बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की बीमार मां से आखिरी बार मिलने की ख्वाहिश अधूरी रह गई. उनकी मां संध्या रानी धर का गुरुवार को निधन हो गया. चिन्मय दास की तरफ से 9 सितंबर को बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल के लिए आवेदन किया गया था, जिसे खारिज कर दिया गया. अब मां की मौत के बाद परिवार ने दोबारा पैरोल के लिए आवेदन किया, जिसके बाद चिन्मय दास को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पांच घंटे की पैरोल दी गई.
बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, संध्या रानी धर ने गुरुवार सुबह करीब 9:34 बजे चटगांव के श्री श्री पुंडरीक धाम आश्रम में अंतिम सांस ली. वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं और पहले चटगांव के मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में भर्ती थीं. परिवार के मुताबिक, संध्या रानी धर अपने बेटे की जेल में हालत को लेकर बेहद चिंतित थीं. चिन्मय दास को बार-बार कोशिश के बावजूद जमानत नहीं मिल रही थी. इसी बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई. मंगलवार को उन्होंने श्री श्री पुंडरीक धाम आश्रम जाने की इच्छा जताई थी. चिन्मय कृष्ण दास भी लंबे समय तक इसी आश्रम में रहे हैं.
मां की खराब तबीयत की जानकारी मिलने के बाद चिन्मय दास के परिवार ने उन्हें उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की थी. 9 सितंबर को उनके बड़े भाई रंजन कुमार धर ने पैरोल के लिए आवेदन किया था, लेकिन चटगांव जिला प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया.
इसके अगले दिन मां की मौत हो गई. इसके बाद परिवार ने फिर से पैरोल के लिए आवेदन किया. चटगांव के डिप्टी कमिश्नर जाहिदुल इस्लाम मिया ने चिन्मय कृष्ण दास को पांच घंटे की पैरोल देने का आदेश दिया.
बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे उन्हें जेल से बाहर लाया गया ताकि वह अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें. डिप्टी कमिश्नर जाहिदुल इस्लाम मिया ने द डेली स्टार से कहा कि चिन्मय कृष्ण दास के भाई की ओर से मां के निधन के बाद आवेदन दिया गया था. कानून के तहत उन्हें पांच घंटे की पैरोल पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया गया है.
नवंबर 2024 से जेल में बंद हैं चिन्मय दास
चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका से गिरफ्तार किया गया था. वह सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता हैं. अगले दिन उन्हें चटगांव की अदालत में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी.
उनकी गिरफ्तारी के बाद अदालत परिसर में उनके समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. इस दौरान वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की मौत हो गई थी. इसके बाद अलीफ के पिता ने 31 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था. बाद में जांच अधिकारी के अनुरोध पर चिन्मय दास को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया.