चीन ने युद्ध प्रभावित ईरान और लेबनान को मानवीय सहायता देने की घोषणा की है. चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि दोनों देशों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को गति देने के लिए जल्द ही सहायता की नई खेप भेजी जाएगी. चीन का कहना है कि वह क्षेत्र में मानवीय संकट को कम करने और शांति बहाली के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन निकट भविष्य में ईरान और लेबनान को नई मानवीय सहायता उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि युद्ध और संघर्ष के कारण प्रभावित हुए लोगों को राहत पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है और चीन इस दिशा में अपनी भूमिका निभाता रहेगा. हालांकि, उन्होंने सहायता की कुल राशि या उसमें शामिल सामग्री का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया.
लिन जियान ने बताया कि चीन इससे पहले भी ईरान सहित कई संघर्ष प्रभावित देशों को आपातकालीन सहायता दे चुका है. उन्होंने कहा कि मार्च 2026 में चीन ने ईरान और अन्य देशों के लिए आपातकालीन मानवीय सहायता पैकेज जारी किया था. इसके अलावा, उसी महीने चीन ने अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के दौरान ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए बम हमले के पीड़ितों के लिए दो लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता देने की घोषणा की थी. उस हमले में कई बच्चों और नागरिकों की मौत हुई थी, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई थी.
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चीनी विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बीजिंग मध्य पूर्व में शांति बहाली के लिए अपने कूटनीतिक प्रयासों को और तेज करेगा. लिन जियान ने कहा कि चीन शांति वार्ता को आगे बढ़ाने और क्षेत्र में स्थायी स्थिरता स्थापित करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है. उन्होंने कहा कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को G-7 समिट के इतर इजिप्ट के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी के साथ बैठक के दौरान ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया.
ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़ा मौजूदा मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) अभी अंतिम रूप में नहीं है. यदि उन्हें ये समझौता पसंद नहीं आया, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के रास्ते पर वापस लौट सकता है. G7 समिट में ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है. इससे मध्य पूर्व में तनाव दोबारा बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है. बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 107 दिनों से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए 12 जून को एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे. फाइनल पीस डील पर दोनों देशों के बीच अभी बातचीत चल रही है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना है.