुज स्ट्रेट में कैसी है जहाजों की आवाजाही?

जहाजों के सामने फिलहाल चार विकल्प माने जा रहे हैं. पहला, ओमान के तटीय समुद्री कॉरिडोर का इस्तेमाल करना, जहां सुरक्षित रास्ता उपलब्ध है. इस रास्ते को ओमान के साथ मिलकर यूनाइटेड नेशन ने तैयार किया है. इससे ईरान को समस्या है और उसने चेतावनी दे रखी है कि इस रास्ते का इस्तेमाल करने पर कार्रवाई की जा सकती है.

दूसरा रास्ता ये है कि ईरान से इजाजत के बाद ही जहाज अपने सफर को निकलें. ये पाबंदियां ईरान की तरफ से लगाई गई हैं. तीसरा ऑप्शन जहाजों के लिए ये है कि वे अमेरिका की जांच पूरी करने के बाद ही आगे बढ़े. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर सर्विलांस लगा रखा है. चौथा ऑप्शन यही है कि जहाज अमेरिका-ईरान की तरफ से पाबंदियां हटने का इंतजार करें और सुरक्षित स्थानों पर रुके रहें.

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होर्मुज स्ट्रेट से कैसे गुजर रहे जहाज?

समुद्री निगरानी प्लेटफॉर्म और शिपिंग ट्रैकिंग सिस्टम के मुताबिक, कई जहाज अपनी लोकेशन सार्वजनिक करने वाले एआईएस ट्रांसपोंडर भी बंद कर रहे हैं, ताकि संवेदनशील इलाकों से गुजरते समय उनकी गतिविधियों का पता न चल सके. हालांकि, इससे टकराव और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है.

यानी होर्मुज में मौजूदा संकट सिर्फ सैन्य टकराव का नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का भी है. जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल लाइफलाइन पर अनिश्चितता बनी रह सकती है.

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