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6 देशों के 187 सैनिक कर पाएंगे ग्रीनलैंड की सुरक्षा? अमेरिकी हथियार से ही US आर्मी को मात देने की तैयारी

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुली धमकियों के बाद फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन समेत सात यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में अपने सैनिक तैनात किए हैं. डेनमार्क के नेतृत्व में यह तैनाती एक सैन्य अभ्यास का हिस्सा बताई जा रही है.

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सैनिकों संग डेनमार्क की प्रधानमंत्री. (File Photo)
सैनिकों संग डेनमार्क की प्रधानमंत्री. (File Photo)

आर्कटिक क्षेत्र में स्थित ग्रीनलैंड एक बार फिर वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस इलाके को अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम बताते रहे हैं और यहां तक कह चुके हैं कि जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे. ट्रंप के इन बयानों के बाद यूरोप के कई देशों ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. डेनमार्क समेत यूरोप के सात मुल्कों के कमोबेश 187 सैनिक ग्रीनलैंड को बचाने की तैयारियों में जुटे हैं.

17 जनवरी तक ग्रीनलैंड में करीब 187 यूरोपीय सैनिक मौजूद हैं. इनमें डेनमार्क के लगभग 150 सैनिक पहले से तैनात हैं, जिनमें कुछ नागरिक हैं. जबकि फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्वीडन, नॉर्वे और नीदरलैंड्स ने मिलकर सीमित संख्या में अपने सैनिक भेजे हैं. यह तैनाती डेनमार्क की अगुवाई में चल रहे नाटो अभ्यास 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' के तहत की गई है, जिसे आधिकारिक तौर पर एक रिकॉनिसेंस यानी टोही मिशन बताया गया है.

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फ्रांस ने करीब 15 माउंटेन इन्फैंट्री सैनिक भेजे हैं, जबकि जर्मनी की तरफ से 13 सैनिकों की एक टोही टीम तैनात है. स्वीडन ने तीन और नॉर्वे ने दो सैनिकों के छोटे दल भेजे हैं, वहीं ब्रिटेन और नीदरलैंड्स ने एक-एक अधिकारी को अभ्यास में शामिल किया है और फिनलैंड ने दो सैन्य अधिकारियों को भेजा है.

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इनके अलावा डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए अमेरिकी मेड एफ-16 और एफ-35 फाइटर जेट्स, नौसैनिक पोत और हेलिकॉप्टर भी तैनात किए हैं. हाल ही में डेनमार्क और फ्रांस के लड़ाकू विमानों ने ग्रीनलैंड के ऊपर हवा में ईंधन भरने का अभ्यास भी किया.

यूरोपीय सैनिक क्यों तैनात किए गए?

यूरोपीय सैनिकों ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में संयुक्त अभ्यास के दौरान डेनमार्क के जॉइंट आर्कटिक कमांड के अधिकारियों से मुलाकात की. डेनमार्क का कहना है कि यह कमांड मुख्य रूप से रूसी गतिविधियों पर नजर रखने और सर्च एंड रेस्क्यू मिशन के लिए जिम्मेदार है, न कि अमेरिका से संभावित टकराव के लिए.

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अमेरिकी सैनिक पहले से तैनात

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के पास पहले से ही ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस में करीब 200 सैनिक मौजूद हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यूरोप के ये 187 सैनिक वाकई ग्रीनलैंड की सुरक्षा कर पाएंगे या यह तैनाती सिर्फ एक राजनीतिक संदेश भर है. ग्रीनलैंड पर बढ़ती दिलचस्पी ने आने वाले समय में आर्कटिक क्षेत्र को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है.

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