ईरान ने ऑस्कर नॉमिनेटेड और मशहूर फिल्म डायरेक्टर जफर पनाही को पांच साल और एक महीने जेल की सजा सुनाई है. उनके वकील मुस्तफा नीली ने मंगलवार देर रात इसकी जानकारी दी. अदालत ने पनाही की चल और अचल संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है. हालांकि, यह साफ नहीं है कि उन्हें किस मामले में दोषी ठहराया गया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पनाही के एक करीबी दोस्त और यूरोप में रहने वाले ईरानी कार्यकर्ता हुसैन रज्जाक ने बताया कि अदालत ने सोमवार को सजा सुनाई थी. उन्होंने सोमवार शाम पनाही से बात भी की थी.
रज्जाक के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के बाद भी पनाही को गिरफ्तार नहीं किया गया है. इस फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है. हालांकि, रज्जाक ने बताया कि पनाही के सभी बैंक खाते अब ब्लॉक कर दिए गए हैं.
ईरानी सत्ता की लगातार करते रहे आलोचना
जफर पनाही ईरान के मौजूदा नेतृत्व की आलोचना करते रहे हैं. उन्होंने विदेशी मीडिया को दिए इंटरव्यू में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की निंदा भी की थी. इससे पहले उन्हें व्यवस्था के खिलाफ प्रचार गतिविधियों के आरोप में दोषी ठहराया जा चुका है. 2009 के चुनावी विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद 2010 में ईरान की कोर्ट ने उन पर 20 साल तक फिल्म बनाने, इंटरव्यू देने और देश से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाया था.
बता दें कि पनाही समकालीन ईरानी सिनेमा के सबसे चर्चित डायरेक्टरों में शामिल हैं. पिछले करीब 20 साल में उन्हें कई बार जेल भेजा गया, विदेश यात्रा पर रोक लगाई गई और नजरबंद भी रखा गया. इसके बावजूद उन्होंने फिल्में बनाना जारी रखा.
पनाही को विदेश में खूब मिला सम्मान
उन्होंने 2011 में ‘This Is Not a Film’ बनाई. इसे पेन ड्राइव में छुपाकर देश से बाहर भेजा गया और कान फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया. पनाही ने कई फिल्में ऐसी बनाई, जो खुलेआम ईरानी सत्ता की आलोचना करती थीं. ‘Taxi’ (2015) में उन्होंने खुद टैक्सी ड्राइवर बनकर समाज की असलियत दिखाई. ‘3 Faces’ और ‘No Bears’ जैसी फिल्मों के जरिए भी उन्होंने ईरानी सत्ता की हकीकत बयां की.
बर्लिन, वेनिस और कान जैसे फिल्म फेस्टिवल्स में उनकी फिल्मों को सराहा गया. वो वैश्विक सिनेमा में प्रतिरोध की आवाज बन गए. बावजूद इसके वो जेल गए. उन्होंने अपनी फिल्म 'इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट' की शूटिंग ईरान में गुप्त रूप से की थी. यह फिल्म उन्होंने सात महीने जेल में रहने के बाद बनाई थी. साल 2023 में भूख हड़ताल के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया था.
पनाही इस साल मार्च में ईरान लौटे थे. यह वापसी ऐसे समय हुई, जब अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले शुरू होने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ था.